धान के लिए वरदान लेकिन सब्जियों लिए अभिशाप है ये बारिश 

धान के लिए वरदान लेकिन सब्जियों लिए अभिशाप है ये बारिश रविवार को हुयी बारिश के बाद खेतों से सब्जियां निकालता किसान 

लखनऊ। खरीफ की मुख्य फसल धान की बुवाई के लिए खेत की तैयारी कर रहे किसानों के चेहरे रविवार की रात हुई बारिश से खिल गए हैं। धान की नर्सरी के लिए खेतों को इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत थी और ऐसे में इस बरसात ने किसानों की यह मुराद पूरी कर दी, लेकिन इसके साथ ही यह बरसात उन किसानों को चिंता में भी डाल दी जिनके खेतों जायद के सीजन की सब्जियां लगी हुई हैं।

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नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डा. ए.के. सिंह ने बताया कि ग्रीष्मकालीन मई के अंतिम सप्ताह में होने वाली यह बरसात खरीफ सीजन के लिए वरदान है।

खेत में बुवाई करता किसान

खरीफ सीजन की मुख्य फसलों धान, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल और सोयाबीन की बुआई के लिए फायदेमंद होगा। '' उन्होंने बताया कि जिन खेतों की जुताई करके छोड़ दिया गया तो उसमें इस बरसात के पानी से वायु का संचरण बढ़ेगा और खेत की जमीन में जल धारण की क्षमता बढ़ेगी जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा।

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के लखनऊ केन्द्र के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया '' इस साल मानूसन समय से पहले आने का अनुमान है। रविवार की रात हुई बरसात से खेतों में पर्याप्त नमी आने से किसानों को खरीफ की बुआई जल्दी करने में आसानी होगी। '' उन्होंने बताया कि यह बरसात अभी प्री-मानसून की बरसात नहीं है। प्री मानसून की बरसात जून के दूसरे या तीसरे सप्ताह से होने को अनुमान है।

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उत्तर प्रदेश कृषि विभाग भी रविवार की बारिश से उत्साहित है। विभाग ने इस साल खरीफ सीजन में पिछले साल के मुकाबले फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल और खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले साल इस सीजन में 91.44 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुवाई हुई थी इस बार 91.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले साल खरीफ में 185.11 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार 194.62 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

खेत में दवा का छिडकाव करता किसान

कृषि विभाग के निदेशक ज्ञान सिंह का कहना है कि मानसून के पहले रविवार की रात बरसात से किसानों को बुवाई तय समय पर कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि खरीफ की मुख्य फसल धान का का उत्पादन बढ़ाने की भी कृषि विभाग ने तैयारी शुरू की है। पिछले साल प्रदेश में 59.66 लाख हेक्टेयर में धान की खेती से 143.96 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ था, इस बार इतने ही हेक्टेयर में 151.30 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन का जो लक्ष्य तय हुआ है वह प्राप्त करने में आसानी होगी क्योंकि धान की नर्सरी के लिए पर्याप्त नमी मिल जाएगी।

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उत्तर प्रदेश में खरीफ और रबी सीजन के मुकाबले जायद में मार्च से लेकर जून के बीच में सब्जियों की खेती भी बड़ी मात्रा में की जाती है। कृषि विभाग की तरफ से जायद अभियान 2017 के आंकड़ों के अनुसार इस बार 9 लाख, 29 हजार, 256 हेक्टेयर में सब्जियों खेती हुई है। जिसमें मुख्य रुप से भिंडी, कोहड़ा, लौकी, तुरई, टमाटर, घेवड़ा, करेला, लोबिया, पेठा, बीन, प्‍याज और खीरा की खेती हुई है। साथ ही खरबूजा और तरबूज और ककड़ी की भी खेती हुई है।

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डा. मेजर सिंह ने बताया कि जायद यानि ग्रीष्कालीन सब्जियों की खेती में पानी की कम जरूरत पड‍़ती है। इस मौसम को ध्यान में रखते हुए सब्जियों की ऐसी वैराइटी इजाद की गई हैं। ऐसे में अगर अधिक बरसात होती है तो इन सब्जियों में बीमारी फैलने का खतरा रहता है। खासकर अधिक बरसात से सब्जियों के पत्ते काले होने लगते हैं और फूलों में सड़न भी पैदा हो जाती है।

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