इस बार 70 प्रतिशत बागों में नहीं आएगा ढुलाई का पैसा, किसान चिंतित

इस बार 70 प्रतिशत बागों में नहीं आएगा ढुलाई का पैसा, किसान चिंतितमलिहाबादी आम का पेड़ दिखाता किसान।

सुरेन्द्र कुमार

मलिहाबाद-लखनऊ। विश्व में प्रसिद्ध मलिहाबादी आम के लिए यह सीजन घाटे का साबित हो रहा है। आम उत्पादन को मुख्य फसल के रूप में अपनाने वाले यहां के किसान इस हालात को देखकर परेशान हैं। किसानों की माने तो इस बार उनके वर्ष भर का खर्चा तो दूर 70 प्रतिशत बागों मे धुलाई का पैसा भी नहीं निकल सकेगा।

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किसान बताते हैं कि फलपट्टी क्षेत्र माल, मलिहाबाद व काकोरी में करीब 36 हजार हेक्टेयर भूमि पर आम के बाग हैं। लेकिन इनमें 35 प्रतिशत ही बौर आया था। जिससे उनके चेहरों पर मायूशी छा गयी। ग्राम नत्थूखेड़ा के बागवान सियाराम कहते हैं कि हमारे बाग में 30 प्रतिशत बौर तो आया था। लेकिन आम नहीं बैठा जिससे उनके परिवार का पूरे वर्ष का खर्च तो दूर इस बार बागों की धुलाई का खर्च भी आना संभव नहीं है। ग्राम मनकौटी निवासी व्यापारी छेदीलाल कहते हैं कि उन्होंने बौर के समय करीब 8 लाख रुपयों के बाग खरीदे थे। इसमें बौर तो बहुत था, लेकिन मौसम की मार के चलते उन बागों में अब आम नहीं दिख रहा।

ग्राम गढ़ी जिन्दौर निवासी बागवान कमलेश बताते हैं कि उनके पास करीब 3 बीघे का बाग है। उन्होंने अक्टूबर माह से लेकर दिसम्बर माह के मध्य जालाकीट रोग के बचाव के लिए अपने बाग में 3 छिड़काव कराया ले्किन मौसम के ‍‍‍‍‍मार के कारण सिर्फ ‍20 प्रतिशत ही बौर आया। उसके बाद बौर पर उनके द्वारा 2 कीटनाशक दवाओं के छिड़काव कराये गये। जिस पर करीब 20 हजार रूपयों का खर्च आया। लेकिन मौजूदा समय मे बाग मे आम ही नहीं दिख रहा है। जिससे उनके पूरे वर्ष का बजट तो दूर दवाओं के छिड़काव का भी पैसा आना संभव नही है। ऐसे ही क्षेत्र मे अनेक बागवान हैं जिन बागों मे कीटनाशक छिड़काव का भी पैसा आना संभव नही है।

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यह देख बागवानों के चेहरों पर चिन्ता की लकीरें हैं, क्योंकि इस क्षेत्र का मुख्य व्यवसाय आम है। न तो यहां कोई फैक्ट्री है और न ही कोई उद्योग, जहां ये किसान काम कर सकें। ग्राम नईबस्ती निवासी हरीराम, रामविलास व अन्य किसान कहते हैं कि अगर यहां कोई फैक्ट्री या उद्योग स्थापित कर दिया जाये तो लोगों को मजदूरी करने का साधन मिल जायेगा। हालांकि यह फलपट्टी क्षेत्र घोषित होने से यहां कोई फैक्ट्री या उद्योग नहीं स्थापित किया जा सकता है। लोग अब मजदूरी करने के लिए बाहर पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं।

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First Published: 2017-04-18 10:17:18.0

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