25 लाख परिवारों के जीविका पर संकट, चिकन की बिक्री पर रोक से मुर्गीपालक परेशान

25 लाख परिवारों के जीविका पर संकट, चिकन की बिक्री पर रोक से मुर्गीपालक परेशानचिकन की बिक्री पर रोक से मुर्गीपालक परेशान (फोटो: गाँव कनेक्शन)

लखनऊ। मांस बिक्री पर यूपी सरकार की स्पष्ट नीति न होने से मुर्गीपालन उद्योग लड़खड़ा गया है। पिछले एक महीने से मुर्गियों की बिक्री नहीं होने से प्रदेश के मुर्गीपालक परेशान है। उत्तर प्रदेश पोल्ट्री परिवार के अध्यक्ष असलम जैदी ने बताया, ‘मुर्गीपालन कृषि व्यवसाय का एक हिस्सा है। दूध, सब्जी और फल की तरह यह कच्चा प्रोडक्ट है, जिसको हार्वेस्टिंग से रोका नहीं जा सकता है। इसका फसल चक्र 35 से 40 दिन का होता है, अगर रुक गया तो अधिक घना व गर्मी होने से मरने लगता है। यह ओवर साइज होने पर बिकता भी नहीं है। ऐसे में अगर सरकार ने जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया तो मुर्गीपालक बर्बाद हो जाएंगे।’

उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा व्यवसाय है जो कि गाँवों के लोगों को रोजगार देता है। मुर्गीपालन से लगभग तीन लाख लोग सीधे जुड़े हैं, जिनसे लगभग 25 लाख परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। यह व्यवसाय उत्तर प्रदेश में लगभग सालाना 20 हजार करोड़ का है।

मुर्गीपालन से जुड़े एमएफ शेख ने बताया, ‘पुलिस प्रशासन ने पूरे प्रदेश में मुर्गा बिक्री को बंद करा दिया है। कच्चा प्रोडक्ट और गर्मी का मौसम होने की वजह से फार्मों में मुर्गियों के मरने का खतरा मंडराने लगा है। अगर सरकार जल्द ही कुछ रास्ता नहीं निकाली तो इससे मुर्गीपालकों का बहुत नुकसान होगा।’ उन्होंने बताया कि मुर्गीपालन शुरू करने के लिए किसानों ने बैंक से लोन लिया था अगर मुर्गियां बिकेंगी नहीं तो फिर लोन चुकाना मुश्किल हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने चिकन (मुर्गा) और अंडे बेचने पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन इसके बाद भी बूचड़खानों और मटन दुकानों की आड़ में चिकन बिक्री को भी पुलिस प्रशासन नहीं होने दे रहा है। जिससे मुर्गीपालक परेशान हैं।

प्रदेश में अण्डे और मांस की कमी

उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 18 अण्डे और 300 ग्राम कुक्कुट मांस की जरूरत पड़ती है, लेकिन उपलब्ध मात्र सात अण्डे और 100 ग्राम मांस ही है। ऐसे में प्रदेश में रोजाना 35 लाख अण्डे और दो लाख कुक्कुट ब्रायलर दूसरे प्रदेशों से मंगाना पड़ता है। ऐसे में प्रदेश में कुक्कुट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकर ने साल 2013 में उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति बनाई थी। इस नीति में लोगों ने जबर्दस्त उत्साह दिखाया और प्रदेश में कुक्कुट पालन को बढ़ावा मिला।

सीएम से की समस्या हल करने की मांग

प्रदेश में कॉमर्शियल लेयर फार्मिंग और ब्रायलर ईकाइयों की स्थापना के लिए प्रदेश सरकार ने 40 लाख रुपए का लोन मुर्गीपालकों को दिया, जिससे प्रदेश में मुर्गीपालन एक बड़ा उद्योग बना। गाँव-गाँव में पोल्ट्री फार्म खोले गए लेकिन चिकन की बिक्री नहीं होने से अब मुर्गीपालक परेशान हैं। उत्तर प्रदेश पोल्ट्री परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि वह मुर्गीपालकों की व्यवहारिक समस्या को हल करें। प्रदेश के हर शहर, क़स्बे और ग्रामीण बाजार में फल और सब्जी मंडी की तरह मुर्गीपालकों के उत्पाद (मुर्गे) के लिए भी मंडी की स्थापना करें। जहां पर चिकन बेचने वाले व्यापारी चिकन बेच सकें।

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