किसानों को दिवाली का तोहफ़ा कब?

किसानों को दिवाली का तोहफ़ा कब?फोटो- विनय गुप्ता

लखनऊ। केंद्र ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दीपावली तोहफा देते हुए दो प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का ऐलान किया है, लेकिन अपनी फसल का उचित दाम न मिलने वाले करोड़ों धान और गन्ना किसानों के हाथ इस बार भी दीपावली के त्यौहार में खाली ही हैं।

गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मूल का वेतन का दो प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का फैसला किया गया। यह एक जुलाई 2016 से लागू होगा। इससे करीब 50.68 लाख केंद्रीय कर्मचारियों तथा 54.24 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। इससे पहले, केंद्र सरकार ने इस साल मार्च में डीए छह प्रतिशत बढाकर 125 प्रतिशत कर दिया था। बाद में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन से महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिला दिया गया।

लखीमपुर के किसान दलजिंदर सिंह ने कहा, “अखबारों में रोज पढ़ रहे कि धान खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी 1510 रुपए प्रति क्विंटल पर होगी। डेढ़ सौ क्विंटल धान हुआ लेकिन केंद्र पर गया तो खरीद ही शुरू नहीं हुई। अब मजबूरी में हजार से 11 सौ रुपए में बेच रहे हैं।” वो आगे बताते हैं, “सरकार को हमारी दीपावली से क्या मतलब, केंद्रीय कर्मचारियों को हर बार तोहफा मिलता पर हम लोगों को न्याय ही मिल जाए तो इतना ही बहुत।”

ये हाल केवल धान किसानों का ही नहीं है। गन्ना किसानों के सामने भी बहुत सारी समस्याएं हैं। सबसे बड़ी समस्या ये है कि गन्ना किसानों की फसलों का बीमा नहीं होता। सरकार भले ही बीमा योजना का ढिंढोरा पीटती हो लेकिन फसल बीमा योजना में गन्ने की फसल को वर्गीकृत ही नहीं किया गया है तो इन्हें लाभ कैसे मिलेगा? उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग और गन्ना विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2013-14 में गन्ना किसानों को प्रति कुंतल 210 रुपए मिलता था जो एक साल बाद 10 रुपए बढ़ा दिया गया। लेकिन उसके बाद साल 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के लिए सरकार ने मात्र 230 रुपए की प्रति कुंतल ही रखा, इसमें एक भी रुपए की बढ़ोतरी नहीं की जिससे गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय होती जा रही है।

तीन वर्षों में गन्ने का मूल्य केवल बीस रुपए बढ़ा

प्रदेश में करीब 40 लाख गन्ना किसान हैं। एक तरफ जहां गन्ना किसानों को उत्पादन की लागत दिनों-दिन बढ़ती जा रही है वहीं गन्ने का मूल्य पिछले तीन साल में मात्र 20 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। गन्ना किसाना गन्ने के मूल्य को 450 रुपए प्रति कुंतल करने के लिए राज्यभर में आंदोलन कर रहे हैं। यह हालत तब है जब राज्य में गन्ना प्रमुख नगदी फसल है। यूपी के 44 से अधिक जिलों में इसकी व्यवसायिक खेती की जाती है। पूरे देश में गन्ने की जो खेती होती है उसका 50 प्रतिशत अकेले उत्तर प्रदेश में होता है।

यूपी में अभी तक धान खरीद भी नहीं हो पाई शुरू

उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार ने 2016-17 के लिए धान के समर्थन मूल्य का ऐलान पिछले दिनों किया। इस साल धान का समर्थन मूल्य 1470 रुपए प्रति क्विंटल है। एक अक्तूबर, 2016 से 28 फरवरी, 2017 तक राज्य एवं केन्द्र सरकार की एजेंसियों के माध्यम से धान खरीदा जाना है लेकिन अभी तक धान की खरीद की शुरुआत तक नहीं हो पाई वहीं दूसरी तरफ स्थित यह है कि पिछले तीन साल से धान का समर्थन मूल्य में मात्र 3.6 की बढ़ोत्तरी की गई है। साल 2014-15 में धान का समर्थन मूल्य 1360 था। 2015-16 में 1410 और साल 2016-17 के लिए 1470 रुपए किया गया है जबकि इन वर्षों में धान की फसल की लागत किसानें की 30 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिलने से गन्ना किसान निराश और हताश है। गन्ना पैदा करने की लागत किसानों की लगभग दोगुनी हो चुकी है लेकिन गन्ने का मूल्य पिछले तील साल से नहीं बढ़ा है। इसको लेकर हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन मिला है। चीनी मिलों में पेराई का काम ठप है और गन्ना किसान अच्छी पैदावार के बाद भी उचित मूल्य नहीं मिलने से परेशान हैं।
राकेश टिकैत, अध्यक्ष, भाकियू

ऊंट के मुंह में जीरा है डीबीटी

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की व्यवस्था पिछले दिनों लागू की गई। गन्ना आयुक्त विपिन कुमार द्विवेदी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अब गन्ना किसानों को कृषि यांत्र समेत दूसरे समानों की खरीद पर अनुदान की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी लेकिन यह गन्ना किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा है। क्योंकि एक तरफ जहां किस गन्ना किसानों को यह मिलेगा अभी तक गन्ना विभाग ने सर्वे नहीं किया हैं। वहीं यह राशि इतनी कम है कि उसका लाभ गन्ना किसानों नहीं मिल रहा है।

खुद गन्ना विभाग के अधिकारी भी दबे जुबान में इसे स्वीकार करते हैं लेकिन खुल कर नहीं बोलते हैं। प्रदेश के बड़े गन्ना किसान ओमपाल सिंह ने बताया, “गन्ना किसानों को कृषि यंत्र की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने की बात है लेकिन इसके लिए मात्र 10 हजार रुपए यंत्र का मूल्य होना चाहिए। जबकि गन्ना की खेती के लिए जो यंत्र आजकल बाजार में उपलब्ध हैं वह 50 हजार से लेकर लाखों रुपए तक हैं। ऐसे में इस सब्सिडी से किसानों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।”

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