इस साल गेहूं की होगी रिकार्ड पैदावार!

इस साल गेहूं की होगी रिकार्ड पैदावार!प्रतीकात्मक फोटो।

लखनऊ। धान की कटाई करने के बाद गेहूं उगाने वाले किसानों के लिए बहुत अच्छी खबर है। सालों बाद किसानों को मौसम और तापमान का ऐसा साथ मिल रहा है जो गेहूं की रिकार्ड पैदावार करने में सहायक होगा। रबी की मुख्य फसल माने जाने वाले गेहुं की बुवाई का समय 15 नवंबर से शुरू हो रहा है। बीते सालों के मुकाबले इस साल नवंबर महीने में तापमान में काफी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे मौसम में नमी है। यह गेहूं की बुवाई के लिए उपयुक्त है। भारतीय मौसम विज्ञान ने जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसके मुताबिक गेहूं उत्पादक उत्तर भारत के विभिन्न जगहों का औसत तापमान न्यूनतत जहां 14 डिग्री सेल्सियस है, वहीं अधिकत तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। तापमान में हर दिन गिरावट भी दर्ज की जा रही है।

किसान शुरू करें गेहूं की बुवाई

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के तकनीकी अधिकारी मौसम राजवीर सिंह ने बताया कि इस साल नवंबर के पहले सप्ताह ही तापमान में गिरावट के साथ ही हल्की ठंड पड़ने लगी है। आने वाले 10 दिनों में अधिकतम तापमान 17 से 22 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 7 से 9 डिग्री रहने का अनुमान है। यह तापमान रबी की फसलों खासकर गेहूं के लिए बहुत ही सटीक है। उन्होंने उत्तर भारत के किसानों के लिए परामर्श जारी करते हुए कहा है कि गेहूं की बुवाई के लिए यह तापमान अनुकूल है। इसलिए किसान 15 नवंबर तक खेत तैयार करके गेहूं की बुवाई शुरू कर दें।

किसानों को मौसम का उठाना चाहिए फायदा

भारतीय गेहूं एंव जौ अनुसंधान संस्थान करनाल हरियाणा के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डा रतन तिवारी ने बताया कि पिछले कुछ सालों से क्लाइमेंट चेंज और बढ़ते तापमान का असर फसलों पर पड़ रहा है। कुछ सालों से गेहूं की बुवाई के सीजन नवंबर में तापमान अनुकूल नहीं रहने से गेहूं की पैदावार प्रभावित रही है। इस साल नवंबर महीने में जो तापमान रिकार्ड किया जा रहा है, उससे लगता है कि 15 नवंबर के बाद तापमान में भारी गिरावट होगी और यह गेहूं की बुवाई के लिए अच्छा रहेगा। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में नवंबर में तापमान में अधिक रहता था जिससे किसान गेहूं की बुवाई लेट करते थे। इससे गेहूं में बाली लेट आती थी और उस समय तापमान अधिक होने से वह जल्दी सूख भी जाती थी। इससे पैदावार पर असर पड़ता था। उन्होंने बताया कि गेंहू के लिए जो उपयुक्त तापमान है उसका फायदा किसानों को उठाना चाहिए। धान की कटाई के बाद जो खेत खाली हुए हैं उसमें गेहूं की बुवाई के लिए तैयारी शुरू कर दें। खासकर बीज और खाद का विशेष ध्यान रखें।

तब फसलों को पहुंचता है फायदा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक फसल डा जीत सिंह संधू कहना है कि तापमान में गिरावट से गेहूं की फसलों को फायदा पहुंचता है। तापमान अगर अधिक रहता है तो तय समय से पहले की गेहूं में बालियां निकल आती हैं। इनमें भरपूर दाने लगने से पहले ही यह पक भी जाती हैं, जिससे गेहूं की पैदावार घट जाती है। इस साल उत्तर भारत में 15 नवंबर से लेकर 30 नंवबर तक गेहूं की बुवाई का उपयुक्त समय घोषित किया गया है। इस दौरान तापमान भी अनुकूल है। जिसका फायदा किसानों के साथ ही कृषि पैदावार पर पड़ेगा और सरकार के घोषित लक्ष्य से अधिक गेहूं उत्पादन हो सकता है।

किसान गेहूं की बुआई तुरंत शुरू करें, फायदे में रहेंगे

राजशेखर मिश्र

नई दिल्ली। गेहूं की अच्छी फसल के लिए ज्यादा ठण्ड का होना बहुत ही जरुरी होता है। यह ठण्ड जितने ज्यादा दिनों तक बरकरार रहेगी, गेहूं की पैदावार उतनी ही अधिक होगी और बेहतर होगी। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ राजवीर यादव ने आज गाँव कनेक्शन से विशेष बातचीत करते हुए यह कहा।

तापमान का फसल पर पड़ता है असर

उन्होंने यह भी कहा कि मौसम का अच्छा या खराब होना भी फसल के अच्छे होने और ख़राब होने से पूरा सम्बन्ध रखता है। अगर ठण्ड ठीक नहीं पड़ती है तो इससे गेहूं की फसल के ख़राब होने का भी पूरा अंदेशा हो जाता है। यही नहीं, अगर समय से पहले गर्मी शुरू जो जाए तो भी गेहूं की फसल खराब हो जाती है। इस साल यही तो हुआ है। गर्मी पहले पड़ गयी, देख लीजिये गेहूं की फसल का क्या हो गया? खराब हो गयी न।

एक सवाल के जवाब में डॉ यादव ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि वैसे तो गेहूं की बुआई के लिये 23 डिग्री का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। अपने देश में सामान्यतया 15 नवम्बर से गेहूं की बुआई शुरू होती है। लेकिन अगर हमारे किसान गेहूं की फसल अच्छी चाहते हैं तो उन्हें अभी से ही बुआई शुरू कर देनी चाहिए। इससे फसल को ठण्ड का समय भी ज्यादा मिल जाएगा और गर्मी शुरू होने से पहले ही उनकी फसल भी पूरी तरह से तैयार भी जायेगी। उन्हें अब समय नहीं गंवाना चाहिए और बुआई तुरंत शुरू कर देनी चाहिए।

दिल्ली के आसापास के क्षेत्रों में आजकल धुंध का सा मौसम है, इससे गेहूं की बुआई पर फर्क तो न पड़ेगा ? इस सवाल के जवाब में डॉ यादव ने कहा कि ये धुंध नहीं है। पराली का धुआं है। यह जल्द छंट जाएगा।नहीं भी छंटेगा तो भी इससे गेहूं की बिजाइ पर कोई भी फर्क बिलकुल भी नहीं पड़ेगा।

इस साल गेहूं की पैदावार कैसी रहने की उम्मीद है? इस पर डॉ यादव ने साफ़ कहा कि सब कुछ मौसम पर निर्भर करता है। वैसे भी अभी का मौसम सामान्य से चार डिग्री ज्यादा चल रहा है। आगे का पता नहीं किस करवट बैठता है मौसम। मौसम की अंगड़ाई ही तो खेती का नाश भी कर देती है और मालामाल भी बना देती है। सब कुछ मौसम पर ही तो निर्भर रहता है।

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