जैविक खेती कर रहे किसानों के लिए अच्छी खबर

जैविक खेती कर रहे किसानों के लिए अच्छी खबरजैविक खाद्य पदार्थों की बढ़ी मांग।

पिछले कुछ वर्षों में जैविक शब्द खूब सुना और लिखा गया है। देश में जैविक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है और जैविक उत्पाद का मार्केट करोड़ों में पहुंच गया है। बाजार को समझने वाले लोगों का अनुमान है कि आने वाले 2-3 वर्षों में जैविक खाद्य बाजार में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो जाएगी।

किसानों की आमदनी दोगुनी करने की कवायद में जुटी सरकार जैविक खेती को लगातार बढ़ावा दे रही है। सिक्किम पूर्णतया जैविक खेती का राज्य है, तो आंध्र प्रदेश में कार्ययोजना बनाई जा रही है। वहीं यूपी जैसे राज्य भी जैविक खेती को कलस्टर बनाकर आगे बढ़ा रहे हैं। मोदी सरकार गोवर्धन जैसी योजना चला रही है, क्योंकि जैविक में रासायनिक खेती की अपेक्षा लागत कम है। इसके साथ ही सेहत को देखते हुए भी लोग भी ज्यादा कीमत देकर जैविक उत्पाद खरीद रहे हैं, लोगों की सोच में आया ये बदलाव जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए ग्लूकोज की तरह काम कर रहा है।

“साल 2016 में 3,350 करोड़ रुपए के कारोबार के साथ जैविक खाद्य पदार्थों के उत्पादन में भारत एक उभरता हुआ बाजार बन रहा है, जिसके साल 2020 तक तीन गुना होने की उम्मीद है।“ यह कहना है कि भारत में सबसे बड़ी जैविक खाद्य उत्पादों की कंपनी ‘24 मंत्रा ऑर्गेनिक’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एन. बालासुब्रमण्यम का।

एक साक्षात्कार में एन. बालासुब्रमण्यम बताते हैं, “जैविक खाद्य उत्पादों को लोग अब वरीयता दे रहे हैं और किसानों के साथ सीधे काम कर रही कंपनियां देश-दुनिया में जैविक खाद्य उत्पादों के बाजार को बढ़ावा दे रही हैं।“

एक किसान को कैसे मिलता है लाभ

एक किसान जैविक खेती अपनाने के बाद कैसे लाभांवित हो सकता है, इस बारे में बालासुब्रमण्यम बताते हैं, “हमारा अपना व्यापार मॉडल देश के छोटे और सीमांत किसानों से सीधे तौर पर जुड़ा है और उनको उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ लोगों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिले और पर्यावरण में भी सुधार हो, इस पर हमारा मॉडल आधारित है।“

अपनी कंपनी के बारे में वह बताते हैं, “हम भारत के 15 राज्यों में 45,000 से अधिक छोटे और सीमांत किसानों के साथ सीधे काम करते हैं और 90 से अधिक जैविक खाद्य उत्पादों की व्यवस्था करते हैं।" आगे बताया, "हमारे पास 200 ऐसे सहयोगी भी हैं, जो इन किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल के बिना जैविक खेती करने में मदद करने के साथ प्रशिक्षित करते हैं।"

थोक मंडी की दरों से 20 प्रतिशत तक ज्यादा

देश-दुनिया में जैविक उत्पादों के बाजार के बारे में वह बताते हैं, "अमेरिका, यूरोपीय और भारतीय मापदंडों को पूरा करने के लिए मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा प्रमाणित हमें जमीन मिलती है। इसके बाद किसानों की उपज को देश भर में 25 इकाइयों में संशोधित और वर्गीकृत किया जाता है।“ आगे बताया, “भारत के 145 शहरों समेत 21 देशों के 10,000 से ज्यादा रिटेल स्टोर में उपभोक्ताओं को ये जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं। इन सभी में सबसे प्रमुख व्यक्ति एक किसान है और उस किसान को थोक मंडी की दरों की तुलना में अपनी उपज का 10 से 20 प्रतिशत अधिक मूल्य मिलता है।“

धीरे-धीरे आ रहा है बदलाव

लोगों में जैविक खाद्य उत्पादों की वरीयता में क्या धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है, इस सवाल के जवाब में वह आगे कहते हैं, “लोगों की वरीयता अब तेजी से जैविक खाद्य उत्पादों की ओर बढ़ रही है क्योंकि पिछले कुछ सालों में इसमें काफी प्रगति भी देखी गई है। इसका सबसे बड़े दो कारण सामने आए हैं, पहला, लोगों की बढ़ती आय और दूसरा, स्वास्थ्य के प्रति लोगों में बढ़ती जागरुकता। ऐसे में लोग जैविक उत्पादों का चयन कर रहे हैं, खासकर बच्चों के लिए और 40 के बाद के उम्र वर्ग में, जब लापरवाह जीवन शैली की वजह से लोगों में बीमारियों का डर सताने लगता है।“

