आप शहर में भी कर सकते हैं खेती, अपनी छतों को उपजाऊ बनाइए, जानिए कैसे ?

लखनऊ। कंक्रीटों के जंगल बढ़ते जा रहे हैं। खेतीहर जमीन कम होती जा रही है। ऐसे में खेती को बचाए रखना बड़ी चुनौती है। नई तकनीकी और विधियों से इसे बचाया जा सकता है। इजरायल कुछ ऐसा ही कर रहा है।

इजरायल अपनी आधुनिक खेती के लिए जाना जाता है। ये छोटा सा देश दुनियाभर के लिए उदाहरण बनता जा रहा है। यरुशलम और मृत सागर के बीच रेगिस्तान स्थित मिशोर एड्युमिम इंडस्ट्रियल पार्क की छत पर एक एकड़ में जड़ी-बूटियां और सलाद के पत्तों की खेती की जा रही है। यहां 20 लोगों के लिए रोजगार भी दिया गया है। इसमें पूरे इजरायल का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग शामिल हैं।

ये भी पढ़ें- राजस्थान के किसान खेमाराम ने अपने गांव को बना दिया मिनी इजरायल , सालाना 1 करोड़ का टर्नओवर

इजरायल में जन्मे व आप्रवासी बेंटसन काबाकोव का कहना है कि हम सभी यहां एक साथ काम करते हैं और एक-दूसरे के योगदान को महत्व देते हैं। बेंटसन ने छह साल पहले एलियनू सस्टैनबल एयरोपोनिक ग्रीनहाउस की स्थापना की थी, जो कि एक आदर्श के रूप में मौजूद है।

वीडियो यहां देखें

उन्होंने बताया कि राजनीतिक चुनौतियां कितनी कठिन हैं, इससे हम अनभिज्ञ नहीं हैं। इसके बावजूद आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व की हमेशा गुंजाइश होती है। एलियनू में यह हमारी गाइडलाइन है। यहां पैकिंग और लेबलिंग कमरे में हिजाब में मौजूद महिलाएं इथियोपिया की यहूदी महिलाओं के साथ आसानी से बातचीत कर लेती हैं। बीनने वाले से लेकर तकनीशियन तक, हर कोई एक आरामदायक और वातानुकूलित वातावरण में काम करता है और हर दिन एक निर्धारित समय पर घर चला जाता है ।

यह भी पढ़ें : यहां रेत में होता है मछली पालन और गर्मियों में आलू की खेती, किसान कमाते हैं बंपर मुनाफा

अपने सभी सामाजिक, व्यापारिक और पर्यावरण के पहलुओं को देखते हुए हम कह सकते हैं कि यह वास्तव में भविष्य में कृषि का एक बेहतर विकल्प है। एलियनू गैरअनुभवी महिलाओं और युवाओं को बेहतर कामकाजी माहौल उपलब्ध कराता है।

इजरायल एग्री के अनुसार हिब्रू में एलियनू के दो मतलब है, "हमसे ऊपर" और "हमारे पत्ते"। इसमें छत पर खेती करने और उसके उद्देश्य की एक साझा अवधारणाओं का संदेश छिपा हुआ है। जिस तरह से दुनिया की जनसंख्या शहरों में शिफ्ट हो रही हैं, उसमें छत पर खेती और शहरी कृषि का व्यापक महत्व है। इस पद्धति की शुरुआत पूर्व सोवियत संघ के काबाकोव और उनके साथी इंजीनियरों ने की थी।

यह भी पढ़ें : दीवारों पर होती है गेहूं, धान, मक्का और सब्जियों की खेती, जानिए कैसे ?

छत पर खेती की ये विधि एयरोपॉनिक्स सिस्टम पर आधारित है। यहां पौधे मिट्टी या पानी के बजाय नम हवा में बढ़ते हैं। एलियनू में कई पेटेंट प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जाता है। यह अप्रत्याशित मौसम में पारंपरिक खेती की समस्याओं को दूर करने का एक प्रयास है।

इन सबका परिणाम है कि इस एयरोपॉनिक ग्रीनहाउस में पारंपरिक खेती की तुलना में प्रति वर्ग मीटर 50 गुना अधिक उत्पाद होता है, जबकि पानी की खपत 20 गुना कम होती है। काबाकोव का दावा है कि अन्य एयरोपॉनिक ग्रीनहाउस से तुलना करें तो एलियनू के उत्पाद तीन गुना अधिक बेहतर हैं। यहां 25 विभिन्न साग-सब्जियां और जड़ी बूटियों जैसे कि तुलसी, सलाद के पत्ते, गोभी, अजमोद, टकसाल, अजवायन आदि की खेती होती है जो कि कीट मुक्त और कड़े अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा कर रहे हैं ।

यह भी पढ़ें : दुनिया के इन देशों में होती है पानी की खेती, कोहरे से करते हैं सिंचाई

यह भी पढ़ें : 40 साल से रेगिस्तान को कर रहे हरा-भरा, रेत के टीलों में लगाए 50 हजार से ज्यादा पौधे

Share it
Top