खुद खाद बनाकर उन्नत खेती कर रहे किसान

खुद खाद बनाकर उन्नत खेती कर रहे किसानगाँव कनेक्शन

फैजाबाद। जनपद के किसान खेती में रसायनिक खादों के कम प्रयोग पर अमल कर रहे हैं। हाल यह है कि जिले के कई गाँवों में किसान अब खुद घर के कूड़े व पशुओं के गोबर से जैविक उर्वरक बना रहे हैं और अपने खेतों में इस्तेमाल कर रहे हैं।

फैजाबाद जिला मुख्यालय से 30 किमी पर महोली गाँव के सत्य नरायन मौर्य (35 वर्ष) बताते हैं, ''गाँव की नज़दीकी निजी पारस कृषि संस्था की तरफ से चलाई जा रही फसल परियोजना में हमने खेत मे पड़े खराब पुवाल व पशुओं के गोबर व मूत्र से कीटनाशक दवाओं और जैविक खाद बानाने की जानकारी मिली।’’ सत्य नरायन मौर्य आगे बताते हैं, ''अब खेती में इसके प्रयोग से कम लागत लगाकर अधिक पैदावार व मुनाफा मिल रहा है।’’

आज फैज़ाबाद जिले के महोली सहित गुलालतारा, गुलाल गाँवों के अधिकतर किसान खुद जैविक खाद बनाकर प्रयोग कर रहे हैं। इससे उनको कम खर्चे मे अधिक पैदावार मिल रही है और साथ ही उनकी फसलों पर कोई भी उल्टा प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

पारस फाउन्डेशन के डायरेक्टर महेन्द्र प्रताप सिंह बताते हैं, ''किसानों के विकास के लिए हम नई तकनीकों की मदद से किसानों को जागरूक करते रहते हैं, ताकि उन्हें अधिक से अधिक पैदावार मिल सके। जैविक विधि किसानों को बिना लागत के घरों व खेतों के कूड़े व पशुओं के गोबर व मूत्र से अच्छी खादे बन जाती हैं।’’

जिले में किसान पहले फसल से निकले पुवाल को खेतों में जला देते थे, जिससे खेत और पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता था। लेकिन इन गाँवों के किसान इसे खाद बनाने मे प्रयोग करते हैं। इससे वह जगह-जगह अपने खेतों में नाडेप कम्पोष्ट, हिप, जीवामृत व वर्मी कम्पोस्ट जैसी विधियों से खाद बना रहे हैं।

''हम लोग पिछले कई वर्षों से खेती कर रहे हैं ,पहले बाज़ार में महंगे दामों पर किटनासक और रसायनिक खादें को खरीदते थे। अब खुद गोबर और खली की मदद से खुद खाद बनाकर खेतों में डालते हैं।’’ गुलालतारा गाँव के किसान राम कुमार (30 वर्ष) बताते हैं।

जैविक खादों को बनाने की विधियों के बारे में बता रहे हैं फैजाबाद जिले के किसान सत्य नरायन मौर्य

नाडेप कम्पोष्ट खाद बनाने की विधी

इस खाद को बनाने के लिए छायादार स्थान पर तीन फिट ऊंचाई का बांस खड़ा करके चारो तरफ बांस कि फर्ची लगा देते हैं। इसमें खरपतवार नौ इचं तक बिछा देते हैं उसके बाद 10 किलो पशुओं का गोबर 50 लीटर पानी में मिला कर इसका छिड़काव करते हैं। इसके बाद इसपर खेत की मिट्टी डाल कर चारो तरफ लेपाई कर देते हैं। यह एक एकड़ खेत के लिए 120 दिन में तैयार हो जाती है।

हिप खाद बनाने की विधी

इस खाद को बनाने के लिए छायादार स्थान पर तीन फिट गहरा गढ्ढा खोद देते हैं। इसमें खरपतवार 9 इचं तक बिछा देते है उसके बाद 10 किलो पशुओं का गोबर 50 लीटर पानी में घोल बना कर इसका छिड़काव करते हैं। बीच में दो पाइप गैस निकलने के लिए लगा देते हैं। उसके बाद खेत में मिट्टी डाल कर चारो तरफ लेपाई कर देते हैं। यह एक एकड़ खेत के लिए 120 दिन मे तैयार हो जाती हैं।

रिपोर्टर - रबीश कुमार वर्मा

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