किसान आयोग बनाने का खाका तैयार, प्रस्ताव पहुंचा सरकार के पास  

किसान आयोग बनाने का खाका तैयार, प्रस्ताव पहुंचा सरकार के पास  राज्य किसान आयोग का खाका तैयार। 

लखनऊ। खेती में बढ़ती लागत और खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव के कारण खेती अलाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। हर साल अनेकों किसान खेती को छोड़ रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि किसानों के लिए नीति बनाने वाली सरकार के पास किसानों की बात सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही। ऐसे में सरकार के पास किसानों की आवाज पहुंचाने के लिए यूपी में किसान आयोग के गठन की कवायद शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने देश के जानेमाने कृषि विशेषज्ञों और किसानों से बात करके प्रदेश में राज्य किसान आयोग और एग्रीकल्चर कैबिनेट के गठन का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को दिया है।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रो. राजेन्द्र कुमार बताते हैं, '' प्रदेश में 2.29 करोड़ किसानों की आवश्यकताओं और उनके मुद्दों को सरकार तक सही तरीके से पहुंचाने और उसके क्रियान्यवन के लिए किसान आयोग की बहुत ज्यादा जरूरत है।'' उन्होंने बताया कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र के विकास से संबंधित सरकार को सलाह देने के लिए प्रदेश में पहले से ही तीन सलाहकार परिषद है, जिसमें मूल्य परामर्शदात्री परिषद, राज्य सलाहकार परिषद और किसान आय वृद्धि आयोग गठित हैं। ऐसे में इन तीनों का मिलाकर ''राज्य किसान आयोग'' का गठन किए जाने की मांग हो रही है।

राज्य किसान आयोग बनाने की मांग पर अड़े यूपी के किसान।

आयोग के अध्यक्ष का पद कुलपति स्तर का

किसान आयोग में एक अध्यक्ष समेत छह सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव सरकार को दिया गया है। जिसमें अध्यक्ष का पद कुलपति स्तर का होगा। इस अयोग का पहला सदस्य वह व्यक्ति होगा जिसने 10 साल तक अध्यापन किया हो, दूसरा सदस्य कृषि उद्यान, पशुपालन ओर मंडी परिषद के निदेशक का बनाया जाए। तीसरा सदस्य कृषि क्षेत्र से किसन को बनाया जाए, चौथा कृषि एवं पशुपालन विभाग के निदेशक को ओर पांचवा मुद्दों के आधार पर नीति के जानकार विशेषज्ञ को बनाया जाए। किसान आयोग का सचिव प्राध्यापक स्तर के व्यक्ति को बनाया जाए।

देश में किसानों के लिए एमएस स्वामीनाथन के नेतृत्व में जब राष्ट्रीय किसान आयोग बना था, जिसके बाद हरियाणा, राजस्थान, बिहार और कर्नाटक राज्य में भी किसान आयोग का गठन हुआ। बावजूद देश के सबसे बड़े राज्य में किसान आयोग अभी तक नहीं बन पाया।

सरकार तक अपनी बात पहुंचाने में होगी आसानी

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने बताया कि यूपी में राज्य किसान आयोग का गठन होने से सरकार को उचित सलाह दिया जा सकेगा। यह आयोग ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के आय और रोजगार की क्षमता बढ़ाने के लिए उपायों की सिफारिश करेगा। किसानों के जोखिम को कम करने के लिए बाजार, मौसम, बीमा योजना, ऋण सुविधा, ई-कामर्स और बाजार सुधार के संबंध में भी सरकार को सुझाव देगा। उन्होंने कहा कि अभी किसानों को सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है।

कृषि मंत्री के माध्यम से सीधे कैबिनेट पहुंचेगी बात

प्रो. राजेन्द्र कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार को किसान आयोग का गठन करने और इसके कार्यालय को उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के बन रहे नए भवन के सप्तम पर स्थापित किया जाए। उन्होंने बताया कि किसान आयोग प्रदेश के शिक्षित युवाओं को खेती करने के लिए भी आकर्षित करेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य के संबंध में भी सरकार से किसानों के लिए उनकी लागत मिले इसकी सिफारिश करेगा। किसान आयोग ऐसी व्यवस्था करेगा कि वह जो सिफारिशें कर रहा है वह कृषि मंत्री के माध्यम से सीधे कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाए।

किसान आयोग के गठन के साथ ही मुख्यमंत्री की या उनकी ओर से नामित मंत्री की अध्यक्षता में ''एग्रीकल्चर कैबिनेट'' बनोन का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है। एग्रीकल्चर कैबिनेट में सदस्य सचिव के रूप में कृषि उत्पादन आयुक्त को बनाने की सिफारिश की गई है। एग्रीक्ल्चर कैबिनेट बनने से किसानों के जो मुद्दें और समस्याएं हैं उसको सीधे कैबिनेट में रखकर उसका निपटारा करने में मदद मिलेगी।

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