भारतीय मिलेट्स को जानने के लिए बेंगलुरू में जुटेंगे दुनियाभर के लोग 

भारतीय मिलेट्स को जानने के लिए बेंगलुरू में जुटेंगे दुनियाभर के लोग फोटो साभार: इंटरनेट

लखनऊ। देश-दुनिया में कदन्न अनाजों खासकर ज्वायर, बाजरा और रागी की जैविक उत्पाद की भी तेजी से मांग बढ़ रही है। ऐसे में कदन्न उगाने वाले किसानों और इसके उपभोक्तओं को इसका सीधा फायदा मिल सके, इसके लिए बेंगलुरू में 19 से लेकर 21 जनवरी तक आर्गेनिक मिलेट्स 2018 इंटरनेशनल ट्रेड फेयर का आयोजन होने जा रहा है।

नेशनल फेयर को भी मिली थी सफलता

कर्नाटक सरकार के कृषि मंत्रालय की तरफ से आयोजित हो रहे इस ट्रेड फेयर के बारे में जानकारी देते हुए कर्नाटक के कृषि मंत्री कृष्णा गौड़ा ने बताया, ''इसी साल अप्रैल में बेंगलुरू में आयोजित आर्गेनिक मिलेट्स नेशनल ट्रेड फेयर की सफलता के बाद अंतराराष्ट्रीय स्तर पर मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए यह फेयर आयोजित किया जा रहा है।“

24 थीम पर देशी-विदेशी मिलेट्स के विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान

आर्गेनिक मिलेट्स 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का भी आयोजन होगा, जिसमें 24 थीम पर देशी-विदेशी मिलेट्स के विशेषज्ञ अपना व्याख्यान देंगे। इस ट्रेड फेयर में मिलेट्स के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए 400 स्टाल भी लगाए जाएंगे।

बड़ी संख्या में किसान भी लेंगे भाग

ट्रेड फेयर में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान भी भाग लेंगे। किसान मिलेट्स के खेती करके कैसे मुनाफा कमा सकते हैं, इसके लिए कार्यशाला का भी आयोजन होगा। विभिन्न प्रदेशों से आए किसानों को भाषा की समस्या न हो, इसके लिए उनकी स्थानीय भाषा में कार्यशाला होगी। किसानों और व्यापारियों के बीच एक चेन तैयार हो, इसके लिए यहां पर व्यापारियों और किसानों के बीच कई बैठकों को भी आयोजन होगा।

फेयर में फूड कोर्ट भी

आर्गेनिक मिलेट्स 2018 इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में आने वाले लोग मिलेट्स के विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का स्वाद ले सकें, इसके लिए यहां पर फूड कोर्ट भी बनाया जा रहा है। कृषि मंत्री कृष्णा गौड़ा ने बताया, “इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फार द सेमी-अरिड ट्रोपिक्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि मिलेट्स ही भविष्य का भोजन है। इसकी खासियत इसमें प्रचुर मात्रा में वह सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिसकी जरुरत शरीर को होती है। आर्गेनिक मिलेट्स 2018 इंटरनेशनल ट्रेड फेयर का इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फार द सेमी-अरिड ट्रोपिक्स भी सहयोगी है।“

भूख से सार्थक ढंग से निपटने में मिल सकती है सहायता

जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने और भूख से सार्थक ढंग से निपटने में सहायता मिल सकती है। कदन्न को लोकप्रिय बनाने से किसानों की भावी पीढ़ियां और उपभोक्ता लाभान्वि त होंगे। देश में मिलेट्स यानि कदन्न की खेती को बढ़ाव मिले और इसके लिए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय भी प्रयास कर रहा है। दुनिया में भारतीय मिलेट्स को पहचान मिले इसके लिए केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने संयुक्तस राष्ट्रइ को वर्ष 2018 को अंतर्राष्ट्रीय कदन्नि वर्ष के रूप में घोषित करने का प्रस्ता व भी भेजा है।

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