गन्ने और गेहूं की एक साथ खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे प्रमेन्द्र घोषी

गन्ने और गेहूं की एक साथ खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे प्रमेन्द्र घोषीप्रमेन्द्र ने इस बार अपने चार एकड़ खेत में गेहूं और गन्ने की सहफसली खेती की शुरुआत की है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। मध्यप्रदेश के एक किसान ने अपने चार एकड़ खेत में गन्ने और गेहूं की सहफसली खेती की शुरुआत की और उससे काफी अच्छे मुनाफे की उम्मीद जता रहे हैं। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बेलखेड़ी के किसान प्रमेन्द्र घोषी (52 वर्ष) अपने क्षेत्र के काफी प्रसिद्ध किसान हैं। वह फल और सब्जी की खेती करते हैं। प्रमेन्द्र ने इस बार अपने चार एकड़ खेत में गेहूं और गन्ने की सहफसली खेती की शुरुआत की है।

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प्रमेन्द्र घोषी बताते हैं, “मेरा पूरा चार एकड़ का खेत है, जिसे तीन भागों में बांट दिया है। इसमें तीन भागों में अलग-अलग तरह के गन्ना व गेहूं लगाया है। गन्ने की फसल में हमने सीओ वीएसआई 265, वीएसआई 3102 और वीएसआई 86032 मीरा का प्रयोग और गेहूं के लिए 322 का प्रयोग किया है।’’

“खेत में हर पांच फुट के अंतर पर नालियां निकाली हुई हैं। 10 फुट के अंतर पर गन्ना लगाया हुआ है। गन्ने से गन्ने की नाली की बीच दूरी 10 फुट की है। इसमें जो बीच में जगह है उसमें पांच लाइन में गेहूं लगाया है। गेहूं के पौधों के बीच में नौ इंच की दूरी होती है। गन्ने में एक एकड़ के लिए लगभग आठ कुंतल के बीज का प्रयोग किया है। गेहूं के लिए प्रति एकड़ के लिए लगभग 13 किलो प्रति एकड़ बीज का प्रयोग किया है।” उन्होंने आगे बताया।

साढ़े तीन महीने की दोनों फसल की तैयारी के बाद ये पता चला है कि 10 रनिंग फुट में गन्ने के 143 पौधे मिले हैं। लगभग एक एकड़ जगह में 65000 पौधे आ रहे हैं। अगर एक पेड़ दो से ढाई किलो का हुआ तो गन्ने की पैदावार लगभग 1500 कुंतल तक की हो जाएगी।
प्रमेन्द्र घोषी, किसान

“गेहूं तैयार है 60-60 मीटर के बेल्ट है। एक बेल्ट में 16 बोझ निकल रही हैं और एक बोझ का वजन 13 किलो आया है अगर 25 फीसदी भूसा है और 75 फीसदी दाना ये हमारे हिसाब से जोड़ है। इसके हिसाब से एक बेल्ट में लगभग एक कुंतल गेहूं निकलेगा और पूरे चार एकड़ में गेहूं की 90 बेल्ट है। इससे 90 कुंतल गेहूं की उम्मीद करते हैं। गेहूं पका भी काफी अच्छे से है। सवा एक एकड़ पूरे खेत में गेहूं है और बाकी में गन्ना है। सवा एकड़ में गेहूं 80 से 90 एकड़ पैदावार होगी।”

प्रमेन्द्र घोषी

प्रमेन्द्र ने आगे बताया, “गेहूं और गन्ना में एक जैसे पानी की जरूरत होती है। हमारी मुख्य फसल है इसके साथ अब मैं पत्तागोभी की फसल करूंगा। गन्ने में हर बार उसके साथ कोई न कोई फसल जरूर करनी चाहिए। गन्ना साल-डेढ़ साल की फसल है इतने दिनों तक खेत को गन्ने के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए।’’ मैं अपनी पूरी खेती ड्रिप पर आधारित करता हूं। पूरी बुवाई मैं गिन-गिन कर करता हूं कि किस लाइन में कितने बीज लगा रहा हूं। हर किसान को लाइन से बुवाई करनी चाहिए। खेती के पूरे समय में कौन सी समस्या सामने आई है उसपर जरूर ध्यान देना चाहिए।’’

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