बीहड़, ऊसर और बंजर भूमि भी बनेगी उपजाऊ

बीहड़, ऊसर और बंजर भूमि भी बनेगी उपजाऊप्रतीकात्मक फोटो (साभार:गूगल)।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में छोटी जोत और भूमि किसानों को आने वाले दिनों में ऐसी उपजाऊ जमीन मिलेगी, जहां पर वह अच्छी खेती कर सकेंगे। प्रदेश में 1 लाख 35 हजार हेक्टेयर ऐसी बीहड़त, ऊसर और बंजर भूमि है, जहां पर कुछ भी पैदा नहीं होता है। इन जमीनों को खेती योग्य बनाने के लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश सोडिक लैण्ड रिक्लेमेशन तृतीय परियोजना की शुरूआत की है। जिसमें जमीनों का उपचार करके उन्हें ऐसा बनाया जाएगा कि वहां पर किसान खेती कर सकेंगे।

पहले चरण में 5000 बीहड़ क्षेत्र को उपजाऊ बनाने की तैयारी

इस परियोजना के पहले पायलट चरण में बीहड़ क्षेत्र सुधार परियोजना का संचालन 5000 बीहड़ क्षेत्र की जमीन को उपजाऊ बनाने में किया जा रहा है। इसमें कानपुर देहात, फतेहपुर, इटावा, मैनपुरी, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, जौनपुर इलाहाबाद और लखनऊ जिलों की बीहड़ भूमि को ठीक करने काम किया जा रहा है। प्रदेश के 32 जिलों में 1,30,000 ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाया जाएगा।

यह जिले हैं शामिल

इनमें अलीगढ़, फिरोजाबाद, मैनपुरी, फरूखाबाद, कानुपर देहात, फतेहपुर, इलाहाबाद, कन्नौज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, इटावा, संतरविदास नगर भदोही, आजमगढ़, एटा, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदाई, सुल्तानपुर, बाराबंकी, कासगंज, बुलंदशहर, अमेठी, अम्बेडकर, बनारस, शाहजहांपुर और फैजाबाद जिले शामिल हैं।

अगले साल दिसंबर तक लक्ष्य पूरा करने की तैयारी

इस योजना को अगले साल 31 दिसंबर, 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले दिनों घोषणा की है कि वह प्रदेश के बीहड़, ऊसर और बंजर भूमि को ठीक करने काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व परती भूमि विकास मंत्री शिवपाल यादव ने कहा कि सोडिक लैण्ड रिक्लेमेशन तृतीय परियोजना का लाभ किसानों को मिलेगा, जिससे प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था भी सुधरेगी।

2.40 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश सोडिक लैण्ड रिक्लेमेशन तृतीय परियोजना से ऊसर, बंजर और बीहड़ भूमि को उपजाऊ बनने से प्रदेश के 2.40 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। इस परियोजना में किसानों की सहभागिता से मेड़बंदी, समतलीकरण, सक्रेपिंग, फलसिंग, जिप्सम मिक्सिंग और लीचिंग का काम करते हुए फसलोत्पादन कार्यक्रम कराया जाएगा। ऊसर भूमि एक प्रकार का विकार है, जो सामान्य उत्पादक खेतों में थोड़े से शुरू होकर पूरे खेत को परती बना देता है। बरसात कम होने, अधिक तापमान, मिट्टी में क्षारीश एवं लवणयुक्त चट्टानों की अधिकता से यह जमीन कड़ी हो जाती है और यहां पर कोई खेती नहीं हो पाती है। उस भूमि को ठीक करने के लिए ऊसर सुधार तकनीक का उपयोग किया जाएगा। ऊसर भूमि के सुधार के लिए अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकासी प्रणाली की व्यवस्था की जाएगी। जमीन को समतल किया जाएगा।

तब 32 लाख 82 हेक्टेयर भूमि बनी थी कृषि योग्य

उत्तर प्रदेश में ऊसर, बंजर और बीहड़ भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए 1993 में भूमि सुधार बैंक की स्थापना की गई थी। विश्व बैंक और यूरोपीय संघ की सहायता से प्रथम और दि्वतीय चरण में प्रदेश में कुल 32 लाख 83 हजार हेक्टेयर ऊसर भमि को सुधार कर कृषि योग्य बनाया जा चुका है।

उत्तर प्रदेश में ऊसर, बंजर और बीहड़ भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम लगातार काम कर रहा है। इसके लिए किसानों में सहभागिता भी बढ़ाई जा रही है। किसानों को ट्रेनिंग और अनुदान दिया जा रहा है। सरकार ने जो लक्ष्य तयकिया है, उसको प्राप्त करने के लिए विभाग काम कर रहा है।
प्रदीप भटनागर, कृषि उत्पादन आयुक्त सह चेयरमैन, भूमि सुधार निगम

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