देशी नस्ल की गायों के संरक्षण के लिए बनी गौशाला

देशी नस्ल की  गायों के संरक्षण के लिए बनी गौशालाइस डेयरी में 67 देशी नस्ल की साहीवाल गाय पाली जा रही हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सुल्तानपुर। जिले में देशी नस्लों की गायों को बचाने के लिए एक खास गौशाला बनाई गई है। गोमती गौशाला नाम से जानी जाने वाली इस डेयरी में 67 देशी नस्ल की साहीवाल गाय पाली जा रही हैं।

सुल्तानपुर जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर उत्तर दिशा में मुलनापुर गाँव में 4 एकड़ क्षेत्र में बनी इस डेयरी की संस्थापिका पल्लवी वर्मा बताती हैं, ‘‘आजकल ज्यादातर पशुपालक कम समय में अधिक मुनाफा पाने के लिए डेयरी में विदेशी नस्ल की गायों को पालते हैं, ऐसे में डेयरी व्यवसाय में देशी साहीवाल गाय का पाला जाना कम हो गया है।’’

नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिर्सोसेज (एनबीएजीआर) की वर्ष 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के डेयरी उद्योग में देशी गायों की तुलना में मुर्राह बैसों व विदेशी एच एफ नस्लों की गायों के प्रयोग में 11 प्रतिशत वृद्धि देखी गयी है।

“अन्य दुधारू जानवरों की तुलना में साहीवाल गायों से कम मात्रा में दूध मिलता है,लेकिन 67 गायों से हमें हरदिन 350 से 400 लीटर दूध मिल जाता है।” पल्लवी बताती हैं। आज गोमती गौशाला की मदद से 50 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से 300 लीटर दूध हररोज़ शहर की बाज़ार व पराग कंपनी को भेजा जाता।

आने वाले समय में हम साहिवाल गायों के अलावा और भी अलग अलग देशी किस्मों की गायों को अपनी डेयरी में शामिल करेंगे, जिससे अधिक से अधिक देशी नस्लों की गायों को बढ़ावा मिल सके।
पल्लवी वर्मा, संस्थापिका, गोमती गौशाला

गौशाला में पाले जा रहे पशुओं की साफ़ सफाई व उनके बाड़े को साफ़ सुथरा बनाए रखने के डेयरी में सौर ऊर्जा की मदद से 24 घंटे पानी की सप्लाई रखी जाती है।
लालजी, गौशाला के संरक्षक

उन्होंने बताया, ‘‘पशुओं के मल का सही उपयोग करने के लिए गौशाला में छोटा बायोगैस संयंत्र भी लगा है जिससे गोबर की खाद भी मिल जाती है। देशी पशुओं की इस गौशाला से पल्लवी हर महीने चार से पांच लाख रूपए आसानी से कमा लेती हैं।’’

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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