एक बार लगाने पर कई साल तक हरा चारा देगी ये घास, अपने खेत में लगाने के लिए यहां करें संपर्क

Diti BajpaiDiti Bajpai   23 Jun 2017 12:15 PM GMT

एक बार लगाने  पर कई साल तक हरा चारा देगी ये घास, अपने खेत में लगाने के लिए यहां करें संपर्कजिजवा घास 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। आमतौर पर पशुपालक चारा खरीदने पर काफी पैसा खर्च कर देते है या फिर मेहनत कर हरा चारा उगाते है, लेकिन भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने पशुओं को पूरे वर्ष पौष्टिक एवं हरा चारा मिल सके इसके लिए बहुवर्षीय जिजुवा चारे की घास उगाई है जिसको गाय, भैंस, बकरी सभी बड़े पशु चाव से खाते है। डेयरी वाले किसानों के लिए ये काफी फायदेमंद हो सकती है।

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पीलीभीत जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर बिलसंडा ब्लॉक के भदेहीखजा गाँव में रहने वाले श्वेतांश सिंह (75 वर्ष) ने लगभग चौथाई बीघा में जिजुवा घास को बोया हुआ है। चारे की बजाय वह अपनी 21 गाय (साहीवाल और गिर) को जिजुवा घास खिलाते है। श्वेतांश बताते हैं, "चारे की तरह इसको मशीन में काटना नहीं पड़ता है और केमिकल फर्टिलाइजर की भी जरुरत नहीं पड़ती है। एक साल हो गया इसको बोए अभी तक काटकर पशुओं को खिला रहे है।"

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गुजरात की जिज्वा घास को उत्तर भारत की जलवायु में आसानी से उगाया जा सकता है। इस घास में अन्य घासों की अपेक्षा ज्यादा प्रोटीन होता है। इस घास को गाय, भैंस, भेड़, बकरी सभी पशु बड़े चाव से खाते है। द्वारिका (राजकोट) में उगने वाली जिजुवा घास पर बंशी गौशाला(अहमदाबाद) के संचालक गोपाल भाई सुतालिया ने एक साल तक परीक्षण किया। उन्होंने 10-10 बीघे खेत में जिजुवा सहित करीब आधा दर्जन किस्म की घास उगाई और उनको खिलाने के लिए दुधारू पशुओं को खेतों में खुला छोड़ दिया। पाया गया कि पशुओं ने जिजुवा घास को अधिक पसंद किया।

जिजुवा घास के साथ आईवीआरअाई के वैज्ञानिक

"इस घास को लगाने से जो किसान बार-बार चारे की फसल लगाता है उसका जो खर्चा होता है वो खत्म हो जाता है। इस घास को अगर किसान एक बार बोता है तो पांच साल तक चारा मिल सकता है। मीठी होने के कारण पशु इसको ज्यादा खाते है। आईवीआरआई ने फार्मर फर्स्ट प्रोगाम के अंतर्गत बरेली के अतरछेड़ी, निसोई और इस्माइलपुर समेत कई गाँव के किसानों को इस घास को दिया है। इससे पशुओं के दूध की गुणवत्ता भी अच्छी होती है।" ऐसा बताते हैं, बरेली स्थित आईवीआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रणवीर सिंह।

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डॉ सिंह आगे बताते हैं, "हमारा यही उद्देश्य है कि किसान के पास ऐसी चारे की फसल होनी चाहिए जो कम से कम खर्च में पूरे साल चारा दें, जो किसान इस घास को बोना चाहता हैं, वो जुलाई में इसकी रुट स्लिप बो सकता है, इसको साल भर पानी के निकास वाली जमीन में बोया जा सकता है। जाड़ों के दिनों में(दिसंबर और जनवरी) इसकी बढ़वार कम होती है वरना बाकी दिनों में इसकी अच्छी फसल होती है। इस घास को किसान खेतों की मेड़ों पर और उचित पानी के निकास वाली उर्वर भूमि में लगा सकते है।

आईवीआरआई में जिज्वा घास के लिए संपर्क कर सकते है---

डॉ. रणवीर सिंह

0581-2303382

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