मिल मालिकों पर करम, गन्ना किसानों पर सितम

मिल मालिकों पर करम, गन्ना किसानों पर सितमगन्ने का बकाया न मिलने और उचित रेट न मिलने से प्रदेशभर के किसान परेशान हैं। 

लखनऊ। गन्ना किसानों के लिए 450 रुपये का समर्थन मूल्य स्वीकार नहीं है, मगर चीनी मिल मालिकों का 680 करोड़ रुपये माफ कर दिया गया। शनिवार को लखनऊ स्थित लाल बहादुर शास्त्री गन्ना संस्थान में गन्ना विकास और चीनी उद्योग की वर्तमान चुनोतियों एवं विकल्प पर एक बड़े सेमिनार का आयोजन हुआ। जिसमें गन्ना विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ ही गन्ना उत्पादन से जुड़े देशभर के विशेषज्ञ शामिल होकर लेक्चरर दे रहे थे कि प्रदेश का गन्ना किसान अपने खेतों के अधिक से अधिक गन्ना कैसे उत्पाद करें और चीनी मिलों से चीनी कैसे अधिक पैदा हो।

इधर जारी है प्रदर्शन

ठीक उसी समय राज्य के पश्चिम से लेकर पूरब तक गन्ना किसान कलेक्टे्ट से लेकर तहसील में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इस पेराई सत्र 2016-17 के लिए गन्ने का मूल्य 450 रुपए कर दिया जाए। लेकिन सरकार किसानों की 450 रुपए की मांग तो नहीं मान रही, लेकिन चीनी मिल मालिकों पर मेहरबानी करते हुए उनका 680 करोड़ रुपए का ब्याज माफ कर दिया। सरकार के इस भेदभाव वाले फैसले से किसान आंदोलित है। सालों से गन्ने का भाव नहीं बढ़ाए जाने से निराश और हताश किसान अब गन्ने की खेती से दूर हो रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ यह सरकार है कि राज्य में गन्ने का उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, उसको लेकर आए दिन वर्कशाप और सेमिनार का आयोजन राजधानी में करा रही है। जिसमें गन्ने के नाम पर लाखों रुपए का खाना-पीना और विशेषज्ञों को फीस के रूप में वहन किया जा रहा है, लेकिन जो गन्ना किसान है, वह दिनोंदिन उपेक्षित हो रहे हैं।

नहीं दे रहे गन्ना किसानों की समस्याओं पर ध्यान

उत्तर प्रदेश का गन्ना विभाग और उससे जुड़े अधिकारी सभी गन्ना के विकास पर बड़ी-बड़ी बातें तो करते नजर आ रहे हैं, लेकिन जो गन्ना किसान हैं उसकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में प्रदेशभर में किसानों को गुस्सा फूट पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैट का कहना है कि राज्य सरकार शुगर मिलों के दबाव में बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के ब्याज के पैसे को माफ कर किसानों के साथ धोखा किया है। गन्ना का भाव नहीं बढ़ाए जाने से राज्य के किसानों को गन्ने की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। स्थिति यह है कि बुजुर्ग किसान तो गन्ने की खेती किसी तरह कर रहा है, लेकिन नई पीढ़ी का इससे मोहभंग हो रहा है। नतीजे में युवा खेती छोड़िकर शहर की ओर पलायन कर रहे हैं।

किसानों का 1530 करोड़ रुपए चीनी मिलों पर बकाया

राज्यभर की निजी और सहकारी मिलों पर सालों से किसानों का 1530 करोड़ रुपए बकाया है। जिसको भुगतान चीनी मिलें नहीं कर रही हैं।

सरकार चीनी मिलों पर मेहरबान है। चीनी मिलों को लगातार राहत दे रही है। सरकार ने लगातार तीन पेराई सत्रों में गन्ना किसानों को करीब 1600 करोड़ रुपए का ब्याज मिलने से वंचित कर दिया।
वीएम सिंह, अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैट ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मिल मालिकों का 680 करोड़ रुपए माफ करके किसानों को झटका दिया है। उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति खरीद विनियम) अधिनियम 1953 की धारा तहत सरकार को किसानों के बकाया भुगतान पर ब्याज माफ करने का अधिकार है। लेकिन इस अधिकार का यूपी की सरकार ने नाजायज फायदा उठाते हुए चीनी मिल मालिकों को फायदा पहुंचा दिया। सरकार ने जो चीनी मिलों का जो 680 करोड़ रुपए ब्याज का माफ किया, उससे निजी चीनी मिलों को 640 करोड़ और सहकारी चीनी मिलों को 40 करोड़ का फायदा होगा, लेकिन किसानों को इसका कोई लाभ नहीं होगा।

कैबिनेट ने किया ब्याज माफी का फैसला

वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के सरकार के गन्ना और चीनी आयुक्त विपिन कुमार दि्वेरी का कहना है कि चीनी मिलों के ब्याज पर माफी के लिए उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन ने छह अप्रैल को लिखकर इसके लिए अनुरोध किया था। जिसको लेकर संयुक्त गन्ना आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति की सिफारिश पर ही पेराई सत्र 2014-15 के बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज माफी का फैसला कैबिनेट ने किया। ब्याज माफ करने के निर्णय से चीनी मिलों के संचालन में लाभ होगा, वहीं किसानों को इसका दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

चीनी मिल के बाहर गन्ने लदे ट्रैक्टरों की कतार।

किसानों ने दी चेतावनी, नहीं उठने देंगे चीनी और शीरा

भारतीय किसान यूनियन की आह्वान पर प्रदेशभर के गन्ना किसान आंदोलन पर हैं। उनकी मांग है कि सरकार गन्ने का मूल्य 450 रुपए करें और वह ऐसा नहीं करेगी तो चीनी मिलों से चीनी और शीरा का उठाव नहीं होने दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर के सिसोली गांव रामनरेश बड़े गन्ना किसान हैं। उनका कहना है कि गन्ना के विकास के नाम पर सरकार सिर्फ राजनीति कर रही है। गन्ना किसान का करोड़ों रुपए चीनी मिलों पर बकाया है। जिससे किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं लेकिन सरकार किसानों पर ध्यान नहीं दे रही है।

राज्य में गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर है। मैं लगातार विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करके उनको निर्देश दे रहा हूं। गन्ना किसानों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। शासन स्तर पर पेराई सत्र 2016-17 के लिए गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी किए जाने की हर कोशिश की जा रही है।
नरेन्द्र सिंह वर्मा, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार

Share it
Top