संसाधनों की कमी से प्रभावित हो रही गेहूं कटाई 

संसाधनों की कमी से प्रभावित हो रही गेहूं कटाई किसानों को किराए पर थ्रेशर मशीन लेकर गेहूं कटाई करवानी पड़ रही है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

रायबरेली। प्रदेश में गेहूं कटाई शुरू हो गई है पर गाँवों में संसाधनों की कमी के कारण किसानों को किराए पर थ्रेशर मशीन लेकर गेहूं कटाई करवानी पड़ रही है। मशीन से कटाई करवाने के लिए किसानों के दिन बांटे गए हैं। इससे जिन किसानों की फसल पक कर तैयार है, उन्हें भी कटाई के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है।

रायबरेली जिले के दीनशाह गौरा ब्लॉक के सुल्तानपुर जनौली गाँव के किसान ज्ञान बहादुर सिंह (61 वर्ष) के पास डेढ़ बीघे गेहूं की फसल पककर तैयार है, लेकिन गेहूं कटाई के लिए मशीन उनके खेत में पांच दिन बाद लगेगी। इससे उन्हें अपनी फसल की कटाई के लिए और इंतज़ार करना पड़ रहा है।

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अपने खेत की तरफ हाथ दिखाते हुए ज्ञान बहादुर बताते हैं, “गाँव में अब मजदूर रखकर कटाई कोई नहीं करवाना चाहता है। गाँव में दो लोगों के पास थ्रेशर मशीन है, जिससे दिन के हिसाब से लोग गेहूं कटवाते हैं।”

खेती में समय के साथ-साथ पैसे बचाने के लिए किसान आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग कर रहे हैं। गाँवों में बड़ी जोत वाले किसानों को इन उपकरणों की मदद से जल्द लाभ मिल जाता है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण ज्ञान बहादुर जैसे हज़ारों छोटे किसानों को समय से फसल का लाभ नहीं मिल पाता है। जिले के सतांव ब्लॉक के किसान लाल चौधरी (43 वर्ष) के पास चार बीघा गेहूं की फसल है। हाल ही में उन्होंने 20 कुंतल गेहूं सरकारी क्रय केंद्र पर बेचा है।

जिन लोगों ने दो-तीन दिन पहले क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेचा था, उन्हें तुरंत भुगतान हो गया। हमने थ्रेशर किराए पर लेकर कटाई करवाई है, इसलिए देर से फसल बेच पाएं। हमें चेक मिला है, ग्रामीण बैंक में चेक लगाने पर हफ्तेभर बाद पैसा मिलेगा।
लाल चौधरी, किसान

सरकार ने इस वर्ष व्यापक तौर पर गेहूं खरीद को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 48 घंटों के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं खरीद में 3.3 करोड़ टन से अधिक गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष सरकार ने 2.2 करोड़ टन खरीद की थी। इस वर्ष होने वाली खरीद पिछले वर्ष की तुलना में करीब 30 फीसदी ज़्यादा है।

जिले के मुंशीगंज क्षेत्र में पिछले वर्ष गेहूं की बंपर पैदावार हुई थी। यहां के करीब 80 फीसदी किसान गेहूं कटाई के लिए कंबाइन या फिर थ्रेशर मशीन पर निर्भर हैं। मुंशीगंज क्षेत्र के मधुपुरी गाँव के किसान शंकर सिंह (46 वर्ष) को थ्रेशर मशीन किराए पर लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। शंकर ने बताया, “इस समय लगभग सभी गाँवों में गेहूं कटाई चल रही है। इसलिए थ्रेशर मशीन भी किराए पर आसानी से नहीं मिल पा रही है।”

  • फसल पकने के बावजूद एक निश्चित दिनपर खेत पर जाती है थ्रेशर मशीन
  • रायबरेली के 80 फीसदी किसान गेहूं कटाई के लिए कंबाइन या फिर थ्रेशर मशीन पर हैं निर्भर

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