यूपी में 15 अप्रैल से शुरु होगी गेहूं की खरीद, सरकार ने कहा तैयारियां पूरी, किसान इन बातों का रखें ध्यान

Arvind ShuklaArvind Shukla   11 April 2020 7:37 PM GMT

यूपी में 15 अप्रैल से शुरु होगी गेहूं की खरीद, सरकार ने कहा तैयारियां पूरी, किसान इन बातों का रखें ध्यान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 5000 खरीद केंद्रों के माध्यम से सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (1925 रुपए प्रति कुंतल) पर गेहूं खरीद करेगी। खरीद 15 अप्रैल से शुरु होगी, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। खरीद केंद्रों पर बारदाना (बोरे) पहुंचाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के अपर प्रमुख सचिव गृह व सूचना अवनीश अवस्थी ने कहा कि मंडियों में 15 तारीख से गेहूं की खरीद होगी।

उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से होनी थी लेकिन कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन से अब गेहूं खरीद 15 दिन देरी से शुरु हो रही है। यूपी सरकार ने 55 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है, जो खाद्य एवं रसद विभाग के साथ 10 विभागीय एजेसिंयों के माध्यम से होगी। सबसे ज्यादा खरीद केंद्र 3210 यूपी सहकारी संघ के होंगे जबकि 650 केंद्र खाद्य एवं रसद विभाग के होंगे। सरकार ऑनलाउन पंजीकरण कराने वाले किसानों का ही गेहूं खरीदेगी। किसान खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

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गेहूं खरीद केंद्रों के लिए बोरे (बारदाना) भेजते यूपी में सीतापुर मंडी के पल्लेदार। फोटो- अरविंद शुक्ला

किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए राजधानी में प्रदेश स्तरीय कंट्रोल रूप में बनाया गया है, जहां किसान टोल फ्री नंबर 18001800150 के जरिए गेहूं खरीद के संबंध में शिकायतें दर्ज करा सकते है।

सरकार ने लॉकडाउन में किसानों को कृषि कार्य में छूट दे रही है। लेकिन इस दौरान खेतों में भी एक दूसरे से 5 फीट की दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) का ध्यान रखने, समय-समय पर हाथ धोने की सलाह दी है। इसके साथ ही सरकार ने किसानों से कहा है कि वो कंबाइन के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा हार्वेटिंग करवाएं। लेकिन लॉकडाउन में किसानों को कंबाइन संचालन और मजूदरों की दिक्कत की लगातार समस्या रही है।

देश के बाकी राज्यों की तरह यूपी में भी मंडियां सूनी पड़ी हैं। सरकारी खरीद में देरी हुई हैं और निजी आढ़तियों तक अनाज नहीं पहुंच पा रहा है। जिसकी एक बड़ी वजह कटाई में देरी है। उत्तर प्रदेश में सीतापुर अनाज मंडी में आढ़ती और ट्रैडर्स एसोशिएसन के महामंत्री विनय गुप्ता बताते हैं, "पिछले साल की अपेक्षा 10 अप्रैल तक हमारे यहां सिर्फ 5 से 20 फीसदी ही गेहूं आ रहा है। क्योंकि किसान मंडी तक पहुंचने, ट्रैक्टर ट्राली आदि में मरम्मत में दिक्कत आती है। दूसरी समस्या ये है मैदे की डिमांड नहीं है। फ्लोर मिल बंद पड़ी हैं, सिर्फ आटा चक्की चल रही हैं। आढ़तियों को भी आने जाने में दिक्कत है।"

लखनऊ के दैनिक अख़बारों में छपी खबर के मुताबिक यूपी में मंडी परिषद के निदेशक जेपी सिंह ने कहा कि कटाई में देरी के कारण आवक कम है। प्रदेश में 10 अप्रैल तक सिर्फ 2,23,355 क्विंटल गेहूं ही मंडियों में पहुंचा है।

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यूपी के अपर प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी ने कहा- फसल कटाई के लिए कंबाइन मशीनों की आवाजाही में छूट है, कृषि संबंधित मशीनों की दुकानें खुलेंगी और गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से होगी।

11 अप्रैल को मीडिया से बात करते हुए अपर मुख्य सचिव गृह एवं सूचना अवनीश अवस्थी ने बताया कि रबी की फसल की कटाई और मड़ाई का कार्य बहुत तेजी से हो रहा है। यंत्रों (कंबाइन) के संचालन के लिए एक चालक और चार मजदूरों की अनुमति दी गई है। अब तक तिलहन में 99%, दलहन में 90%, गेहूं और जौ की कटाई में भी काफी हद तक प्रगति हुई है।"

