दूध उत्पादकों को तोहफा: ये मशीन नहीं खराब होने देगी दूध, बिना बिजली करेगी काम 

दूध उत्पादकों को तोहफा: ये मशीन नहीं खराब होने देगी दूध, बिना बिजली करेगी काम इस उन्नत चिलिंग यूनिट में 20 उत्पादक एक साथ दूध स्टोर कर सकते हैं। फोटो- प्रोमीथियन पावर चिलर

स्वयं डेस्क

अमेरिका से आए दो आदमियों ने भारत के दूध उत्पादक किसानों की एक बहुत बड़ी समस्या सुलझा दी। भारतीय दूध उत्पादक प्रतिदिन करीब 10 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन करते हैं। इस दूध को ठंडा कर पाने की सुविधा गाँवों में बसे अधिकतर उत्पादकों के पास नहीं होती। इसलिए कई बार गाँव से दूर स्थित कलेक्शन सेंटर या शहरी प्रोसेसिंस यूनिट तक भेजते-भेजते दूध खराब हो जाता है और उत्पादक को एक भी पैसा नहीं मिलता।

अमेरिकी आविष्कारकों सोरिन ग्रामा और सैम व्हाइट ने जब भारत के लोगों की इस समस्या को समझा तो एक चिलिंग यूनिट यानि दूध ठंडा करने की मशीन का आविष्कार किया।

प्रोमीथियन पावर मिल्क चिलर के आविष्कारक रिन ग्रामा और सैम व्हाइट।

थर्मल बैटरी से चलने वाली ये मशीन गाँव की आती-जाती बिजली में भी आसानी से चार्ज होकर चल जाती है।

प्रोमीथियन पावर सिस्टम कंपनी के तहत बनाई गई इस मशीन का जब इन आविष्कारकों ने गाँवों में पाइलट परीक्षण किया तो उत्पादकों के साथ उन्हें सफलता मिली। वर्तमान समय में देशभर में करीब 200 ऐसी चिलिंग यूनिट ग्रामीण दूध उत्पादक इस्तेमाल कर रहे हैं।

खास तरह की बैटरी का इस्तेमाल

प्रोमीथियन पावर कंपनी के चिलर में लगी थर्मल बैटरी एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करती है जिसमें वो बिजली नहीं ऊर्जा बचाती है। इसकी बैटरी में एक पदार्थ होता है जो ठोस से तरल और फिर तरल से ठोस होकर रूप बदलता है।

इस पूरी चिलिंग यूनिट को तीन मुख्य भागों को मिलाकर बनाया जाता है। इसमें एक टैंक होता है जिसमें दूध भरा जा सके। एक थर्मल बैटरी और एक कंप्रेसर होता है।

एक चिलिंग यूनिट को करीब 20 किसान आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।

भारत आकर बैंगलोर के ग्रामीण दूध उत्पादकों की समस्याएं सुनने के बाद किया मशीन का आविष्कार।

कैसे काम करती है यूनिट

इस यूनिट के साथ लगा एक कंट्रोल पैनल दूध के तापमान के आधार पर ये संकेत भेजता है कि सिस्टम को शुरू कर देना है। सौर ऊर्जा या फिर कुछ घंटों आई बिजली से ही यूनिट का कंप्रेसर बैटरी को चालू कर देता है जिससे बर्फ जम जाती है। इस बर्फ की ठंडक को दूध को ठंडा करने के लिए धीरे-धीरे भेजा जाता है। आवश्यक तामपान पर पहुंचते ही दूध को ठंडक भेजना बंद कर दिया जाता है।

अब एक बार दूध ठंडा हो जाने के बाद उसे आराम से बर्तनों में भरकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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