प्री मानसून बारिश शुरू, कृषि वैज्ञानिकों ने धान की रोपाई के लिए बताया फायदेमंद 

प्री मानसून बारिश शुरू, कृषि वैज्ञानिकों ने  धान की रोपाई के लिए बताया फायदेमंद कृषि वैज्ञानिकों ने धान की नर्सरी और रोपाई के लिए सलाह दी है (फोटो: गांव कनेक्शन)

लखनऊ। झमाझम बारिश के साथ शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में प्री मानूसन ने दस्तक दी, जिससे किसानों के चेहरे खिल गए। वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने भी राहत की सांस ली। इस बरसात को देखते हुए मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह की बैठक में वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि किसान धान की नर्सरी और रोपाई का यह उचित समय है।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने बताया, ‘देश में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून 30 मई को केरल में आ चुका है। अभी बंगाल की खाड़ी में कम वायुदाब का क्षेत्र विकसित हुआ है जिसके कारण 20-21 जून तक बंगाल की खाड़ी से मानूसन उत्तर प्रदेश में पहुंच जाएगा।’

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान एवं उपग्रह से प्राप्त चित्रों के विश्लेषण के बाद लखनऊ मौसम विज्ञान केन्द्र के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया, ‘उत्तर प्रदेश में 16 जून से लेकर 20 जून तक बादल छाए रहेंगे और इस दौरान प्रदेश के अधिकतर जिलों में बरसात होगी।’

ये भी पढ़ें: जानिए कैसे करें पैडी ट्रांसप्लांटर से धान के पौध की रोपाई ?

देश में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून 30 मई को केरल में आ चुका है। अभी बंगाल की खाड़ी में कम वायुदाब का क्षेत्र विकसित हुआ है जिसके कारण 20-21 जून तक बंगाल की खाड़ी से मानूसन उत्तर प्रदेश में पहुंच जाएगा।
प्रो. राजेंद्र कुमार, महानिदेशक, यूपी कृषि अनुसंधान परिषद

इसको ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ की प्रमुख फसलों की बुवाई के लिए सलाह जारी की है जिसमें धान की खेती के लिए किसानों से कहा गया है कि धान की मध्यम अवधि वाली प्रजातियों नरेन्द्र धान-359, मालवीया धान-36, नरेन्द्र धान- 2064 और जल्दी पकने वाले कम अवधि की प्रजातियों नरेन्द्र धान-118, नरेन्द्र-80, मनहर, मालवीय धान-2 और मालवीय धान-917 की नर्सरी को जल्द से जल्द डाल दें। इसके साथ ही जिस धान की नर्सरी तैयार हो गई है उसकी रोपाई करना शुरू कर दें।

ये भी पढ़ें: पानी न आने से परेशान किसान, कैसे डाले धान की नर्सरी

नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट और एग्रीकल्चर मेट्रोलाजी के वैज्ञानिक ए.के.सिंह ने बताया, ‘प्री-मानूसन की बारिश खरीफ की बुवाई के तैयारियों में लगे किसानों के लिए सबसे राहत की बात है। इस बारिश से धान की नर्सरी डालने से लेकर रोपाई तक में मदद मिलती है और सिंचाई के लिए किसानों को अलग से पानी की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती है।’ धान की फसल के विशेषज्ञ और बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी रांची के कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीएन सिंह ने बताया, ‘धान की नर्सरी में जिंक की कमी के कारण इसी समय खैरा रोग लगने का भी खतरा रहता है। इस रोग में पत्तिया पीली पड़ जाती हैं, जिस पर बाद में कत्थई रंग के धब्बे बन जाते हैं।’ उन्होंने खैरा रोग के नियंत्रण के लिए बताया कि पांच किलोग्राम जिंक सल्फेट को 20 किलोग्राम यूरिया या बुझे हुए चूने को प्रति हेक्टेयर लगभग एक हजार लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

धान की नर्सरी में सफेदा रोग लगने की संभावना

इस मौसम में धान की नर्सरी में सफेदा रोग भी लग सकता है। इस रोग में नई पत्ती कागज के समान सफेद रंग की निकलती है। लौह तत्व की कमी के कारण यह रोग लगता है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा विभाग के कृषि अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया, ‘सफेदा रोग के नियंत्रण के लिए पांच किलोग्राम फेरस सल्फेट को 20 किलोग्राम यूरिया अथवा 2.50 किलोग्राम बुझे हुए चुने को प्रति हेक्टेयर एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।’

ये भी पढ़ें: कम खर्चीली हैं धान की ये क़िस्में

अच्छी बारिश होने से खरीफ की बंपर पैदावार होगी

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने खरीफ सीजन में पिछले साल के मुकाबले प्रदेश में इस साल 2017-18 के खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल और खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस बार 91.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले साल इस सीजन में 91.44 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुवाई हुई थी पिछले साल खरीफ में 185.11 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार 194.62 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खरीफ की मुख्य फसल धान की प्रदेश में 59.66 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। प्री-मानूसन की अच्छी बारिश और मानसून की अच्छी आहट से इस बार खरीफ में बंपर पैदावार भी होने की संभावना है।

Share it
Top