अब यूपी के छः जिलों में ई-नाम सुविधा की शुरुआत, ग्रेड के हिसाब से मिलेंगे किसानों को फसल के दाम 

अब यूपी के छः जिलों में ई-नाम सुविधा की शुरुआत, ग्रेड के हिसाब से मिलेंगे किसानों को फसल के दाम नवीन गल्ला मंडी, सीतापुर रोड लखनऊ में ई-नाम सुविधा शुरू हो चुकी है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। मंडी में किसानों की उपज पर उन्हें पूरा दाम दिलावाने और आढ़तियों की मनमानी खत्म करने के लिए नवीन गल्ला मंडी, सीतापुर रोड लखनऊ में ई-नाम सुविधा शुरू हो चुकी है। इस सुविधा के तहत किसानों द्वारा लाए गए उत्पादों को पहले ई-नाम लैब में ग्रेडिंग प्रक्रिया से गुज़ारा जाता है, फिर उसे बोली लगवाकर तुरंत तय रेट पर बेच दिया जाता है।

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ई-नाम सुविधा के बारे नवीन गल्ला मंडी में स्थापित की गई ई-नाम लैब में क्वालिटी इंस्पेक्टर योगानंद बताते हैं, ‘’मंडी में ई-नाम सुविधा में किसानों द्वारा लाए गए उत्पादों की खरीद पिछले वर्ष अक्टूबर से हो रही है।अभी इस सुविधा में 69 तरह के उप्पादों की ग्रेडिंग की सुविधा दी गई है। इसमें सब्जी, फल और अनाज की गुणवत्ता नापने और उन्हें ग्रेड किया जा सकता है।’’

अप्रैल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर की मंडियों में ई-नाम सुविधा की शुरुआत की, जिसके बाद देशभर के राज्यों में स्थापित बड़ी मंडियों में ई-नाम लैब बनवाने का फैसला किया गया। यह सुविधा आठ राज्यों में लागू हो चुकी है, सरकार ने मार्च 2018 तक इस सुविधा को देश की 585 मंडियों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

ईनाम के तहत उत्तर प्रदेश के छह जिलों (सहारनपुर, लखीमपुर, सुलतानपुर, बहराइच, ललितपुर और मथुरा) की प्रमुख मंडियों को जोड़ा गया है। मंडियों में स्थापित की जा रही प्रत्येक ई-नाम लैब पर केंद्र सरकार 30 लाख रुपए खर्च कर रही है।
डॉ. दिनेश चंद्रा, सह निदेशक, कृषि विपणन एवं विदेश प्यापार, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में मौजूदा समय में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर छह जिलों में ई-नाम लैब सुविधा दी जा रही है। इसके तहत अभी प्रदेश की 60 मंडियों को जोड़ा जाना है, जिसमें लखनऊ जिले की नवीन गल्ला मंडी, सीतापुर रोड भी शामिल है। ई-नाम सुविधा के अंतर्गत नवीन गल्ला मंडी, सीतापुर रोड लखनऊ में 150 से अधिक किसानों को लाभ मिल चुका है।

ई-नाम के तहत कैसे बेची जाती है किसानों की आवक

क्वालिटी इंस्पेक्टर योगानंद बताते हैं ‘’ई-नाम लैब में किसानों की आवक को जांच कर उसका लॉट नंबर जारी कर दिया जाता है। यह लॉट नंबर मंडी में लगी डिजीटल स्क्रीन पर डिस्पले किया जाता है। इससे मंडी में मौजूद व्यापारी और खरीददार किसानों का माल खरीदते हैं। किसानों की आवक का मूल्य उसके ग्रेड (ए, बी या सी ग्रेडिंग) के आधार पर तय होता है, यानी की जितना अच्छा रेट उतनी अच्छी बोली।’’

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