कहीं हैंडपंप शो-पीस, तो कहीं दबंगों का कब्ज़ा

कहीं हैंडपंप शो-पीस, तो कहीं दबंगों का कब्ज़ागाँव कनेक्शन

लखनऊ/बाराबंकी। ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए अगले हफ्ते से प्रदेश में इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए जाएंगे। लेकिन जो गाँवों में पहले से लगे हैं, या तो खराब पड़े हैं, या फिर उन पर दबंगों का कब्जा है।

बाराबंकी जिला मुख्यालय से 30 किमी उत्तर में तहसील फतेहपुर के ग्राम बडेला में लगा एक हैंडपंप का सिर्फ थोड़ा हिस्सा दिख रहा है, बाकी कचरे से पटा है। गाँव के निवासी रमाकांश वर्मा बताते हैं, “लोग पानी के लिए तरस रहे हैं, दूसरे मोहल्ले में पानी लेने जाते हैं, लेकिन इसकी कोई सुध नहीं ले रहा है। 

ललितपुर जिले के मेहरौनी के मिदरवारा गाँव में हैंडपंप का ऊपरी हिस्सा हटाकर एक शख्स ने उसमें निजी मोटर लगा ली है। तो वहीं, कन्नौज में कई सरकारी नल लोगों के घरों में लगे हैं, उनमें भैंसे बांधी जाती हैं। 

यह महज तस्वीर है पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनताकी। एक तरफ लोगों को पीने का पानी मयस्सर नहीं है, तो वहीं दूसरी ओर अधिकारी एक एक दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं।

“प्रदेश में 26 लाख हैंडपंप लगे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में नए हैंडपंप तो नहीं लगे, लेकिन हर ब्लॉक में 50-50 के हिसाब से 41050 से ज्यादा हैंडपंप रिबोर किए गए थे,” यूपी जल निगम के मुख्य अभियंता ग्रामीण पीके त्यागी बताते हैं, “एक हैंडपंप पर 45 हजार से 80 हजार (बुंदेलखंड- सोनभद्र जैसे इलाकों में) रुपये तक लागत आती है। हमारा काम हैंडपंप लगाना है, रखरखाव का काम पंचायत का है, उसे इसका बजट मिलता है।”

वहीं, इस बारे में बात करने के लिए पंचायती राज विभाग के संबंधित अधिकारी उप निदेशक गिरीश चंद्र नागर से कई बार फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन एक बार भी फोन नहीं उठा।

बाराबंकी के ही निंदूरा ब्लॉक के सुलेमाबाद की रहने वाली कक्षा नौ की छात्रा गोल्डी सिंह बताती है, “ हमारे गाँव के अधिकतर सरकारी नल खराब पड़े हैं। प्रधान ध्यान ही नहीं देते। घर में लगे हैंडपंप से पानी नहीं आता। अब बाल्टी भर के बाहर से लाना पड़ता है।” वहीं, बाराबंकी से 500 किमी दूर मेरठ के भैंसाली बस अड्डे पर लगाए गए तीन हैंडपंप में से दो के तो सिर्फ अवशेष बचे हैं, बाकी लोग उखाड़ ले गए। 

“जब तक स्थानीय लोग और प्रधान जागरुक नहीं होंगे, समस्या हल नहीं होगी।” बाराबंकी में जल निगम के मुख्य अभियंता केडी गुप्ता बताते हैं। 

 रिपोर्टर - अरविंद/ वीरेंद्र शुक्ला

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