कुछ ऐसी आसान तकनीकें जिन्हें अपनाकर आप भी बन सकते हैं सुपर किसान

कुछ ऐसी आसान तकनीकें जिन्हें अपनाकर आप भी बन सकते हैं सुपर किसानएयर ब्लास्ट स्प्रे

हर पल दुनिया बदल रही है तो फिर हमारी खेती-किसानी इससे अछूती कैसे रहे। आज के भारतीय किसान के सामने ढेरों चुनौतियां हैं। इनमें से सबसे बड़ी चुनौती है कम समय में अधिक सरलता से उपज हासिल करना। इस सवाल का जवाब तकनीक के पास है। हमारे देश की ही कुछ कंपनियों ने ऐसे यंत्र बनाए हैं जो किसानों के रोजमर्रा के काम को आसान बनाकर लागत तो कम करते ही हैं उपज की गुणवत्ता भी बढ़ा देते हैं:

1. रोबोट हार्वेस्टर:

जीरोबोमैक नाम की यह मशीन बनाई है एक ऐसे शख्स ने जिसने आईटी सेक्टर की नौकरी छोड़कर खेती करने का मन बनाया। इनका नाम है मनोहर संबंदम। मनोहर ने 2013 में तमिलनाड़ु में लगभग 30 बीघा जमीन खरीदी। तमाम फसलों पर विचार करने के बाद मनोहर ने कपास उगाने का निश्चय किया क्योंकि कपास की फसल कम पानी में भी हो जाती है साथ ही इसकी कीमत भी धान से अधिक होती है। संबंदम की मेहनत रंग लाई और भरपूर पैदावार हुई। लेकिन समस्या तब आई जब संबंदम को कपास का फूल तोड़ने के लिए मजदूर नहीं मिले। इस बीच असमय बारिश हुई और पूरी फसल चौपट हो गई।

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अब संबंदम ने अपने एक मित्र नीरज भारद्वाज की मदद से रोबॉटिक तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया। वर्षों की मेहनत के बाद वे ऐसा रोबॉट बनाने में कामयाब हुए जो भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल होने के साथ कपास के खेत से कपास आसानी से चुन सकता था। एक इंसानी हाथ की तरह यह रोबॉट भी कपास के फूल को बड़ी सफाई से पौधे से अलग कर लेता है। इसके इस्तेमाल से कपास तोड़ने के सीजन में मजदूरों की कमी की समस्या दूर हो गई साथ ही खेती की लागत में भी कमी आई।

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संबंदम इसी तरह के दूसरे रोबॉट बना रहे हैं जो खेत से बैंगन, भिंडी वगैरह तोड़ने का काम कर सकेंगे। इसके अलावा वे खरपतवार निकालने, पौधों की छंटाई करने और दवा वगैरह का छिड़कने का काम भी बखूबी कर सकेंगे।

2. फ्लाई ट्रैप

हानिकारक कीट पतंगों से फसलों का बचाव करने के लिए किसानों को भारी मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। इससे न केवल प्रदूषण फैलता है बल्कि खेती की लागत भी बढ़ती है, साथ ही यह खेत में काम करने वालों की सेहत के लिए हानिकारक है। इससे बचने का अनोखा उपाय खोज निकाला है बेंगलुरू की एक कंपनी ने। इस तकनीक के इस्तेमाल से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इन कीड़ों से फसलों की रक्षा होती है। बैरिक्स नाम की इस कंपनी ने नर कीटों को आकर्षित करने वाले हॉर्मोन का इस्तेमाल किया है।

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इस तरह करता है काम

एक चिपचिपे बर्तन या कागज पर हॉर्मोन की बूंदें लगा दी जाती हैं, अब नर कीट फसलों की तरफ ना जाकर इनकी ओर आकर्षित होते हैं। ये कीट चिपचिपे बर्तन या कागज से चिपक कर अपनी जान गवां बैठते हैं इस तरह ना केवल फसलें बच जाती हैं बल्कि नर कीटों की गैरमौजूदगी में मादाएं प्रजनन नहीं कर पातीं और नए कीट भी नहीं पैदा होते।

3. एयर ब्लास्ट स्प्रे

नासिक की एक कंपनी है मित्रा। मित्रा ने ऐसे पावर स्प्रे बनाए हैं जो अंगूरों और अनार की खेती में काम आते हैं। इनके जरिए पौधों पर हॉर्मोंस और जरूरी केमिकल का स्प्रे किया जाता है।

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मित्रा के संस्थापक देवनीत बजाज का कहना है कि जिस काम को 10 से 12 मजदूर दिनभर की मेहनत के बाद करते हैं उन्हें ये मशीनें महज आधे घंटे में कर सकती हैं। रही बात कीमत की तो इनकी कीमत दुनिया के दूसरे हिस्सों में बनने वाली ऐसी ही मशीनों से 30 प्रतिशत कम हैं।

4. पॉन्ड गार्ड

मछली पालने वाले जानते हैं कि जिस तालाब में मछली में पाली जाती हैं उसके पानी की क्वॉलिटी की कितनी अहमियत है। तालाब के पानी का तापमान कितना है, उसका पीएच कितना है, उसमें घुली ऑक्सीजन का लेवल क्या है यह जानने के लिए उन्हें तालाब पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। लेकिन आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा के श्रीराम रावी ने इरुवेका टेक्नॉलजी नामकी एक कंपनी में ऐसे हाईटेक गैजेट बनाए हैं जो न केवल इन सब मानकों को नापेंगे बल्कि उसी समय नतीजों को स्मार्टफोन के जरिए मछली पालने वाले तक भेज देंगे। सोलर पैनल से चलने वाले ये यंत्र मछलियों को मनचाहे समय पर चारा भी डाल सकते हैं।

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खेती की एक तकनीक जो है बाढ़ और सूखे के खिलाफ एक सुरक्षा कवच

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