आलू किसानों पर चौतरफा मार, खेत में खरीदार नहीं, कोल्ड स्टोरेज भी हुए फुल 

आलू किसानों पर चौतरफा मार, खेत में खरीदार नहीं, कोल्ड स्टोरेज भी हुए फुल कोल्ड स्टोरेज तो हैं, लेकिन उनमें आलू रखने की जगह नहीं है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। यूपी समेत देश के कई राज्यों में आलू उगाने वाले किसान खून के आंसू रो रहे हैं। बंपर पैदावार के बाद उनकी फसल को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। खेत तक कारोबारी नहीं पहुंच रहे हैं तो कोल्ड स्टोरोज भी लगभग फुल हो चुके हैं।

यूपी के कई जिलों में इन स्टोर के बाहर लंबी-लंबी लाइऩें लगी हैं। ज्यादातार कोल्ड स्टोरेज ने फुल होने का बोर्ड लगा दिया है। जिन किसानों के पास टोकन हैं वो कई दिनों से लाइऩ में लगे हुए हैं। आने वाले समय में बेहतर रेट की उम्मीद में किसान खून-पसीने से तैयार आलू लेकर स्टोर पहुंच रहे हैं लेकिन वहां जगह नहीं मिल रही है। कई स्टोर के बाहर लोग हफ्ते-हफ्ते भर से कतार में नजर आए हैं।

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स्टोर के बाहर लगी लाइन किसानों की समस्या बढ़ा रही है। इससे उन्हें ट्रैक्टर और ट्रक का कई गुना भाड़ा देना पड़ रहा है। “आलू की खेती सबसे ज्यादा प्रदेश के आगरा और उसके आसपास के क्षेत्रों में होती है। वहां कोल्ड स्टोरेज की संख्या भी अधिक है। इस साल उत्पादन अधिक होने की वजह से हम लोगों के पास आलू को स्टोरेज में रखने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है।” ये कहना है राजधानी स्थित डुगारिया गाँव के किसान सुशील कुमार (36 वर्ष) का।

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यूपी में जिस अनुपात में आलू का रकबा बढ़ा है, कोल्ड स्टोरेज की संख्या काफी कम है, जिसके चलते कई किसानों को स्टोर तक आने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। किसानों को उत्पाद भंडारित करने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिसमें उन्हें काफी खर्च उठाना पड़ता है। जितनी दूरी बढ़ेगी, उतना खर्च बढ़ेगा। गाड़ियों में आलू रखवाने से लेकर स्टोरेज पहुंचाने तक का खर्च किसानों को उठाना पड़ता है। दूर स्थित स्टोरेज जाकर आलू भंडारित करने से बेहतर किसान अपने उत्पाद को कम दाम में अपने क्षेत्र की मंडी में बेचना ही उचित समझ रहे हैं।

लखनऊ में मलिहाबाद के आलू किसान दुर्गा प्रसाद (35 वर्ष) ने बताया, “हरदोई रोड के बाजनगर पुल के पास कोल्ड स्टोरेज है जो गाँव से लगभग छह किमी दूर है। इसके अलावा बाकी जो स्टोरेज हैं जैसे माल, रहमाबाद, ठाकुरगंज, ये सब दूर पड़ते हैं। लगभग 20 से 22 किमी तक। इसलिए आसपास के ज्यादतर किसान यहीं आते हैं।” दुर्गा प्रसाद क्षेत्र से लगभग सात किमी पहले ही पड़ने वाले गाँव रसूलपुर के रहने वाले हैं। उनका कहना है, “सुबह से ही एक किमी लंबी लाइन लगी है। कई गाँव के किसान यहां अपना आलू रखवाने आए हैं। सुबह से आए हैं और तब तक नहीं जाएंगे जबतक इनका नंबर नहीं आ जाता है। रोज का हाल है कि आलू की लगभग 100 गाड़ियां तो जरूर यहां आती हैं। पास पड़ता है न, तभी हर कोई यहीं आता है।”

मलिहाबाद स्थित रहमानखेड़ा ब्लॉक के बुधड़िया गाँव में रहने वाले सौरभ पाल (35 वर्ष) बताते हैं, “कई जगह कोल्ड स्टोरेज हैं, लेकिन वहां काफी लंबी लाइन लगी है।”

यूपी में आलू स्टोर की संख्या।

ये हैं सरकारी स्टोरेज

इसके साथ ही दो राजकीय स्टोरेज लखनऊ और मेरठ में बने हुए हैं, जिनकी भंडारण क्षमता (मी.टन) 4000 और 2000 है।

हरदोई रोड के बाजनगर पुल के पास कोल्ड स्टोरेज है जो गाँव से लगभग छह किमी दूर है। इसके अलावा बाकी जो स्टोरेज हैं जैसे माल, रहमाबाद, ठाकुरगंज, ये सब दूर पड़ते हैं। लगभग 20 से 22 किमी तक। इसलिए आसपास के ज्यादतर किसान यहीं आते हैं।
दुर्गा प्रसाद, किसान

मालिक ही तय करता है निर्माण की जगह

उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, यूपी (आलू विभाग) के आलू निरीक्षक गया प्रसाद बताते हैं, “निजी तौर पर कोल्ड स्टोरेज तैयार करने वाले लोग अपनी ही जमीन पर उसे बनवाते हैं और वही यह तय करते हैं कि किस जगह स्टोरेज बनना है।” उन्होंने बताया कि इसके निर्माण कहां पर होना है, इसे किसी भी तरह से विभाग या सरकार नहीं निर्धारित करती है। ज्यादतर संचालक क्षेत्र की आबादी को ध्यान में रखकर ही स्टोरेज बनवाते हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान उसका उपयोग करें और उनका मुनाफा हो।

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