कोल्ड स्टोरेज के बिना खाली ही रहेंगे किसान के हाथ

कोल्ड स्टोरेज के बिना खाली ही रहेंगे किसान के हाथकरोड़ों रुपए के हर साल किसानों के फल, सब्जियां और अनाज हो जाते हैं बर्बाद।

देश में किसानों की आमदनी पर बार-बार सवाल उठते आ रहे हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य भी तय किया है और बड़े सुधारों की योजना भी बनाई है। मगर गौर करने वाली बात यह है कि जिस देश में छोटे और सीमांत किसानों की ज्यादातर संख्या हो, उस देश में फसल की कटाई के बाद रखरखाव की स्थिति बेहतर न होने तक किसानों की आमदनी को दोगुनी तक पहुंचाना बड़ा सवाल रहेगा।

देश में कोल्ड स्टोरेज की संख्या बढ़े

फसल की कटाई के बाद किसानों की सबसे बड़ी समस्या रखरखाव की है। देश में जितने कोल्ड स्टोरेज हैं, उत्पादन को देखते हुए कोल्ड स्टोरेज की संख्या लगभग दोगुनी चाहिए। पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज न होने से हर साल बड़ी संख्या में फसल उत्पादन बर्बाद होते हैं और किसानों को फसल की लागत तक निकाल पाना मुश्किल होता है। सौमित्र चौधरी कमेटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 6500 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनकी 32 करोड़ टन कोल्ड स्टोरेज की मौजूदा क्षमता है, जबकि हालात यह है कि पूरे देश में 61 करोड़ टन कोल्ड स्टोरेज की जरुरत है, यानि लगभग दोगुनी।

रोका जा सकता है किसानों को होने वाला नुकसान

देश में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज से होने वाला नुकसान रोका जा सकता है। सौमित्र कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में किसानों के हर उत्पाद और फसल के सालाना नुकसान का पूरा ब्यौरा पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कोल्ड स्टोरेज न होने से सबसे ज्यादा नुकसान फल और सब्जी उत्पादक किसानों को उठाना पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार एक नजर डालते हैं कोल्ड स्टोरेज न होने से सालाना नुकसान के आंकड़ों पर…

  • देश में फल और सब्जियों के कुल उत्पादन का 15.88 फीसदी तक नुकसान कोल्ड स्टोरेज न होने की वजह से हो जाता है।
  • इसी तरह तिलहन फसलों में 9.96 फीसदी तक, दाल की फसलों में 8.41 फीसदी तक और अनाज में 5.99 फीसदी तक नुकसान होता है।
  • इसी तरह पोल्ट्री मीट में 6.74 फीसदी तक, अंडे में 7.19 फीसदी तक, मछली में 5.23 फीसदी तक और दूध में 0.92 फीसदी तक नुकसान होता है।

यह आंकड़े भी हैरान करने वाले

कृषि मंत्रालय की फसल अनुसंधान इकाई सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीफैट) ने फसलों की कटाई से लेकर खाद्य पदार्थों के बर्बाद किए जाने तक अपनी रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में सामने आया कि भारत में हर साल करीब 67 लाख टन के खाद्य पदार्थ भंडारण और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने से खराब हो जाते हैं। देश में 67 लाख टन के खाद्य पदार्थ हर साल बर्बाद होने पर यानि करीब 92,651 करोड़ रुपए का नुकसान सलाना होता है।

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बिजली समस्या भी बड़ा कारण

फेडरेशन ऑफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय समन्वयक भुवेश अग्रवाल ‘गाँव कनेक्शन’ से बातचीत में फोन पर बताते हैं, “एक तरफ जहां कोल्ड स्टोरेज की संख्या पूरे देश में कम है, वहीं दूसरी सबसे बड़ी समस्या बिजली कटौती भी है। बिजली कटौती की वजह से गाँव-देहात में बने कोल्ड स्टोर्स को सबसे ज्यादा दिक्कत है। बिजली न होने से ज्यादातर कोल्ड स्टोरेज बंद ही रहते हैं और ऐसे में सब्जियां और फल बर्बाद हो जाते हैं।“

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एक नजर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर

उत्तर प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज की संख्या पर गौर करें तो यूपी में कोल्ड स्टोरेज की संख्या कुल 2100 है। इन कोल्ड स्टोरेज में सबसे ज्यादा यानि 80 से लेकर 90 प्रतिशत तक आलू का भंडारण होता है। फेडरेशन ऑफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कोल्ड स्टोरेज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण सिर्फ उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत से ज्यादा फल और सब्जियां बर्बाद हो जाते हैं। ऐसे में टमाटर और प्याज के किसानों की फसल बर्बाद होने की स्थिति पर किसान अपनी फसल सड़क पर फेंकने को मजबूर होते हैं।

लगातार किया जा रहा है काम

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया, ''किसानों को सब्जियों का उचित दाम मिले, इसके लिए उत्तर प्रदेश में पैकेजिंग, मार्केटिंग और परिवहन की सुविधाओं को और विकसित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले, इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है।“

अब तक कितने बढ़े कोल्ड स्टोरेज

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, कोल्ड स्टोरेज की संख्या देश में बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से वर्ष 2013-14 में 31 कोल्ड स्टोरेज को फंड दिया गया, वही यह संख्या 2014-15 में 46 और 2015-16 में 49 पहुंची है। वहीं 2016-17 में जुलाई, 2016 तक यह आंकड़ा 25 था, यानि 25 कोल्ड स्टोरेज को फंड दिया गया है।

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जब किसानों की आमदनी का हुआ सर्वे

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन यानि एनएसएसओ हर दस साल में किसानों की आमदनी का सर्वेक्षण करती है। वर्ष 2012-13 में हुए सर्वे में सामने आया कि किसानों की आय 2002-03 में 2,115 रुपए प्रति महीना थी, जो दस साल बाद बढ़कर 6,426 रुपए मासिक हो गई। इन दस सालों में किसानों की आय में 11.7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई। मीडिया में आई खबरों के अनुसार, अब 2022 में किसानों की आय को दोगुनी के लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार अब किसानों की आमदनी पर यह सर्वे हर पांच साल करने पर विचार कर रही है।

कोल्ड स्टोरेज बढ़े तो नौकरियां भी बढ़ेंगी

देश में कोल्ड स्टोरेज के बढ़ने से न सिर्फ किसानों की फसलों का नुकसान बचेगा, बल्कि इससे रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। कोल्ड स्टोरेज के बढ़ने से फूड प्रोसेसिंग यानि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। अब तक खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में 17.41 लाख लोग रजिस्टर्ड तौर पर नौकरियां कर रहे हैं, जिसमें से 11.7 प्रतिशत रोजगार रजिस्टर्ड फैक्ट्ररी क्षेत्र में मिलता है। इतना ही नहीं, 47.9 लाख मजदूर गैर-रजिस्टर्ड खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में काम करते हैं।

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