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इस चुनौती को कम करते हैं

जैविक खेती के प्रति किसानों की बढ़ती जागरुकता के बारे में वह कहते हैं, "हमारी टीम इस चुनौती को काफी कम कर देती है। ऐसी टीम जो जैविक खेती करने वाले किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षित करती रहती है। कई किसानों को पता है कि बहुत अधिक रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी की क्षमता कमजोर हुई है और अब समान उत्पादन को बनाए रखने के लिए वे मानते हैं कि खेती की इन प्रथाओं को बदलना होगा, नहीं तो आने वाले कुछ सालों में उन्हें काफी बड़े संकटों का सामना करना पड़ सकता है।“

वह बताते हैं, “हमारी टीम के लोग ऐसे किसानों को 3 से 4 साल तक जैविक खेती करने में मदद करते हैं और उन्हें प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं। जहां तक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया की बात है, वह महंगी है, मगर हम लागत वहन करते हैं।“

क्या आम आदमी के लिए सस्ते होंगे जैविक उत्पाद

जैविक खाद्य उत्पादों का बाजार बढ़ने के साथ क्या आने वाले समय में आम आदमी के लिए जैविक उत्पाद सस्ते होंगे, इस सवाल पर बालासुब्रमण्यम बताते हैं, “जैविक उत्पादों की एक खाद्य श्रृंखला है। इसमें तीन प्रमुख कारण है जैसे किसानों को अच्छी कीमत देना, ईमानदारी की लागत जैसे कि किस्मों का मिश्रण न हो, उच्च गुणवत्त वाली प्रसंस्करण सुविधाओं को बनाए रखना और जैविक उत्पादों के भंडारण के लिए कर्मचारियों का न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करने के साथ खुदरा विक्रेताओं को जैविक उत्पादों पर 10 प्रतिशत का लाभ का भुगतान करना।“

वह आगे कहते हैं, “ऐसे में जैविक खाद्य उत्पादों में सुरक्षा के कई पैमाने हैं और भारत में जैविक खाद्य उत्पाद अगले 4 से 5 सालों में पारंपरिक खाद्य पदार्थों की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत अधिक कीमत पर बेचे जाने की उम्मीद है। यह संख्या अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में 30 प्रतिशत की तरह है। कीमत में अंतर के बावजूद, अगले कुछ वर्षों में जैविक उत्पादों के बाजार में 20 से 25 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है।"

इसमें हमारी करेंगे मदद

भारत में सबसे बड़ी जैविक खाद्य उत्पादों की कंपनी ‘24 मंत्रा ऑर्गेनिक’ के सीईओ एन. बालासुब्रमण्यम।

वह आगे कहते हैं, "स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरुकता और बढ़ती आय के श्रोत इसमें हमारी मदद करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2020 तक ऑर्गेनिक खेती के तहत एक लाख किसानों के माध्यम से हम 10 लाख परिवारों तक अपनी पहुंच बना सकें और 5 लाख एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में जैविक उत्पादन करें।"

जैविक उत्पादों में प्रमुख चुनौतियां क्या हैं, के सवाल पर वह कहते हैं, “सबसे बड़ी चुनौती है कि किसानों को बेहतर आजीविका कमाने में मदद करने के साथ लोगों को सुरक्षित और गुणवत्ता वाले भोजन का विकल्प प्रदान करने में हमारी सोच के प्रति सच रहना है। हालांकि, बैंकों और नियामकों से बहुत कम समर्थन नहीं है।“

जैविक खेती से किसानों के मिलने वाले लाभ के बारे में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की लखनऊ फॉर्मर मार्केट की आयोजक ज्योत्सना कौर हबीबुल्ला ने गांव कनेक्शन को बताया, “लोगों की सेहत के प्रति जागरुकता बढ़ी है, वो ज्यादा पैसे खर्च कर भी अच्छे प्रोडक्ट खरीदते हैं, इस तरह हम किसानों को उनके आर्गेनिक और प्राकृतिक चीजों का अच्छा मूल्य दिला पा रहे हैं और शहर के लोगों को भी बढ़िया चीजें मिल गईं।”

सौजन्य: livemint

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Tags:    Organic farming 
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