जीएम सरसों के खिलाफ विरोध के सुर तेज : अनिल दवे ने प्रदर्शनकारियों से कहा, शिकायतों का ‘उचित मंच’ पर होगा समाधान

जीएम सरसों के खिलाफ विरोध के सुर तेज : अनिल दवे ने  प्रदर्शनकारियों से कहा, शिकायतों का ‘उचित मंच’ पर होगा समाधानगाँव कनेक्शन

नई दिल्ली (भाषा)। केंद्रीय मंत्री अनिल दवे ने आनुवांशिक रूप से परिष्कृत सरसों के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए फसल नियामक द्वारा दी गई मंजूरी का विरोध कर रहे छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से आज मुलाकात की। पर्यावरण मंत्री ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी शिकायतों का समाधान ‘‘उचित मंच'' पर होगा।

आनुवांशिक रूप से परिष्कृत सरसों के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए फसल नियामक द्वारा दी गई मंजूरी के खिलाफ पर्यावरण मंत्रालय के बाहर छात्रों, किसान संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। मंत्रालय की आनुवांशिक परिष्कृत फसलों का आकलन करने वाली इकाई आनुवांशिक अभियंत्रण आकलन समिति (जीईएसी) ने 11 मई को जीएम सरसों के व्यावसायिक इस्तेमाल की सिफारिश की थी।

एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी की अध्यक्षता में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन पर संसद की स्थायी समिति द्वारा मंजूरी की समीक्षा करने की संभावना है।

पर्यावरण मंत्रालय को जीएम सरसों पर खाद्य एवं पर्यावरण सुरक्षा संबंधी आकलन (एएफईएस) रिपोर्ट पर किसानों एवं शोधकर्ताओं सहित विभिन्न पक्षों से 700 टिप्पणियां प्राप्त हुई है, जिसे उसने मंत्रालय की वेबसाइट पर लगाया है, सात साल से भारत में रह रहीं और एक शहरी कृषि कंपनी से जुड़ी एक जर्मन महिला का कहना है, ‘‘जीएम फसल से किसानों पर असर पड़ेगा क्योंकि बीजों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों पर उनका भरोसा खत्म हो जाएगा, इससे बीजों के फिर से उत्पादन की संभावना नहीं रहेगी।''

प्रदर्शन कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जीईएसी के कामकाज को ‘‘अवैज्ञानिक'' और ‘‘अनियमित'' बताया।

सरसों सत्याग्रह की कविता कुरुगंटी ने कहा, ‘‘हम जीईएसी को भंग करने के लिए कह रहे हैं क्योंकि संगठन की कोई साख नहीं है और इसका कामकाज हमेशा गोपनीय होता है।''

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किसानों के संगठनों, जैविक खेती से जुड़े लोगों और छात्रों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और तुरंत प्रभाव से जीएम सरसों के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति वापस नहीं लिये जाने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है।

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