किसानों को नहीं पता क्या है मृदा परीक्षण? 

किसानों को नहीं पता क्या है मृदा परीक्षण? मृदा परीक्षण

लखनऊ। भले ही बजट में हर जिले में मृदा स्वास्थ्य जांच केंद्र खोलने की घोषणा की गई हो लेकिन हकीकत ये है कि प्रधानों व किसानों को ही मृदा जांच की ऐसी कोई योजना है, के बारे में भी नहीं पता है। ऐसे में किसानों को भी इसकी जानकारी नहीं मिल पाती।

बलिया जिले की रतसर कलां की ग्राम प्रधान स्मृति सिंह ने बताया, ‘’मृदा जांच योजना के बारे में कृषि विभाग की तरफ से प्रधानों को कोई जानकारी नहीं दी गई है। हमारे गाँव में किसी भी किसान ने इस योजना का लाभ नहीं मिला है। मृदा जांच के नमूने के लिए भी गाँव में कभी कोई नहीं आया।’’

देश में मिट्टी की घटती उर्वरता शक्ति और इसके कारण कृषि उत्पादन में हो रही कमी को दूर करने के लिए पिछले कई वर्षों से मृदा स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसमें मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना प्रमुख कार्यक्रम है जिसमें मृदा जांच प्रयोगशालाओं में खेतों की मिट्टी की जांच करके उसमें पोषक तत्व की क्या स्थिति है, की जानकारी दी जानी है।

गोरखपुर जिले के खजनी ब्लाक के 20 हजार का आबादी वाले गाँव सैरो के प्रधान सत्यवीर यादव ने बताया, “किसानों के लिए जो भी योजनाएं चल रही हैं वह अधिकतर राजधानी लखनऊ और जिला मुख्यालय से आगे नहीं बढ़ती हैं। हमारे गाँव में किसी भी किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का लाभ नहीं मिला है। खेत की मिट्टी का जांच के कब और किसको करनी है इसकी कोई जानकारी जब हम प्रधानों को नहीं दी गई तो आप किसानों की सोच सकते हैं।’’

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के प्रचार-प्रसार और मृदा जांच के नमूनों के एकत्रीकरण के लिए कृषि विभाग ने कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और विभिन्न मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को जिम्मा दिया था लेकिन समन्वय नहीं बनने के कारण इसमें निजी एजेंसियों को भी शामिल किया गया। फिर भी आम किसानों को इसकी जानकारी नहीं दी जा सकी है। मेरठ जिले के अब्दुल्लापुर गाँव के ओंकार सिंह बड़े किसान हैं। उनसे जब मृदा स्वास्थ्य योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाएं तो बहुत चलती हैं लेकिन हम किसानों तक यह योजनाएं नहीं पहुंचती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की हमें जानकारी नहीं है।

क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में भी खानापूर्ति

प्रदेश के किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच खुद से नमूने लेकर भी करा सकें इसके लिए आमलबाग लखनऊ में क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला बनी है लेकिन इस प्रयोगशाला के बारे में भी किसानों को नहीं पता है। प्रयोगशाला के मृदा वैज्ञानिक कौशल सिंह ने बताया कि यहां पर मृदा की जांच के लिए सभी इंतजाम है लेकिन किसान यहां पर जांच कराने जल्दी आते नहीं हैं। जो आते हैं उनकी जांच करके रिपार्ट दी जाती है।

मिट्टी जांच का डाटा अभी तैयार नहीं

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू किया है लेकिन कृषि विभाग ने कितने किसानों के खेत की मृदा जांच कराई है इसका आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। इस बारे में कृषि विभाग के उप निदेशक सांख्यिकी विनोद कुमार ने बताया, “हर जिलों में विभाग और एजेंसियों के जरिए मृदा जांच का काम चल रहा है। कितनी जांच हुई है इसका आंकड़ा अभी नहीं है।”

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