मानसून ने दिया धोखा, यूपी में अभी तक कम हुई 25 फीसदी बारिश, कई जिलों में पड़ सकता है सूखा

मानसून ने दिया धोखा, यूपी में  अभी तक कम हुई 25 फीसदी बारिश, कई जिलों में पड़ सकता है सूखाउत्तर प्रदेश में अभी तक औसत बरसात 25 प्रतिशत कम हुई है

लखनऊ। प्रदेश में अच्छे मानसून के पूर्वानुमान के साथ इस साल अच्छी बारिश की भविष्यवाणी मौसम विभाग की तरफ से की गई थी लेकिन मानसून ने दगा दे दिया है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद की मौसम आधारित रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में औसत बरसात 25 प्रतिशत कम हुई है, जिसके कारण प्रदेश के कई जिलों में सूखे का संकट उत्पन्न हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में 1 जून से लेकर 5 सितंबर तक सामान्य वर्षा 681.2 मिलीमीटर की तुलना में मात्र 510.5 मिलीमीटर बर्षा ही हुई है, जो सामान्य से 25.1 प्रतिशत कम है।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. आई.एऩ मुखर्जी ने बताया '' उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद थी लेकिन अभी तक बरसात के जो आंकड़े मिल हैं वह निराशाजनक हैं। प्रदेश के सभी हिस्सों में कम बरसात हुई है। ''

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में कोई भी ऐसा जिला नहीं है जहां पर सामान्य से अधिक बरसात हुई हो। उत्रत प्रदेश में सूखे के लिए चर्चित बुंदेलखंड में इस बार कम बरसात होने से किसान से लेकर सरकार तक चिंतित है। बुंदेलखंड में सामान्य वर्षा 664.3 मिलीमीटर की तुलना में मात्र 418.4 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो सामान्य से 37 प्रतिशत कम है।

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स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों में बरसात कम हुई है। नेपाल की नदियों के पानी के कारण बाढ़ की मार झेल रहे पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी इस बार सामान्य से कम बरसात अभी तक हुई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य वर्षा 791.2 मिलीमीटर के मुकाबले 616.7 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो सामान्य से 22.1 प्रतिशत कम है।

कम बारिश को देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने किसानों को सूखे से निपटने के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। जिसमें बताया गया है कि सूखे की स्थिति में खाद्यान्न फसलों में 2 प्रतिशत यूरिया और पोटाश का छिड़काव करें। सूखे को देखते हुए दलहनी और तिलहनी फसलों में सिंचाई करके नमी बनाए रखें। धान में यह समय कल्ले, बाल निकलने और फूल निकलने का है। ऐसे में धान के खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है।

नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर मेट्रोलाजी विभाग के वैज्ञानिक प्रोफेसर डा. ए.के. सिंह ने बताया '' इस समय तापक्रम में बहुत अधिक उतार चढ़ाव है। ऐसे में फसलों में रोग और कीट के प्रकोप का खतरा रहता है। ऐसे में इसके नियंत्रण के लिए किसान अभी से तैयारी शुरू कर दें। '' उन्होंने बताया कि धान में हरा, भूरा एवं सफेद पीठ वाला फुदका भी सक्रिय रहता है। ऐसे में इसके नियंत्रण के लिए एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत एसपी, 100 ग्राम कार्बोफ्यूरान का 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।

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कमत बरसात को देखते हुए सब्जी उत्पादक किसानों को भी सलाह दी गई है कि वह कम समय से अधिक उत्पादन लेने के लिए पालक, मूली, गाजर, शलजम, चुकन्दर, मेथी और धनिया की खेती करें।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल के मानसून का जो दीर्घावधि पुर्वानुमान जारी किया है उसके अनुसार इस साल देश में सामान्य मानूसन और अच्छी बारिश की उम्मीद थी लेकिन उत्तर प्रदेश में मौसम का पूर्वानुमान एक बार फिर गलत साबित हुआ है।देश में मानसून के चार महीनों में 89 सेंटीमीटर औसत बारिश होती है। 80 फीसदी बारिश मानसून के चार महीनों जून-सितंबर के दौरान होती है। देश की 65 फीसदी खेती-बाड़ी मानसूनी बारिश पर निर्भर है। बिजली उत्पादन, भूजल का पुनर्भरण, नदियों का पानी भी मानसून पर निर्भर है।

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