नेट हाउस खेती से किसान कमा सकते हैं तिगुना मनाफा  

नेट हाउस खेती से किसान कमा सकते हैं तिगुना मनाफा   प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। परंपरागत खेती को छोड़कर आज कई किसान नवीन कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती में मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। कृषि की इन आधुनिक तकनीकों में एक तकनीक नेट हाउस खेती भी है, जिससे किसान आज तिगुना मुनाफा कमा रहे हैं। नेट हाउस खेती को अपनाने वाले ऐसे ही एक किसान का नाम हैं मनोज भाटिया। आईये आपको बताते हैं कि पॉली हाउस खेती से इतर नेट हाउस खेती के जरिये कैसे मनोज भाटिया ने कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की।

कारपोरेट नौकरी छोड़ कर कृषि क्षेत्र में आए मनोज

पंजाब में एक कंपनी में बतौर ऑपरेशन मैनेजर के रूप में नौकरी करने वाले मनोज भाटिया ने लंबे समय बाद वापस खेती-किसानी से जुड़ने का फैसला तब किया, जब वह कंपनी में 8 लाख सलाना आय पर काम कर रहे थे। मनोज के हरियाणा के कुछ मित्रों ने उन्हें आधुनिक खेती के फायदे के बारे में बताया। तब मनोज ने वर्ष 2010 में नौकरी छोड़कर 1.5 लाख की लागत लगाकर ढाई एकड़ जमीन पर खेती करना शुरू किया। इस भूमि पर उन्होंने दो एकड़ में शिमला मिर्च और आधे एकड़ में तरबूज उगाया। मगर मौसम की मार के कारण उनकी दो एकड़ की शिमला मिर्च की फसल बर्बाद हो गई, जबकि आधे एकड़ में की गई तरबूज की खेती में उन्होंने 1.7 लाख कमाए। सिर्फ आधे एकड़ में ही की खेती से लागत पूरा होने पर मनोज को खेती करने के लिए और प्रेरणा मिली।

मौसम में बदलाव थी सबसे बड़ी बाधा


अपने नेट हाउस फार्म में मनोज भाटिया

दो एकड़ की फसल नष्ट होने पर मनोज ने मौसम में बदलाव की वजह को किसानों के लिए सबसे बड़ी बाधा माना। इसे देखते हुए उन्होंने सरंक्षित खेती तकनीक को खेती करने के लिए अपनाया। आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाकर आज मनोज भाटिया 32 एकड़ में सब्जियों की खेती कर रहे हैं। उसमें से तीन एकड़ में वह पॉली हाउस और नेट हाउस खेती का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस नेट हाउस खेती में मनोज मौसम और बाजार की मांग के अनुसार टमाटर, करेला, लौकी, ककड़ी और फूलगोभी समेत पांच से छह सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

पॉली हाउस खेती में भी आईं कई बाधाएं

मनोज बताते हैं कि सरंक्षित तकनीक खेती में मुनाफा कमाने के लिए यह जरूरी है कि मौसम के समय उत्पादन हो। ऐसे में बाजार में जहां उत्पादन की अच्छी कीमत मिलेगी, वहीं और किसानों के मुकाबले बाजार में प्रतियोगिता भी कम होगी। हरियाणा के करनाल में खेती करने वाले मनोज भाटिया इससे पहले पॉली हाउस में खेती करते आ रहे थे। इसके बावजूद गर्मियों में तापमान अधिक होने के कारण पॉली हाउस में रोपाई 15 अगस्त से पहले नहीं हो पाती थी, क्योंकि यह वही समय होता था जब तापमान गिरना शुरू होता था। अगस्त में रोपाई होने से सब्जियां फरवरी माह तक ही बाजार में पहुंच पाती थी, जबकि दिसंबर और जनवरी सर्दी का ज्यादा सही समय होता था। उत्तर भारत में ग्रीन हाउस खेती में शिमला मिर्च, बैंगन, मिर्च, चेरी टमाटर आदि फसलों की रोपाई अक्टूबर में ही किया जाता है।

तब पॉली हाउस की बजाए अपनाई नेट हाउस खेती

मौसम की इस समस्या से निपटने के लिए तब मनोज ने नेट हाउस खेती को अपनाया। एक तरफ पॉली हाउस खेती में जहां मनोज 15 अगस्त तक रोपाई कर पाते थे, वहीं नेट हाउस खेती में वह 15 जुलाई में रोपाई कर देते थे और नवंबर-दिसंबर में ही उनकी सब्जियों का उत्पादन बाजार में पहुंच जाता था। इस तकनीक से नवंबर-दिसंबर में जब सहालगों का समय होता था तो सब्जियों की डिमांड बढ़ने पर उन्हें अपने उत्पादन की अच्छी कीमत मिलने पर तिगुना मुनाफा होता।

नेट हाउस खेती में यह तरीका अपनाया

डबल लेयर नेट हाउस खेती में मनोज ने पलवार (mulching) और ड्रिप सिंचाई प्रणाली (drip irrigation) का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया। इससे फार्म में नमी को नियंत्रित रखने वेंटीलेशन, बेहतर जड़ प्रणाली और श्रम बचाने में काफी हद तक मदद मिली। इसके साथ ही इसमें एक बेहतर जल निकासी की व्यवस्था भी की ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी आराम से निकल जाए और भारी बारिश का असर खेती पर न पड़े। वहीं, अच्छी तरह से पलवार किये जाने से काफी लाभ मिला। इस तकनीक का इस्तेमाल करने की वजह से ही मनोज जुलाई में रोपाई करने में सक्षम हो सके।

वे किसान भाई जो खेती-किसानी से आशा खो चुके हैं, वे खेती-किसानी से जुड़े और बेहतर करें। खेती में किसी भी नौकरी से ज्यादा कमाई है और वे इसका फायदा उठा सकते हैं। किसान अपनी फसलों को समझें और मौसम के अनुसार उसे तैयार करने के लिए कृषि की आधुनिक तकनीकों को अगर अपनाते हैं तो निश्चित रूप से उन्हें खेती में अच्छा मुनाफा मिलेगा।
मनोज भाटिया, किसान

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