भुखमरी से दुनिया को बचाएगा बाजरा

भुखमरी से दुनिया को बचाएगा बाजराफोटो साभार: इंटरनेट

लखनऊ। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से जिस तरह धरती का तापमान बढ़ने के साथ ही सूखा बढ़ रहा है, ऐसे में आने वाले समय में गेहूं, धान और मक्का जैसी फसलों को पैदा होना मुश्किल हो जाएगा। इसको देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि वैज्ञानिकों की एक टीम ने बाजरे पर अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है कि कम पानी और सूखारोधी होने के कारण बाजरा की खेती ही दुनियाभर का पेट भर सकती है।

अधिक तापमान और सूखे का असर नहीं

इस बारे में जानकारी देते हुए इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-अरीड ट्रोपिक्स के शोध निदेशक राजीव वाष्र्णेय ने बताया, ''हमारी टीम ने जब बाजरे पर शोध किया तो पाया गया कि बाजरे के जीनोम में एक खास विशेषता है जो अधिक तापमान और सूखे की स्थिति में भी बाजरा के पौधे के विकास पर कोई असर नहीं पड़ता।''

यह भी पढ़ें: भारतीय मिलेट्स को जानने के लिए बेंगलुरू में जुटेंगे दुनियाभर के लोग

पर्यावरण के लिए भी उपयोगी

उन्होंने बताया, “बाजरे की फसल पर्यावरण के लिए भी उपयोगी है। यह जलवायु परिवर्तन के असर को कम करती है। इसके विपरीत धान की फसल जलवालु परिवर्तन में सहायक साबित होती है क्योंकि उससे मीथेन गैस निकलती है।“ राजीव आगे बताते हैं, “धान की खड़ी फसल में पानी में डूबी जमीन से ग्रीन हाऊस गैस निकलती है। गेंहू एक तापीय संवेदनशील फसल है और बढ़ते हुए तापमान का इस पर बुरा असर पड़ता है। इस प्रकार से हो सकता है कि एक ऐसा समय आए, जब गेंहू हमारे खेतों से एक दम गायब हो जाए।“

42 डिग्री सेल्सियस का तापमान सह सकती है फसल

राजीव वाष्र्णेय ने बताया, “बाजार के जीनोम पर अध्ययन करते समय वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि बाजरा की फसल 42 डिग्री सेल्सियस का तापमान सह सकती है जबकि बाकी की फसलें 30 से लेकर 37 डिग्री तापमान को ही सहन नहीं कर पाती हैं।“ उन्होंने बताया कि 30 संस्थानों के 65 वैज्ञानिकों ने 994 बाजरा के डीएनए सिक्वेंसेस और जीनोम पर अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है।

यह भी पढ़ें: कुछ ऐसी आसान तकनीकें जिन्हें अपनाकर आप भी बन सकते हैं सुपर किसान

विश्व में 25 मिलियन हेक्टेयर में बाजरा की खेती

पूरी दुनिया में 25 मिलियन हेक्टेयर में बाजरा की खेती हो रही है और 90 मिलियन लोगों के भोजन में यह इस्तेमाल हो रहा है। भारत तरह-तरह के बाजरों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और बाजरे की अधिकांश प्रजातियां यहां पाई जाती हैं, लेकिन पिछले पांच दशकों के दौरान बाजरे की खेती वाला इलाका घटता जा रहा है। 1960 में हरित क्रांति के बाद इसकी अनदेखी की गई। पिछले पांच दशकों के दौरान अनेक किसान बाजरे की जगह अन्य फसलें उगाने लगे हैं और यह भारत में खाद्यानों की खेती के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।

बाजरे की खेती को नहीं मिलता समर्थन

दिल्ली विश्वविद्यालय के होम इकनोमिक्स इंस्टीट्यूट की पूर्व निदेशक डॉ. संतोष जैन पस्सी ने बताया, ''बाजरे की खेती को राज्यों का समर्थन नहीं मिलता है, जिसके कारण बाजरे की खेती के लिए न ही किसानों को ऋण मिलता और न इसका बीमा हो सकता है। इस प्रवृति को बदलने की जरूरत है। आवश्यकता इस बात की है कि भारत के नीति निर्धारक बाजरे की खेती पर ध्यान दें और ऐसी नीतियां बनाएं जो किसानों के अनुकूल माहौल बना सकें।''

