टमाटर की नई किस्म, एक पौधे से 19 किलो पैदावार का दावा

टमाटर की नई किस्म, एक पौधे से 19 किलो पैदावार  का दावाअर्का रक्षक (एफ) टमाटर

लखनऊ। अगर आपसे कोई पूछे कि टमाटर के एक पौधे से अधिकतम कितने किलो टमाटर का उत्पादन हो सकता है, तो आपका जवाब शायद यही होगा कि ज्यादा से ज्यादा 8 से 10 किलो, लेकिन अगर मैं कहूं कि टमाटर के एक पौधे से 19 किलो तक टमाटर का उत्पान किया जा सकता है तो शायद आपको भरोसा नहीं होगा, लेकिन ये सच है।

भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR) ने टमाटर की एक ऐसी किस्म तैयार की है, जिसके एक पौधे से 19 किलो टमाटर का उत्पादन हो रहा है। टमाटर की इस नई उन्नतशील किस्म का नाम अर्का रक्षक (एफ) है। भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने परिशोधन खेती के तहत उन्नतशील किस्म के इस पौधे से इतना उपज हासिल किया। भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान अर्कावथी नदी के किनारे स्थित है। यही वजह है कि उत्पादन के रिकॉर्ड बनाने वाली टमाटर की इस नई किस्म को अर्का रक्षक (एफ) के नाम से नवाजा गया है।

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टमाटर की इस किस्म के बारे में संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक और सब्जी फसल डिवीजन के प्रमुख एटी सदाशिव ने IIHR के यूट्यूब चैनल पर शेयर किये गये एक वीडियों में अर्का रक्षक (एफ) टमाटर के बारे में बताते हैं, ''पूरे कर्नाटक वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक टमाटर की ये प्रजाति राज्य में सबसे ज्यादा उपज देने वाली साबित हुई है।'' आप को बता दे टमाटर आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा उगाया जाता है, जिसमें से सबसे ज्यादा टमाटर कर्नाटक में उगाया जाता है।

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सदाशिव के मुताबिक टमाटर की संकर प्रजाति की अन्य पौधों में सबसे ज्यादा उपज 15 किलो तक रिकार्ड की गई है। उन्होंने कहा कि जहां कर्नाटक में टमाटर का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 35 टन है, वहीं अर्का रक्षक प्रजाति की टमाटर का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 190 टन तक हुआ है।

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इसके फल 75 से 80 ग्राम का होता है। इसकी खेती खरीफ और रबी के मौसम में की जा सकती है। इसकी फसल 140-150 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी प्रति एकड़ 40-50 टन पैदावार होती है।

रोग प्रतिरोधी भी है टमाटर की ये किस्म

डॉ. सदाशिव के मुताबिक ये महज उच्च उपज देने वाली प्रजाति ही नहीं है बल्कि टमाटर के पौधों में लगने वाले तीन प्रकार के रोग, पत्तियों में लगने वाले कर्ल वायरस, विल्ट जिवाणु और फसल के शुरूआती दिनों में लगने वाले विल्ट जिवाणु से सफलतपूर्वक लड़ने की भी इनमें प्रतिरोधक क्षमता मौजुद हैं।

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सदाशिव का मानना है कि इससे कवक और कीटनाशकों पर होने वाले खर्च की बचत से टमाटर की खेती की लागत में दस फीसदी तक की कमी आती है। अन्य सामान्य प्रजातियों के टमाटरों की उपज के बाद छह दिनों तक रखा जा सकता है, संकर प्रजाति के टमाटर दस दिनों तक जबकि अर्क प्रजाति के टमाटर पंद्रह दिनों तक आसानी से किसी अन्य प्रयास के रखे जा सकते हैं।

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