गन्ने की फसल पर मंडराने लगा पाइरिला का खतरा

गन्ने की फसल पर मंडराने लगा पाइरिला का खतरागन्ने की फसल में पाइरिला कीट सक्रिय।

लखनऊ। गन्ने की फसल पर हमला करने के लिए इन दिनों पाइरिला कीट सक्रिय हो गया है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के अनुसार पाइरिला कीट अप्रैल के अंतिम सप्ताह में गन्ने की फसल को अपने चपेट में लेता है। ऐसे में किसानों को इस कीट से फसल को बचाने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। गन्ना संस्थान के वैज्ञानिक आरएस दोहरे ने बताया '' इस मौसम में गन्ने की निचली पत्तियों के पृष्ठ भाग में सफेद अंडा समूह दिखाई देते हैं, जो पाइरिला है। यह गन्ने की पत्तियों के रसों का चूस लेते हैं, इससे पत्तियां सूख जाती हैं। ''

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उन्होंने बताया कि इसके कारण गन्ने की मोटाई व रस कम हो जाता है। पाइरिला से गन्ने को बचाने के लिए गन्ने के खेत में 5-5 फीट का और 4 इंच का गहरा गड्ढा बनाएं। उसके अंदर पॉलीथिन बिछा दें, ताकि 1 से 2 इंच पानी भरा रहे। पानी में मिट्टी का तेल या जला हुआ तेल आधा लीटर डालें। गड्डे के पास लाईट ट्रेप लगाए, जिसमें 200 वाट का बल्ब हो। रात में इस बल्ब को जला दें। जिससे पाईरिला एवं अन्य कीट गड्डे में गिरेंगे और खत्म हो जाएंगे।

नियमित निरीक्षण जरूरी

अप्रैल और मई महीना का महीना गन्ने की फसल के लिए काफी संवेदनशील होता है। इस समय खेतों में कई रोगों के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसलिए किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। साथ ही रोग से ग्रसित पौधे को खेत से निकालकर नष्ट कर देना चाहिए। ताकि यह रोग दूसरे पौधों तक न पहुंचे। पिछले साल उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के गन्ना खेतों में पाइरिला ने भारी नुकसान पहुंचाया था। गन्ना अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार बताते हैं कि यदि गन्ने की खेत में यह कीट दिखे तो तुरंत कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कीट के नियंत्रण में अगर थोड़ी सी भी लापरवाही हो गई तो इससे गन्ने की उपज पर प्रभाव पड़ेगा और चीनी की रिकवरी कम होगी।

अन्य रोगों का भी प्रकोप

कुशीनगर जिले के कसया तहसील के गांव शामपुर के पिपरा तिवारी के किसान भोलनाथ पांडेय ने बताया '' पूर्वांचल में गन्ना के खेतों में पाइरिला हर साल नुकसान पहुंचाता है। इस कीट को नष्ट करने के लिए हर साल कीटनाशक का प्रयोग होता है लेकिन फिर से यह कीट सक्रिय हो जाता है। '' वे बताते हैं कि अप्रैल महीने में पाइरिला के अलावा लाल सड़न, कड़ुवा, पर्णदाह और घासी प्ररोह जैसे रोग भी गन्ना में लगते हैं। वहीं विशेषज्ञ बताते हैं कि लाल सड़न रोग में गन्ने की नई निकलने वाली पत्तियां पीली पड़ने लगती है और उसके पृष्ठ भाग के मध्य सिरे पर काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। इस रोग से ग्रसित होने के बाद 10 से 15 दिन में गन्ना सड़ जाता है। कंडुवा रोग में गन्ने की सिरे पर काली चाबुक जैसी संरचना दिखाई देती है। पर्णदाह रोग से पत्तियों में सफेद धारियां दिखाई देती हैं और धीरे-धीरे पत्तियां सूखने लगती हैं। घासी प्ररोह बीमारी से गन्ने का पौधे की पत्तियां सफेद होकर सूखने लगती हैं।

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