यह भी पढ़ें: किसान बिना खर्चे के घर में बनाएं जैविक कीटनाशक

बहुत पोषक होता है बाजरा

इंडियन डायेटिक एसोसिएशन की सीनियर डायटीशियन डॉ. विजयश्री प्रसाद ने बताया, ''बाजरा बहुत पोषक होता है और इसमें लसलसापन नहीं होता। इससे अम्ल नहीं बन पाता और यह आसानी से हजम हो जाता है। लसलसे पदार्थ से मुक्त होने के कारण यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो पेट की बीमारियों से पीड़ित होते हैं। बाजरे की रोटी अधिक दिनों तक खाने से इसमें पाए जाने वाला ग्लूकोज धीरे-धीरे निकलता है और इस प्रकार से यह मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी अच्छा है।''

वे तत्व, जो भोजन में होते हैं जरूरी

उन्होंने बताया, “जर्मनी के बॉन शहर में 6 नवंबर से चल रहे 23वें जलवायु सम्मेलन में भी भविष्य की फसल के रूप में बाजरा की खेती पर चर्चा हुई। बाजरे में लोहा, कैल्शियम, जस्ता, मैग्निसियम और पोटेशियम जैसे तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं। इसमें काफी मात्रा में वह फाईबर मिलता है जो भोजन में जरूरी होता है और तरह-तरह के विटामिन होते हैं (कैरोटिन, नियासिन, विटामिन बी6 और फोलिक एसिड) इसमें मिलने वाला प्रचुर मात्रा में लेसीथीन शरीर के स्नायुतंत्र को मजबूत बनाता है।“

यह भी पढ‍़ें: हर्बल घोल की गंध से खेतों के पास नहीं फटकेंगी नीलगाय, ये 10 तरीके भी आजमा सकते हैं किसान

भारत की आबादी का अधिकांश भाग हो सकती है कुपोषणमुक्त

डा. विजयश्री प्रसाद ने बताया, “नियमित रूप से बाजरा खाने से भारत की आबादी का अधिकांश भाग कुपोषणमुक्त हो सकता है, हालांकि बाजरे को मोटा अनाज कहा जाता है लेकिन पोषण तत्वों में समृद्ध होने के कारण इस अनाज को न्यूट्रिया मिलेट्स या न्यूट्रिया सीरियल्स कहा जा रहा है।“ उन्होंने बताया कि बाजरे के अनाज में पोषक तत्व होते हैं। यह गेंहू और चावल के मुकाबले तीन से पांच गुने तक अधिक पोषक होता है। इसमें ज्यादा खनिज, विटामिन, खाने के लिए रेशे और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। बाजरा के खाद्धय पदार्थ खाने वालों के शरीर में मोटापा नहीं आता और उच्च रक्तचाप की बीमारी नहीं लगती।

कई तरह के भोज्य पदार्थ किए जा सकते हैं तैयार

डॉ. संतोष जैन पस्सी ने बताया, “बाजरे का दालों और तिलहनों के साथ इस्तेमाल करके इससे पोषक भोजन तैयार किया जा सकता है। इससे चपातियां, ब्रैड, लड्डू, पास्ता, बिस्कुट और तरह-तरह की भोज्य पदार्थ तैयार किये जा सकते हैं। यह प्रोबायोटिक पेय पदार्थ तैयार करने में भी काम आता है। छिलके उतारने के बाद इसका इस्तेमाल चावल की तरह किया जा सकता है। इसके आटे का प्रयोग विभिन्न पदार्थों के बनाने में होता है। बेसन के साथ मिलाकर इसका इस्तेमाल इडली, डोसा और उत्पम बनाने में किया जा सकता है।“

Share it
Top