पशुपालक भी सीख रहे हैं बायोगैस से बिजली बनाना

Diti BajpaiDiti Bajpai   25 April 2017 3:18 PM GMT

पशुपालक भी सीख रहे हैं बायोगैस से बिजली बनानासुरेन्द्र सिंह देते हैं पशुपालकों को प्रशिक्षण।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। किसानों के साथ अब पशुपालक भी बायोगैस की उपयोगिता को समझ रहें हैं और स्वयं ही बिजली उत्पादन करने का फैसला कर रहें हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पशुपालक इसके लिए बायोगैस केन्द्र पर प्रशिक्षण ले रहें हैं कि वे किस तरह से स्वयं ही बिजली बनाने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

लखनऊ निवासी सुरेन्द्र सिंह (55 वर्ष) ने अपने गाँव में मॉडल बायोगैस केन्द्र बनवाया है। इसकी मदद से वो खुद तो बिजली का उत्पादन कर ही रहे हैं साथ ही सैंकड़ों पशुपालकों को प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। साल 2008 में लखनऊ जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर सरोजनी नगर के मुल्लाहीखेड़ा गाँव में ‘यूनीसेफ और बायो एनर्जी मिशन सेल नियोजन’ विभाग की ओर से ‘ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन-शोध प्रयोग प्रशिक्षण केन्द्र’ की शुरुआत की गई थी।

खेती किसानी से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

केन्द्र के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह बताते हैं, “यहां पर साल भर पशुपालक प्रशिक्षण लेने आते हैं, प्रशिक्षण के लिए आए किसानों के ठहरने का बंदोबस्त यहीं पर किया जाता है। इसके साथ ही किसानों को बायो गैस संयत्र लगाने के लिए विभाग से मिलने वाली सब्सिडी से जुड़ी सभी तरह की जानकारी दी जाती है।”

कृषि विभाग की तरफ से बायो गैस प्लांट प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। एक प्लांट पर नौ हजार रुपए और एससी किसान को 11 हजार रुपए सब्सिडी दी जा रही है। सामान्य किसान को छह घन मीटर का यह प्रोजेक्ट मात्र 26 हजार रुपए और एससी किसान को 24 हजार रुपए का पड़ेगा। सुरेंद्र बताते हैं, “अभी हमारे पास 10 दस गाय हैं जिनसे 2000 किलो गोबर मिलता है। इससे पांच केवीए का जनेरेटर चलता है और गैस का भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। अभी इस प्लांट से सात से आठ घंटे बिजली मिलती है।”

ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन-शोध प्रयोग प्रशिक्षण केन्द्र।

यूपी नेडा 2-4 घनमीटर बायोगैस प्लांट लगाने के लिए 8000 रुपए की सब्सिडी देता है। चार घन मीटर के प्लांट 22 हजार की सब्सिडी देता है। इसमें गोबर गैस से रौशनी कुकिंग गैस एवं उत्तम किस्म की खाद भी मिलती है।

बॉयोगैस (मीथेन या गोबर गैस) मवेशियों के उत्सर्जन पदार्थों को कम ताप पर डाइजेस्टर में चलाकर माइक्रोब उत्पन्न करके बनाई जाती है। इस गैस में 75 प्रतिशत मिथेन गैस होती है जो बिना धुंआ पैदा किए जलती है। लकड़ी, चारकोल और कोयले से उलट यह जलने के बाद राख जैसे कोई अपशिष्ट भी नहीं छोड़ती हैं।

देश में लगभग 45.5 लाख बायोगैस संयंत्र लगाए गए

देश ने वैकलपिक ऊर्जा के विकास पर काम कर रही संस्था नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 45.5 लाख बायोगैस संयंत्र अभी तक लगाए जा चुके हैं। इसमें आने वाले दो वर्षों में एक करोड़ नए संयंत्रों को लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top