इस बार सस्ते आलू को तरसेंगे आप

इस बार सस्ते आलू को तरसेंगे आपआलू (फोटो साभार: गूगल)।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आलू के बढ़ते दामों से जहां आम लोगों को इस साल राहत नहीं मिलेगी, वहीं प्रदेश में आलू की पैदावार भी घट सकती है। प्रदेश में आलू की बुवाई पहले से ही पीछे चल रह थी कि रही-सही कसर नोटबंदी ने कर दी। प्रदेश में इस साल 6 लाख 25 हजार हेक्टेयर में आलू उत्पादन का अनुमानित लक्ष्य 147 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन नोटबंदी के कारण यह लक्ष्य पिछड़ता हुआ दिख रहा है।

दिसंबर के पहले सप्ताह में आ जाता है, मगर...

उत्तर प्रदेश उद्यान एवं प्रसंस्करण विभाग की आलू मिशन विभाग के अनुसार यूपी में नए सीजन का आलू दिसंबर के पहले के सप्ताह में बाजार में आ जाता है। लेकिन इस बार आलू की बुवाई लेट होने से यह तय समय पर बाजार में नहीं आ पाएगा। अभी जो नए आलू प्रदेश में आए हैं, वह पंजाब से आ रहे हैं। ऐसे में आलू के दामों में गिरावट नहीं होगी और आम लोगों को महंगा आलू खरीदना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश उद्यान प्रसंस्करण विभाग के निदेशक एसपी जोशी ने कहा कि प्रदेश में आलू बुवाई अभी चल रही है। जल्दी ही यह पता चल जाएगा कि कितने हेक्टेयर में बवाई हुई है।

पिछले साल से ज्यादा आलू उत्पादन का रखा गया है लक्ष्य

उत्तर प्रदेश में साल 2015-16 में 6 लाख 12 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी और उत्पादन 141.29 लाख मीट्रिक टन हुआ था, जबिक इस साल पिछले साल से ज्यादा लक्ष्य रखा गया है। लेकिन आलू के बुवाई का समय बीत जाने के बाद भी अभी आलू की बुवाई चल रही है। स्थिति यह है कि आलू की अगैती किस्मों की बुवाई ही समय से नहीं हो पाई है जिससे नया आलू समय से तैयार ही नहीं हो पाएगा। नोटबंदी के कारण आलू की बुवाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

जैसे-तैसे किया पैसे का इंतजाम तब...

बाराबंकी जिले के तिवारीपुरवा गांव के किसान रमाधीन सिंह के खेतों में आलू की अभी बुवाई चल रही, जबकि 10 दिन पहले ही बुवाई होनी थी। उनका कहना है कि जब से नोटबंदी हुई है, उसके बाद से वह 12 दिन से बैंक का चक्कर ही लगा रहे थे। किसी तरह सोमवार को पैसा का इंतजाम हुआ तो आलू की बुवाई शुरू किए हैं।

कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था करने की जरूरत

यह अकेले सिर्फ इनका हाल नहीं है, बल्कि प्रदेशभर के जिलों का ऐसा ही हाल है। गोरखुपर जिले के जिगिनाबाबू गांव निवासी राम आसर मौर्या अपने गांव के बड़े आलू किसान हैं। उनका कहना है कि इस बार आलू की बुवाई के लिए मौसम भी अनुकूल था, लेकिन तय समय से कोल्ड स्टोरेज से आलू की बीज नहीं निकल पाए जिसके कारण आलू की बुवाई पिछड़ गई। सरकार को कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था को ठीक करने की जरुरत है। प्राइवेट कोल्ड स्टोरज मालिक किसानों को परेशान करते हैं।

आलू विकास नीति से भी नहीं मिल पा रहा फायदा

उत्तर प्रदेश में नगदी फसल आलू के उत्पादन को बढ़ावा देने और इससे जुड़े किसानों की सहायता के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू विकास नीति 2014 लागू किया है। इस नीति में आलू की खेती के लिए गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन कराना, आलू की खेती को गुणवत्तायुक्त उत्पादन को प्रोत्साहित करना और आलू खेती की आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना शामिल है। साथ ही सरकार की तरफ से आलू किसानों को गुणवत्तायुक्त आलू बीज उपलब्ध कराने से लेकर उसकी सिंचाई की व्यवस्था के लिए अनुदान और सहायता शामिल है। लेकिन सरकार की यह नीति आलू किसानों को बढ़ावा देने में नाकाफी साबित हो रही है। उत्तर प्रदेश में 1651 कोल्ड स्टोरेज हैं, जहां पर 124.99 लाख मीट्रिक टन आलू के स्टोर करने की क्षमता का दावा किया जाता है। लेकिन इतना स्टोर हो नहीं पाता। किसानों की मांग है कि जबतक कोल्ड स्टोर की संख्या और क्षमता नहीं बढ़ाई जाती तबतक यह समस्या रहेगी।

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