कहीं आईएएस लॉबी तो भारतीय कृषि सेवा के रास्ते का रोड़ा नहीं ?

कहीं आईएएस लॉबी तो भारतीय कृषि सेवा के रास्ते का रोड़ा नहीं ?gaon connection, गाँव कनेक्शन

भास्कर त्रिपाठी

नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक सेवा की तर्ज पर भारतीय कृषि सेवा की मांग जोर पकड़ रही है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के सामने अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ ने इस कैडर को बनाने की मांग रखी है। भारतीय कृषि सेवा का एक केंद्रीय कैडर बनाया जाए। जिसके निम्न अंग हों-

कृषि मंत्री ने क्या कहा 

इन सेवाओं के उदाहरण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ, ब्रज़ील और चीन जैसे देशों में हैं। छात्रों की मांग को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करते हुए कृषि मंत्री ने बस इतना कहा, ''अभी ज़मीन पर बहुत सुधार करने हैं, हम छलांग मारकर छत की बात नहीं कर सकते। हालांकि पक्षधरों का मानना है कि इन सेवाओं को बनाना भी कृषि की आधारभूत संरचना को सुधारने का एक हिस्सा है।"

"एआईएएसए के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी नहीं चाहते हैं कि ये कैडर बने। मौजूदा आईएएस लॉबी नहीं चाहती है कि ये कैडर बने, कारण भी साफ हैं कि कृषि के बहुत से पदों पर वो तैनात हैं। इसीलिए सालों से वो इस मांग को दबाते रहे हैं। वरना क्या कारण है कि देश की कुछ सबसे बड़ी कमेटियों द्वारा सुझाव देने के बाद भी आज तक इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया।" एआईएएसए के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधीर कुमार ने गाँव कनेक्शन को बताया।

बड़ी संख्या में भारतीय कृषि छात्र पढ़ाई पूरी करके नौकरी के लिए अन्य क्षेत्रों में पलायन कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए भारतीय कृषि सेवा के पक्षधर इसे सशक्त उपाए मानते हैं।

किन कमेटियों ने की सिफारिश 

भारतीय कृषि सेवा की मांग या इस पर चर्चा पिछले कई दशकों में रुक-रुक लगातार चलती रही है। साल 1958 में नालागढ़ कमेटी, साल 1976 में नेशनल एग्रीकल्चर कमीशन और साल 1988 में सरकारिया कमीशन इस कैडर को स्थापित करने की ज़रूरत को सरकारों के सामने रख चुका है।

साल 1963 में राज्यों के कृषि मंत्रियों की महासभा में तो इस कैडर को स्थापित करने के लिए सर्वसम्मत प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। पहले साल 1965, फिर 1971 में दो बार राज्य सभा इस कैडर को बनाने का दो-तिहाई मतों से प्रस्ताव भी पारित कर चुकी है। पांचवें और छठे वेतन आयोग ने भी इस कैडर की स्थापना की बात कही है। लेकिन हर बार इस कैडर की स्थापना को अनजान वजहों से दबा दिया गया।

''देश में अंब खेती को जितनी तेजी से सुधारने और मज़बूत बनाने की बात चल रही है, उसके लिए तो भारतीय कृषि सेवाओं का गठन ज़रूरी हो गया है। मेरे हिसाब से आज तक गठन इसलिए नहीं हो सका क्योंकि कृषि संरचना को इतनी गहराई से परखा नहीं जा सका था।"  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप-महानिदेशक कृषि शिक्षा, नरेंद्र सिंह राठौर ने बताया। परिषद के तहत कृषि अनुसंधान सेवाएं पहले से ही संचालित हैं लेकिन भारतीय कृषि सेवाओं के तहत आने से इसे और बल मिलेगा।

भारतीय कृषि सेवा से क्या होगा फायदा 

पक्षधरों संगठनों का मानना है कि इस कैडर के निर्माण से कृषि की कई आधारभूत दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा। एडीएस का काम होगा केंद्रीय स्तर पर बनी योजनाओं को राज्यों में लागू करवाना, एआईएस देश में खाद्य में मिलावट को रोकने के साथ-साथ फसल और पशु स्वास्थ्य को ख्याल रखेगा। एईएस का काम होगा देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों को एक छत के नीचे लाना और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती मेरिट और आवश्यकता के आधार पर करना। भर्तियों में पारदर्शिता की देश में बहुत कमी है। इन विश्वविद्यालयों की सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं की देख-रेख और उनमें सुधार भी एईएस के तहत ही आएगा।

''अभी विश्वविद्यालयों में भर्ती की प्रक्रिया बिलकुल भी पारदर्शी नहीं है। घूस देकर शिक्षकों की भर्तियां हो जाती हैं। इस सबकी वजह से शिक्षा का स्तर बहुत गिरा है। एईएस होंगे तो इस पर रोक लगाई जा सकेगी", सुधीर कुमार ने कहा।

कृषि विस्तार सेवा के ज़रिए कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्यों के कृषि और पशुपालन विभागों के बीच की दूरी को खत्म किया जा सकेगा।

जब नीतीश कुमार देश के कृषि मंत्री थे तो शरद पवार ने उन्हें पत्र लिखते हुए मांग की थी कि इस कैडर की स्थापना की जाए। लेकिन जब खुद शरद पवार कृषि मंत्री बने और भारतीय कृषि सेवा की मांग उठी तो उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि सेवा का गठन इस लिए संभव नहीं है क्योंकि उसमें वैज्ञानिकों की भर्ती आधिकारिक पदों पर होगी, लेकिन वैज्ञानिक क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञ होते हैं।

हालांकि ऐसा नहीं है कि देश में क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञों की भर्ती के लिए विशिष्ट केंद्रीय कैडर नहीं बने। वर्तमान समय में देश में अतिविशिष्ट सेवाएं जैसे- भारतीय इंजीनियरिंग सेवा, भारतीय रक्षा सेवा, भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय सांख्यिकी सेवा, भारतीय न्यायिक सेवा, भारतीय भू-वैज्ञानिक सेवा, भारतीय कॉर्पोरेट सेवा लागू हैं।

एआईएएसए के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि ''कृषि की एक योजना एक प्रशासनिक सेवाओं का अधिकारी अच्छी बना पाएगा या फिर जीवन भर कृषि पढ़ा उसी क्षेत्र का एक कृषि विशेषज्ञ। भारतीय कृषि सेवा से सबसे बड़ा अंतर यही आएगा कि देश की कृषि नीतियां सुधरेंगी।

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