World Food Day वे पांच फसलें जिनसे भरता है आधी से ज़्यादा दुनिया का पेट

World Food Day वे पांच फसलें जिनसे भरता है आधी से ज़्यादा दुनिया का पेटइन अनाजों व सब्जियों पर दुनिया की आधे से ज़्यादा आबादी निर्भर है।

पूरी दुनिया में हज़ारों तरह की फसलें होती हैं लेकिन उनमें से कुछ चुनिंदा हैं जिनसे आधी से ज़्यादा दुनिया का पेट भरता है। इनमें से कुछ फसल हम सीधे खाते हैं और कुछ से बने अन्य उत्पाद हमारे काम आते हैं। नेशनल ज्योग्राफिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन अनाजों व सब्जियों पर दुनिया की आधे से ज़्यादा आबादी निर्भर है।

मक्का

दुनिया में सबसे ज़्यादा खाई जाने वाली फसल है मक्का। पॉप कॉर्न, स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, कॉर्न फ्लेक्स, मक्के का आटा जैसे तमाम तरह से दुनिया भर में लोग मक्के का प्रयोग करते हैं। मक्के को मूल रूप से मध्य अमेरिका की फसल माना जाता है और इसे सन 1400 में अमेरिका से यूरोप ले जाया गया। सिर्फ अमेरिका और यूरोप में ही नहीं इसकी खेती लगभग पूरी दुनिया में होती है क्योंकि ये एक ऐसी फसल है जो लगभग हर तरह की जलवायु वाले क्षेत्र में हो सकती है।

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पीला मक्का और स्वीट कॉर्न को जहां ज्‍़यादातर इंसान खाते हैं वहीं सफेद मक्का पशुओं को खिलाने के लिए उगाया जाता है। विश्व में मक्के के उत्पादन में अमेरिका सबसे आगे और उसके बाद चीन व ब्राज़ील का नंबर आता है। एल्यूमिनियम, बैटरियों, प्रसाधन सामग्री, विस्फोटक, इंक, कीटनाशक, इन्सुलेशन, कार्डबोर्ड, कालीन, वॉलपेपर और टूथपेस्ट जैसे कई उत्पादों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

धान

एशिया के लोग खाने में मुख्य रूप से चावल का इस्तेमाल करते हैं और अंटार्कटिका को छोड़कर दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में धान का उत्पादन होता है। दुनिया की आधी आबादी का पेट चावल भरता है और यह मक्के के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे मुख्य अनाज है। दुनिया में धान की लगभग 40 हज़ार प्रजातियां हैं। चावल को ज़िंदगी और जननक्षमता का संकेत माना जाता है इसलिए दुनिया के कई हिस्सों में शुभ काम में चावल का इस्तेमाल होता है और शादियों में दूल्हा - दुल्हन पर चावल फेंके जाते हैं। नेशनल ज्योग्राफिक के मुताबिक, धान का उत्पादन लगभग 5000 ईसा पूर्व शुरू हुआ था। हालांकि यह अभी तक पता नहीं चल पाया है कि धान मूलत: कहां की फसल है। कुछ लोगों का कहना है कि धान सबसे पहले चीन में उगाया गया तो कुछ का कहना है कि यह सबसे पहले भारत में उगाया गया।

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गेहूं

सतही खेती के मामले में गेहूं दुनिया में सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली फसल है। ऐसा माना जाता है कि इराक़ की टिग्रिस नदी घाटी में सबसे पहले गेहूं की खेती की गई थी और cereal (अनाज) शब्द का प्रयोग भी सबसे पहले गेहूं के लिए ही किया गया था। इसकी उत्पत्ति रोम की देवी ceres के नाम से मानी जाती है, ऐसी मान्यता है कि रोम की देवी ceres गेहूं की फसल की सुरक्षा करती थीं। गेहूं दुनिया में वनस्पति प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत है।

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आलू

आलू की खेती सबसे पहले दक्षिणी अमेरिका में की गई इसके बाद ये यूरोप में पहुंचे। दुनिया में मक्का, चावन और गेहूं के बाद सबसे ज़्यादा लोग आलू का इस्तेमाल खाने में करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2008 में दुनिया में 3140 लाख टन आलू का उत्पादन पूरी दुनिया में हुआ था। दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग आलू पर इतना निर्भर हैं कि इसकी कमी लोगों के लिए कृषि आपदा से सामाजिक आपदा बन जाती है। 1845 से 1852 के बीच आयरलैंड में आलू का अकाल हो गया जिससे दस लाख लोग मर गए और लगभग दस लाख लोग ही खाने और काम की तलाश में देश छोड़ कर चले गए। इसे आयरलैंड के महान अकाल के नाम से भी जाना जाता है।

सोयाबीन

सोयाबीन का सबसे ज़्यादा उत्पादन एशिया में होता है। आर्थिक लाभ के लिए उगाई जाने वाली सभी फसलों में से सोयाबीन ऐसी फसल है जिसमें सबसे ज़्यादा प्रोटीन होता है। दुनिया के कई हिस्सो में ऐसा भी माना जाता है कि जो लोग मांस का सेवन नहीं करते उनके लिए ये एक विकल्प की तरह होता है। कई पश्चिमी देशों में सोयाबीन का दूध और टोफू (पनीर) भी मुख्य रूप से इस्तेमाल में लाया जाता है, अब तो भारत में भी इसका अच्छा खासा बाज़ार हो गया है। चीनी खाने में सोयाबीन का फर्मेंटेशन करके बनाए गए सोया सॉस का प्रयोग होता है। यही नहीं दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वनस्पति तेल में भी सोयाबीन सबसे आगे है।

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