हर खेत तक पहुंचेगा पानी, बनाए जाएंगे 3383 खेत तालाब

हर खेत तक पहुंचेगा पानी, बनाए जाएंगे 3383 खेत तालाब2016-17 में बुंदेलखंड के 7 जिलों में 2000 खेत तालाब का किया जा चुका है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के 197 ब्लाक में भू-जल नाजुक स्थिति में पहुंच गया है। ऐसे में यहां पर अगर आने वाले वर्षा जल को संरक्षित नहीं किया गया तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इस स्थति को देखते हुए उत्तर प्रदेश में वर्षा जल संचयन को लेकर खेत तालाब योजना का विस्तार किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश के 44 जिलों में 3383 खेत तालाब का निर्माण किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने यह जानकारी दी। ग्रामीण विकास विभाग और कृषि विभाग इसके लिए मिलकर काम करेंगे।

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प्राकृतिक आपदा और सूखे की मार से बुंदेलखंड को बचाने के लिए पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार ने साल 2016 में बुंदेलखंड से खेत तालाब योजना की शुरूआत की थी। इस योजना के पहले चरण में साल 2016-17 में बुंदेलखंड के 7 जिलों में 2000 खेत तालाब का किया जा चुका है निर्माण। खेत तालाब योजना से बुंदेलखंड में पानी की समस्या दूर होने के साथ ही यहां पर खेती को भी बढ़ावा मिला। फसलों की सिंचाई के लिए खेत में स्थित तालाब का किसानों ने उपयोग करके अच्छी उपज ले रहे हैं। बुंदेलखंड के सात जिलों पिछले एक दशक में 4 हजार से ज्यादा तालाब गायब हो चुके थे। जिसके कारण बुंदेलखंड में पीने के पानी से लेकर सिंचाई के लिए पानी का अभाव हो चुका था, लेकिन खेत तालाब योजना से बरसात का पानी बचाकर यहां पर पानी की कमी को दूर किया गया।

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उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद में गुरूवार कोमौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह (क्रॉप वेदर वॉच गु्रप) की नवीं बैठक में बताया गया कि अभी तालाब निर्माण का उपयुक्त समय है जो किसान नये तालाब बनाना चाहते हों या अपने तालाब का सुधार कार्य कराना चाहते है वे 20 जून तक निर्माण कार्य पूरा करा लें।

प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त चन्द्र प्रकाश ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह वाटर हार्वेस्टिंग और ग्राउंड वाटर रिचार्ज के संबंध आम लोगों को जागरुक करें। सिंचाई, लघु सिंचाई एवं ग्राम्य विकास विभाग अधिक से अधिक तालाबों को चिन्हित कर उसे बरसात से पहले गहरीकरण का काम पूरा कर लें। जिससे कि तालाबों में वर्षा ऋतु का अधिक से अधिक संचय किया जा सके। भूगर्भ जल स्तर बढ़ सके एवं सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके।

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