खेतों की मिट्टी बीमार: जाँच में मिली कार्बनिक तत्व की भारी कमी

vineet bajpaivineet bajpai   7 Dec 2015 5:30 AM GMT

खेतों की मिट्टी बीमार: जाँच में मिली कार्बनिक तत्व की भारी कमीगाँव कनेक्शन

कटिया (सीतापुर)। विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस के दिन सीतापुर जि़ले के कटिया केवीके पर करीब 300 किसानों को मृदा स्वास्थ कार्ड बांटे गये, जिसमें अधिकांश किसानों के खेतों में आर्गेनिक कार्बन की कमी पायी गयी।

कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) कटिया के पादप रक्षा वैज्ञानिक डॉ. डीएस श्रीवास्तव ने बताया, ''किसानों की मिट्टी की हाइड्रोजन आयन एकाग्रता, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटास, जिंक, सल्फर, बोरान तथा आयरन की जांच की गयी थी, जिसके बारे में उनके मृदा परीक्षण कार्ड में लिखा हुआ है। अधिकांश किसानों की मिट्टी बीमार पायी गयी है," उन्होंने आगे बताया, "यहां करीब 60 प्रतिशत किसानों के खेतों में जैविक कार्बन की कमी पायी गयी है, जो मुख्य होती है। जैविक कार्बन की मात्रा 0.5 से 0.7 तक होनी चाहिए, लेकिन पायी गयी है किसी में 0.2, किसी में 0.3 जो सही नहीं है"। कटिया सीतापुर जि़ला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर बिसवां ब्लॉक में स्थित है। 

कटिया केवीके के पास 250 किसानों की मिट्टी की जांच करने का लक्ष्य था, लेकिन लक्ष्य से बढ़कर करीब 300 किसानों की मिट्टी जांची गयी है।

जैविक कार्बन की मात्रा कम होने का कारण बताते हुए डॉ श्रीवास्तव कहते हैं, "ये होता है हरी खाद की कमी के कारण और अगर जैविक कार्बन कम हो जाएगा तो सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या खुद-ब-खुद कम हो जाती है। इससे उत्पादन क्षमता घटती जाती है"।

बिसवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत कटिया के पड़रिया गाँव के किसान रामेन्द्र कुमार (45 वर्ष) कहते हैं, ''हमारे खेत की मिट्टी की जांच में निकला है कि उसमें नाइट्रोजन की कमी है और डॉक्टर साहब ने कहा है कि हरी खाद और गोबर की खाद की कमी है।"

विश्व खाद्य संगठन द्वारा वर्ष 2015 को अन्तर्राष्ट्रीय मृदा वर्ष घोषित किया गया है तथा 5 दिसम्बर विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया द्वारा प्राथमिक विद्यालय कटिया में मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आनन्द सिंह ने किसानों को बताया, "देश में पिछले कुछ वर्षों से ज़्यादा से ज़्यादा उत्पादन प्राप्त करने के लिए रासायनिक उर्वरकों का अन्धाधुन्ध प्रयोग हो रहा हैै, जिसकी वजह से मृदा स्वास्थ्य एवं मृदा से उपलब्ध लाभदायक जीवाणुओं की संख्या में भारी कमी आयी है, जिससे मृदा की उत्पादन शक्ति कम हुई है।" उन्होंने आगे बताया, "इस लिये मृदा को स्वस्थ बनाये रखने के लिये, लक्षित उत्पादन प्राप्त करने के लिए, उत्पादन लागत कम करने के लिए रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को घटाया जाये तथा जैव उर्वरकों तथा जैविक खादों को बढ़ावा देने के लिये मृदा स्वास्थ्य कार्ड बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।"

पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. आनन्द सिंह दिवितीय ने बताया, "स्वस्थ मृदा के लिए पशुपालन बेहद जरूरी है, क्योंकि गौ मूत्र तथा गोबर की सड़ी हुई खाद का प्रयोग मिट्टी के लिये बहुत की कारगर होता है। इसका प्रयोग करें एवं वर्मी कम्पोस्टिंग को बढ़ावा दें।"

इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण के साथ-साथ कृषकों को मृदा स्वस्थ रखने के लिए जैव उर्वरक एजेटोबैक्टर, राइजोबियम, पीएसबी कल्चर एवं तरल एनपीके, तरल जिंक बांटा गया।

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