देश में एक करोड़ से अधिक लोगों की जीविका नारियल की फसल पर निर्भर

देश में एक करोड़ से अधिक लोगों की जीविका नारियल की फसल पर निर्भरभारत को विश्व में नारियल उत्पादन में अग्रमी बनाने का काम कर रहा नारियल विकास बोर्ड।

बिहार में नारियल के उत्पादन, उत्पादकता, नारियल उत्पादों की प्रोसेसिंग, मूल्य बढ़ाने, मार्केटिंग और निर्यात को बढ़ाने में नारियल विकास बोर्ड की प्रमुख योजनाएं जोर दे रही हैं। विश्व में नारियल उत्पादन और उत्पादकता में भारत अग्रणी देश है। हमारा वार्षिक नारियल उत्पादन 20.82 लाख हेक्टर से 2395 करोड़ नारियल है और उत्पादकता प्रति हेक्टर 11505 नारियल है।

देश के सकल घरेलू उत्पाद में नारियल का योगदान करीब 27900 करोड़ रुपए है। वर्ष 2016-17 में हमारे देश से 2084 करोड़ रुपए के नारियल उत्पादों का निर्यात किया गया है। हमारे देश में एक करोड़ से अधिक लोग अपनी जीविका चलाने के लिए इस फसल पर निर्भर हैं।
राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री

नारियल विकास बोर्ड का लक्ष्य है कि नारियल किसानों को नारियल के उत्पादन, प्रोसेसिंग, विपणन और नारियल एवं मूल्य वर्धित उत्पादों के निर्यात में सहायता देकर भारत को नारियल के उत्पादन, उत्पादकता, प्रसंस्करण एवं निर्यात में अग्रणी बनाना।

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नारियल खेती।

देश में नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए नारियल विकास बोर्ड के सहयोग से बिहार-बंगाल के साथ ही असम, त्रिपुरा, मिजोरम और नागालैंड में नारियल की खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ़ रहा है।

कृषि मंत्री ने कहा कि देश मे नारियल उत्पादन मे वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-15 मे 42,104 मिलियन नट्स का उत्पादन हुआ जबकि वर्ष 2015-17 के दौरान 44,405 मिलियन नट्स का उत्पादन हुआ। यह बड़ी उपलब्धि है कि नारियल के उत्पादों का निर्यात वर्ष 2011-14 में 3017.30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2014-17 में 4846.36 करोड़ रुपये हुआ जोकि 60.62% की वृद्धि है। वर्ष 2016 की शुरुआत में ही भारत से मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका को नारियल तेल का निर्यात करने लगा है जहां से हम पिछले वर्षों में आयात कर रहे थे। डेसिक्केटड नारियल का भी भारत से यह पहली बार वर्ष 2016 से बडी मात्राओं में यूएस और यूरोप में निर्यात हो रहा है।

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उन्होंने कहा कि बिहार में वास भूमि में भी अच्छी तरह देखभाल करके नारियल की खेती की जा सकती है। अभी बिहार में 14,900 हेक्टेयर में नारियल की खेती होती है। लेकिन बोर्ड के अनुमान के मुताबिक बिहार में तकरीबन 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचित स्थिति में नारियल की खेती हो सकती है। ऐसे में किसान प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग लेने वाले किसान नारियल की खेती की ओर उन्मुख हो सकेंगे। साथ ही नारियल के उत्पादन में बढ़ोतरी होने पर राज्य में लोगों को रोजगार मिल सकेगा। नारियल आधारित विभिन्न उत्पाद जैसे नारियल चिप्स, नारियल दूध, नारियल शक्कर, नारियल नीरा, डाब, नारियल शहद नारियल गुड़, नारियल दूध शेक, नारियल स्नैक्स विर्जिन नारियल तेल, नारियल नेचुरल क्रीम, नीरा कुकीज समेत अन्य उत्पादों के बनाने में काफी लोगों को रोजगार मिलेगा।

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कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में नारियल से जुडी योजनाओं को लागू करने के लिए वर्ष 2014 से वर्ष 2017 तक कुल 409.01 लाख रुपए नारियल विकास बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए हैं। बिहार में नारियल की खेती के विस्तारण के लिए 'नारियल के अधीन क्षेत्र विस्तार' योजना के लिए प्राथमिकता दे रहे हैं। इस योजना के अधीन नारियल के नए रोपण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। नारियल खेती के वैज्ञानिक तरीकों का निदर्शन करने के लिए 'निदर्शन प्लाटों की स्थापना' योजना के लिए वर्ष 2017-18 के दौरान 46.25 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं।

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Tags:    coconut farming 
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