खेती अच्छी रही तो देश की आर्थिक वृद्धि होगी 8% से ऊपर: नीति आयोग

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नई दिल्ली (भाषा)। बेहतर मानसून चालू वित्त वर्ष में देश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि को आठ प्रतिशत के पार पहुंचा सकता है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने यह विश्वास व्यक्त करते हुये कहा कि इस साल मानसून अच्छा रहने से आर्थिक वृद्धि दर 2015-16 के 7.6 प्रतिशत के मुकाबले एक प्रतिशत अंक तक ऊपर जा सकती है।

पनगढ़िया ने यहां मुख्य सचिवों और योजना सचिवों के एक सम्मेलन के मौके पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं काफी आशावादी हूं और विशेष तौर पर मानसून से उत्साहित हूं। मानसून इस बार अपना काम करेगा। हम जोरदार कृषि वृद्धि की उम्मीद कर सकते हैं।'' 

उन्होंने कहा, ‘‘यदि कृषि वृद्धि उस आधार पर होती है जिससे वृद्धि में कुछ प्रतिशत अंक जुड़ें तो आठ प्रतिशत से अधिक वृद्धि काफी संभव है। वर्ष 2016-17 में हमें आठ प्रतिशत को पार कर जाना चाहिए।'' भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मार्च तिमाही में बढ़कर 7.9 प्रतिशत हो गई जबकि विनिर्माण वृद्धि की मदद से वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान वृद्धि दर पांच साल के उच्चतम स्तर 7.6 प्रतिशत पर रही।

पिछले वित्त वर्ष के आकर्षक आंकड़ों से उत्साहित सरकार ने भी कहा था कि अच्छे मानसून के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के दौरान वृद्धि दर बढ़कर आठ प्रतिशत तक हो सकती है। कृषि क्षेत्र भी वृद्धि के दायरे में लौटा है जबकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान इसमें संकुचन हुआ था। हालांकि 2015-16 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 1.2 प्रतिशत के निम्न स्तर पर थी।

केद्र नहीं थोप रही राज्यों पर पंचवर्षीय योजनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कल नीति आयोग के दौरे के बारे में पनगढ़िया ने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री के साथ दृष्टि (2030 तक 15 साल के लिए), रणनीति (सात साल) और कार्य योजना (तीन साल) के दस्तावेज के साथ चर्चा करेंगे। हम इन दस्तावेज पर उनका दिशानिर्देश मांगेंगे और अपनी राय साझा करेंगे।''

कुछ राज्यों में पंचवर्षीय योजना जारी रहने के बारे में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों पर कुछ भी नहीं थोप रही है। कुछ राज्य अपनी योजनायें जारी रखेंगे। पनगढ़िया ने कहा, ‘‘जैसा कि आपको पता है, योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग बनाया गया है लेकिन ज्यादातर राज्यों में योजना बोर्ड बरकरार हैं।''

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें सुव्यवस्थित करने की ज़रुरत है, मसलन योजना और गैर-योजना व्यय के बीच फर्क। वर्ष 2017-18 से यह खत्म होना शुरु हो जाएगा। लेकिन जो राज्य योजना (पुरानी प्रक्रिया) बरकरार रखते हैं, वे अपने स्तर पर यह चुनने के लिए आजाद होंगे कि किस व्यय को वे राज्य स्तर पर योजना व्यय के तौर पर वर्गीकृत करना चाहते हैं।''

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