बारिश और ओले सबको मात देंगी गेहूं की ये देसी किस्में, नवंबर महीने में करें बुआई

Ashwani NigamAshwani Nigam   23 Oct 2017 4:32 PM GMT

बारिश और ओले सबको मात देंगी गेहूं की ये देसी किस्में, नवंबर महीने में करें बुआईसात नवंबर से 25 नवंबर के बीच गेहूं की बुवाई करने का सही समय

लखनऊ। नवंबर की शुरुआत होने वाली है ऐसे में रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुवाई की तैयारियों में किसान जुट जाएं। महीने के पहले हफ्ते के दौरान खेतों की तैयारी कर लेना जरूरी है, क्योंकि सात नवंबर से 25 नवंबर के बीच गेहूं की बुवाई करने का सबसे सही समय होता है।

किसानों को नवंबर महीने की शुरुआत में ही गेहूं के लिहाज से अपने खेतों की मिट्टी की जांच करा लेनी चाहिए ताकि कोई कमी हो तो उस का इलाज किया जा सके। मिट्टी की जांच करा लेने से जरूरी खादों और उर्वरकों की जानकारी मिल जाती है, नतीजतन फसल उम्दा होती है। इस बार के रबी सीजन में किसान गेहूं की कुछ खास देसी प्रजातियों की भी खेती करके अच्छा उत्पादन ले सकते हैं। 'कुदरत 8' और 'कुदरत विश्वनाथ' नामक यह देसी प्रजातियां किसानों को अच्छी उपज देंगी।

110 दिन में तैयार हो जाती है फसल

वाराणसी जिले के कुदरत कृषि शोध संस्था, टडि़या, जाक्खिनी के किसान प्रकाश सिंह रघुवंशी ने देसी गेहूं की दो खास किस्में विकसित की है। जिसमें कुदरत 8 विश्वनाथ बौनी किस्म की नई प्रजाति है। इस प्रजाति के पौधों की ऊंचाई करीब 90 सेंटीमीटर और बाली की लंबाई करीब 20 सेंटीमीटर (नौ इंच) की होती है। इस का दाना मोटा और चमकदार होता है। इसकी फसल 110 दिन में पक जाती है और इस की पैदावार 25-30 कुंतल प्रति एकड़ है।

कई राज्यों में है डिमांड

इस प्रजाति के बारे में जानकारी देते हुए प्रकाश सिंह ने बताया '' कुदरत 8 विश्वनाथ में मौसम में घटते-बढ़ते तापमान को सहने की क्षमता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों के हजारों किसानों ने इस किस्म को परीक्षण के लिए अपने यहां लगाया, जिस से उन्हें जबरदस्त सफलता प्राप्त हुई और वे इस बीज के मुरीद हो गए हैं।''

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ओलावृष्टि और तेज हवाओं को भी झेल लेती है यह प्रजाति

कुदरत विश्वनाथ भी एक खास विकसित प्रजाति है। इस प्रजाति की बुवाई नवंबर से लेकर 10 जनवरी तक भी किसान कर सकते हैं। इसकी खासियत यह है कि यह तेज बारिश, ओलों और तेज हवाओं के प्रकोप में भी यह किस्म खेतों में खड़ी रही थी, क्योंकि इस का तना मोटा और मजबूत होता। इसमें लंबे-चौड़े पत्ते और 9-10 इंच लंबी बालियां होती हैं। इसके बारे में प्रकाश सिंह रघुवंशी का कहना, "मैंने अब तक कृषि क्षेत्र में बीजों की तकरीबन 300 प्रजातियां विकसित की हैं, जिनका फायदा किसान उठा रहे हैं।" प्रकाश सिंह रघुवंशी ने बताया कि वे पूरे भारत में जगह-जगह स्वदेशी बीज बैंक की स्थापना कर रहे हैं और देश के अलग-अलग इलाकों में जा कर देशी बीजों से खेती करने के लिए किसानों को मुफ्त में बीज के सैंपल दे रहे हैं और उन्हें जैविक तरीके से खेती करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं। उनक मकसद यह है कि किसान देशी बीजों का उत्पादन करें और दूसरे किसानों को भी बीज उत्पादन करना सिखाएं। कोई भी किसान देसी बीज मंगाना चाहे तो कुदरत कृषि शोध संस्था, टड़िया, जाक्खिनी, जिला वाराणसी, उत्तर प्रदेश, पिन 221305 पर संपर्क कर सकता है।

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