मेंथा आॅयल के दाम बढ़ने से जड़ भी हुई महंगी, अगले महीने से होगी बुवाई

मेंथा आॅयल के दाम बढ़ने से जड़ भी हुई महंगी, अगले महीने से होगी बुवाईअगेती मेंथा तकनीकी से कमाएं मुनाफा, पास-पास मेड़ों पर दोनों ओर लगाएं जाते हैं पौधे।

इस बार मेंथा की कीमतों में जबर्दस्त उछाल आया, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिला, इस बार मेंथा की खेती का रकबा भी बढ़ने की उम्मीद है।

प्रदेश में अकेले बाराबंकी 33 प्रतिशत मेंथा आयल का उत्पादन करके पहला स्थान रखने वाला बाराबंकी मेथा की जड़ की खेती के लिए भी जाना जाता है। यहां से मेथा की जड़ का व्यापार बाराबंकी तक ही सीमित नहीं है बल्कि प्रदेश के कई जिलों में यहां से मेंथा की जड़े जाती हैं।

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अगले महीने से किसान मेंथा की अगेती बुवाई शुरु कर देंगे, ऐसे में किसानों को अभी से ही मेंथा की बुवाई की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

भारत दुनिया में सबसे बड़ा मेंथा उत्पादक और निर्यातक है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक मेंथा के कारोबार में 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी भारत की है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सिंथेटिक मेंथा के आने के बाद से कारोबार में लगातार गिरावट हो रही थी और पिछले कई वर्षों में मेंथा ऑयल 700-1000 रुपए के बीच बिक रहा था।

जिला उद्यान अधिकारी जयकरन सिंह बताते हैं, "पिछले पांच वर्षों से मेंथा आयल का भाव सही नहीं रहा लेकिन इस बार मेंथा आयल का भाव अच्छा होने के कारण मेथा का रकबा बढ़ने की उम्मीद है, जिससे जड़ की खेती करने वाले किसानों को अच्छी आय होने की सम्भावना है।"

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वो आगे बताते हैं, "पिछले वर्ष जिले में 65000 हेक्टेयर के रकबे मे मेथा की खेती की जा रही थी, इस बार मेंथा आयल का रेट अच्छा होने के कारण रकबा बढ़कर 75000 हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है।"

कृषि बीज भंडार प्रभारी सूरतगंज सिद्धार्थ मिश्रा बताते हैं, "मेथा की जड़ों की खेती करने वाले किसानों को इस वक्त विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है क्योंकि इस वक्त जड़ बैठने व उनके विकास का उचित समय है खेत में नमी रखना बहुत जरूरी है और नमी मे अक्सर खेतों मे खुर खुराईया जैसा कीड़ा लगता है जो जमीन को खोता हुआ चलता है जो हवा से जड़ों को डिस्पैच कर देता है जिससे जड़ों का विकास रुक जाता है।"

वो आगे कहते हैं कि इसकी रोकथाम करने की अत्यंत आवश्यकता है इसका एक जैविक उपाय है कि आप खेतों में टी आकार की डंडियां गाड़े जिस से क्या होगा की चिड़िया इन पर बैठेंगी और वह कीड़े को खा लेंगे साथ ही किसान यूनिक एसिड लिक्विड आता है बाजार में जिसे अपनी फसलों में छिड़काव करके भी अच्छा उत्पादन पैदा कर सकते हैं जिससे जड़े अच्छी बैठेंगी और पत्तियों की सुरक्षित रहेंगे।

वहीं बाराबंकी जिले के बेलहरा में मेंथा की जड़ की खेती करने वाले किसान मुन्ना राजपूत (45 वर्ष) बताते हैं, "हम पिछले कई वर्षों से जड़ की खेती कर रहे हैं इस बार भी हमारे पास एक एकड़ जड़ की खेती की है एक एकड़ जड़ की खेती के लिए लगभग 25 हजार से 30 हजार की लागत हमारी आती है और एक एकड़ में लगभग 90 से 100 कुंतल तक जड़ का उत्पादन होता है साथ ही पौधे की पेराई करके 25 से 30 किलो तक मेंथा आयल भी प्राप्त कर लेते हैं पिछले वर्ष 18 सौ से 22 सौ कुंतल तक जड़ बिकी थी इस बार तो मेथा आयल का रेट अच्छा होने के कारण जड़ का भाव और भी अच्छा होने की उम्मीद है।"

वहीं सूरतगंज ब्लॉक के जलालपुर निवासी रिन्कू वर्मा (30 वर्ष) बताते हैं, "मेंथा आयल की खेती से मेंथा की जड़ की खेती करने में फसल को थोड़ा ज्यादा समय देना पड़ता है लगभग पांच माह में जड़ की खेती तैयार होती है। जड़ की खेती हम ज्यादातर अपने उन खेतों में करते हैं यहां की मिट्टी बलुई होता है क्योंकि बलुई मिट्टी में जड़ों का विकास अच्छा होता है।"

नीचे देखिए वीडियो- क्या आप जानते हैं, मेंथा के ठंडे-ठंडे तेल के लिए किस अग्निपरीक्षा से गुजरता है किसान

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