मटर व शिमला मिर्च की सहफसली खेती से कमा रहे मुनाफा 

मटर व शिमला मिर्च की सहफसली खेती से कमा रहे मुनाफा मटर और शिमला मिर्च की सहफसली खेती

मनोज कुमार, स्वयं कम्युनिटी जनर्लिस्ट

रायबरेली। "खेती बाड़ी से कुछ खास हासिल नहीं हो रहा था और घर के हालात भी ठीक नहीं थे। तो पैसा कमाने के लिए पंजाब गए और एक किसान के घर नौकरी कर ली उसके पास मुझसे कम खेतिहर जमीन थी। फिर भी वह नई नई तकनीकों से खेती कर अच्छा मुनाफा कमा लेता था। बस मैंने ठान लिया कि यहां से तकनीक सीख कर अपने गाँव में खेती करूंगा, "ऐसा कहते हैं किसान राकेश पाल।

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जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर पश्चिम दिशा में हरचंदपुर विकासखंड के पश्चिम गाँव के पूरे खलार के (38 वर्ष) वर्षीय राकेश पाल मटर और शिमला मिर्च की सहफसली खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

राकेश पाल बताते हैं, "मैं पंजाब नौकरी करने के लिए गया था। वहां हमने कृषि कार्य में एक किसान के घर नौकरी की वहीं हमने मटर और शिमला मिर्च की एक साथ खेती होते हुए देखी और उसकी विधि सीखी। कुछ वर्षों के बाद मैं वहां से नौकरी छोड़ कर अपने घर आ गया। यहां पर पिछले चार वर्षों से मटर और शिमला मिर्च की सहफसली खेती कर रहा हूं।"

वह आगे बताते हैं, "यह सहफसली खेती काफी फायदेमंद है। इन दोनों फसलों की एक साथ खेती करने में एक बीघा खेत में लगभग 35 से 40 हजार तक की लागत आती है। और अच्छा उत्पादन होने पर डेढ़ लाख से दो लाख रुपए तक का मुनाफा हो जाता है।"

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ऐसे करते हैं सहफसली खेती

सबसे पहले नर्सरी के लिए खेत को तैयार किया जाता है। अच्छी तरह से जुताई करने के बाद उसमें गोबर की खाद मिला दी जाती है। और बीजों को उपचारित करके नर्सरी तैयार की जाती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि नर्सरी तैयार करते समय जो क्यारियां बनाई जाती है उसमें पानी का निकास बहुत अच्छी तरह होना चाहिए। नर्सरी करने के बाद खेत की अच्छी तरह से जुताई करें, जुदाई के बाद गोबर की खाद अच्छी तरह से मिलाई जाती है। उसके बाद उसमें मेंढे बना दी जाती हैं। उन मेढ़ों पर एक तरफ शिमला मिर्च और दूसरी तरफ मटर की पौध लगा दी जाती है।

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पाले व शीत लहर से ऐसे करते हैं बचाव

मटर की फसल पर पाले व शीत लहर का कोई खास असर नहीं होता है। लेकिन शिमला मिर्च का पौधा बहुत ही नाजुक होता है। जो कि पाले व शीत लहर के प्रकोप से बहुत जल्द प्रभावित हो जाता है। इस प्रकोप से बचाने के लिए पौध रोपण के समय खेत में बनाई गई मेढ़ों के ऊपर शिमला मिर्च पूरब और मटर की पौध पश्चिम दिशा में लगानी चाहिए। मटर और शिमला मिर्च के बीच में धान की पुआल से एक फुट चौड़ी चटाई नुमा टटिया बनाकर लगा देनी चाहिए। टटिया का झुकाव शिमला मिर्च के पौधों की तरफ कर देना चाहिए। जिससे उत्तर पश्चिम से आती सर्द हवाएं और पाले से शिमला मिर्च की पौध बच जाएगी।

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इस फसल में कोई विशेष खरपतवार नहीं होता है। खरपतवार की रोकथाम के लिए निराई गुड़ाई समय-समय पर करते रहें। सहफसली खेती का प्रमुख लाभ यही है कि एक साथ दोनों फसलें तैयार हो जाती हैं बाजार ले जाने में कोई विशेष लागत नहीं आती है और दोनों फसलों में से मुनाफा भी अधिक होता है और लागत कम आती है।

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