उन्होंने आगे कहा कि किसानों की सुविधा के लिए कृषि से सम्बंधी उपकरणों की दुकानों को खोला गया है। फसल में आग लगने की शिकायतें इस बार कम मिली है, फिर भी 60 नए फायर टेंडर्स (दमकल) क्षेत्रों में भेजी गई हैं।

उन्होंने ये भी कहा कि अब तक प्रदेश के 185 लाख किसानों को पीएम किसान योजना के 2000 रुपए की पहली किस्त जारी की जा चुकी है। ये रकम करीब 3700 करोड़ होती है। कृषि विभाग के मुताबिक यूपी में सक्रिय क्रेडिट कार्ड 148.55 लाख हैं, जिनकी फसली ऋण चुकाने के लिए अंतिम तिथि अब 31 मई, 2020 तक बढ़ा दी गई है।

सरकार से किसानों से अपील कि वो खेत में भी चेहरे पर मास्क या अंगौछा (गमछा) जरुर लगाएं। अनाज के ढेर छोटे रखें। नियमित रुप से अपने हाथ धोते रहे।

उत्तर प्रदेश में मार्च के महीने में हुई बारिश और ओलावृष्टि से 75 में 74 जिलों में गेहूं, आलू, सरसों और सब्जियों की फलों को नुकसान हुआ था। यूपी सरकार द्वारा 19 मार्च को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 60 जिलों में 92.91 लाख हेक्टेयर में फसल बोई गई थी, जिसमें से 12.96 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई थी।


लॉकडाउन में किसानों के लिए क्या हो रहा है

कंबाइन मशीन एक जिले से दूसरे जिले में जा सकती है। कंबाइन, ट्रैक्टर, थ्रेसर से जुड़े कंपोनेंट की दुकानें खुलेंगी और किसान को आवागमन में रोका नहीं जाएगा।

खाद, बीज और पेस्टीसाइड के लिए निजी और सरकारी केंद्रों से उपलब्धता कराई जा रही है। कृषि निवेशों के आवागमन में परिवहन की भी अनुमति है।

यूपी में फूड सप्लाई के लिए सरकार के मुताबिक 841 आटा मिल, 417 तेल मिल एवं 231 दाल मिलें चल रही हैं।

ट्रैक्टर कंपनी मदद को आई सामने

ट्रैक्टर कंपनी टैफे अपने 3000 मैसी फर्ग्यूसन और आयशर ट्रैक्टर और ट्रैक्टर उपकरण0 मुफ्त रेंटल योजना के तहत

किसानों को मुफ्त में सेवाएं देगी। ये सुविधा 16 जिलों मे उपलब्ध है। किसान चयनित जिलों में अपने ऑर्डर जेफार्म सर्विसेज मोबाइल एप या फिर टोल फ्री नंबर 18002084242 पर बुक करा सकते हैं। पूरी ख़बर यहां पढ़ें-

गेहूं बेचने के लिए ( वर्ष 2020-21) इन बातों का जरुर ध्यान रखें...

  • सरकार उन्हीं किसानों का गेहूं एमएसपी खरीदेगी, जिन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया होगा। (खाद्य एवं रसद विभाग की साइट देंगे)
  • पंजीकरण के लिए भूमि विवरण के साथ खसरा-खतौनी, खसरा संख्या और जमीन का रकबा और गेहूं का रकबा भी बताना होगा।
  • क्योंकि पैसा किसान के खाते में जाएगा इसलिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और राजस्व अभिलेख (खेत) संबंधी सही जानकारी दें।
  • इस वर्ष ओटीपी (O.T.P) आधारित पंजीकरण की व्यवस्था की गयी है, जिसके लिए किसानों को पंजीकरण के समय अपना वर्तमान मोबाइल नंबर ही डालना होगा, ताकि एसएमएस के जरिए मिली जानकारी को भरकर प्रक्रिया पूरी कर सकें।
  • 100 कुन्टल से अधिक विक्रय हेतु उपजिलाधिकारी से ऑनलाइन सत्यापन कराया जायेगा।
  • जो कृषक खरीफ विपणन वर्ष 2019 -20 में धान खरीद हेतु पंजीकरण करा चुके हैं, उन्हें गेहूं के लिए दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यता नहीं है, संशोधन कर या बिना संशोधन के पुनः लॉक कराना होगा।
  • गेहूं बेचने के वक्त पंजीयन प्रपत्र के साथ कम्प्यूटराइज़्ड खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र, बैंक के पासबुक के प्रथम पृष्ठ के छायाप्रति एंव आधार कार्ड साथ ले जाएं।


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