किसानों और पशुपालकों के लिए बड़े काम है ये जुगाड़, भूसा ढोने में करेगा मदद

किसानों और पशुपालकों के लिए बड़े काम है ये जुगाड़, भूसा ढोने में करेगा मददट्रैक्टर और ट्राली के बीच एक वैक्यूम क्लीनर लगाया गया है, जो हवा के साथ भूसे को खींचकर ट्रॉली में भर देता है

लखनऊ। भूसे के रेट लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले वर्ष कई इलाकों में गेहूं का भूसा 1000 रुपए कुंतल तक पहुंच गया था, जबकि थोक भाव भी 500-700 रुपए तक रहा था। भूसे की कीमत बढ़ने की वजह है खेती में कंबाइऩ जैसी मशीनों का इस्तेमाल।

किसान अगर मजदूरों या रीपर से गेहूं कटवाते भी हैं तो उसकी थ्रेसिंग और भूसा ढुलाई में बड़ी समस्या आती है, लेकिन ये मशीन किसानों का काम काफी आसान कर सकती है।

रीपर या हंसिया से गेहूं कटाई के बाद किसान थ्रेसिंग कराते हैं। कई किसान गेहूं की फसल को अपने भूसा रखने की जगह (भुसैल) के आसपास ले जाकर थ्रेसिंग कराते हैं जबकि कई किसान खेत में ही थ्रेसिंग करा देते हैं। ऐसे किसानों के लिए ये ट्रैक्टर और ट्रॉली में फिट से मशीन काफी कारगर हो सकती है। ट्रैक्टर और ट्राली के बीच एक वैक्यूम क्लीनर लगाया गया है, जो हवा के साथ भूसे को खींचकर ट्रॉली में भर देता है।

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