मुंह और आंत के कैंसर को मात देगा सुर्ख लाल मक्का

मुंह और आंत के कैंसर को मात देगा सुर्ख लाल मक्काप्रतीकात्मक फोटो। 

इंदौर। भारत में मक्के की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। मक्के की किस्मों को अच्छा और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर शोध होते रहते हैं। मध्य प्रदेश में मक्के की एक ऐसी किस्म तैयार की गई है जो कैंसर जैसे रोग को खत्म करने में मदद करेगी।

मध्य प्रदेश के कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के कृषि विज्ञान केंद्र में मक्के की एक नई किस्म किसानों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। सुर्ख लाल रंग के इस मक्के में आंत, मुंह और स्तन कैंसर रोकने के गुण मौजूद हैं। इसमें प्रोटीन की मात्रा 10.5 फीसदी है, जो आम मक्का से करीब 25 फीसदी अधिक है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इसमें पाया जाने वाला एंथोकायनिन फायटोकेमिकल एंटी एजिंग होता है जो बुढ़ापे को जल्दी आने से भी रोकता है।

पांच वर्ष से इस मक्के पर चल रहा है अनुसंधान

कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के कृषि विज्ञान केंद्र में इस मक्का पर पांच साल से अनुसंधान चल रहा है। ये स्वीट कार्न है जिसे कच्चा खाने पर भी इसके दाने मीठे लगते हैं। इस समय अनाजों में अलग-अलग तत्व मिलाकर फोर्टिफाइड आटा बनाया जा रहा है, लेकिन इस मक्का की खास बात यह भी है कि यह अनुवांशिक रूप से फोर्टिफाइड है। गुणों के साथ यह दिखने में आकर्षक है।

सोयाबीन अनुसंधान केंद्र पर हो चुका है टेस्ट

कृषि विज्ञान केंद्र सहित राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र पर भी इसे उगाया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आलोक देशवाल ने बताया, "सोयाबीन अनुसंधान केंद्र पर इस मक्का का टेस्ट हो चुका है। इससे प्रोटीन की मात्रा पता लगाई जा चुकी है। अब इसमें विटामिंस और मिनरल्स का पता लगाया जाएगा। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस मक्का में एंथोकायनिन नामक फाइटो केमिकल पाया जाता है। यह एक स्वीट कार्न की वैरायटी है। अभी तक इसको कोई नाम नहीं दिया गया है। अगले वर्ष किसानों को इस मक्के के बीज उपलब्ध कराएं जाएंगे। "

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एंथोकायनिन कैंसर से लड़ने में करता है मदद

कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अरुण अग्रवाल का कहना है, "एंथोकायनिन ही कैंसर सहित अन्य बीमारियों से लड़ने में मददगार साबित होता है। यह तत्व मल्टीपरपज होता है, जो मांसपेशियों को स्वस्थ्य रखता है।

हृदय और लिवर के लिए भी फायदेमंद

मक्का की यह नई किस्म हृदय और लीवर के लिए भी फायदेमंद है। हाई कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने का गुण इसमें है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. देशवाल इस मक्का पर लगातार काम कर रहे हैं। वे बताते हैं कुछ साल पहले लुधियाना में देशभर के कृषि विज्ञान केंद्र के सम्मेलन से वे इस मक्का का एक भुट्टा लेकर आए थे। अनुसंधान के बाद एक भुट्टे के दाने निकालकर इसे इंदौर में कस्तूरबा ट्रस्ट के खेत में बोया गया। इसे हर साल बोया जा रहा है और फिलहाल करीब चार क्विंटल बीज इकट्ठा हो चुके हैं।"

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मक्के की खासियत

  • इसकी फसल 100 से 110 दिन में पककर तैयार होती है
  • इसका औसत उत्पादन 40-50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है
  • पौधे की ऊंचाई 8-9 फीट होती है। इसमें कीड़े भी कम लगते हैं
  • जो लोग मल्टी ग्रेन खाना पसंद करते हैं, वे इस मक्का को अन्य अनाज में मिलाकर खा सकते हैं
  • बेबी फूड और मिड-डे मील के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है

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