कई बीमारियों में कारगर है कद्दू के बीज

कई बीमारियों में कारगर है कद्दू के बीजgaon connection

पेड़ पौधों के हर एक हिस्से का अपना औषधीय महत्व है, ये बात अलग है कि हम इनमें से अधिकतर गुणों से परिचित नहीं हैं। जानकारी के अभाव में अक्सर हम पौधों के कई हिस्सों को बेकार मानकर फेंक देते हैं। कद्दू या कुम्हड़े को कौन नहीं जानता? हर भारतीय रसोई में इसे एक महत्वपूर्ण और स्वादिष्ट सब्ज़ी के तौर पर पकाया, खाया और सराहा जाता है। कद्दू काटे जाने के बाद फल के अन्दर से जो बीज निकलते हैं, अक्सर उन्हें फेंक दिया जाता है। कद्दू के बीजों की खासियत इसमें पाए जाने वाले अनेक महत्वपूर्ण पोषक तत्व और रसायन हैं,जो हमारी सेहत को बेहतर बनाने के लिए कई मायनों में असरकारक होते हैं। आइए जानते हैं कद्दू के बीजों से तैयार हर्बल नुस्खे जिनकी उपयोगिता हो आधुनिक विज्ञान भी प्रमाणित कर चुका है। 

प्रोस्टेट वृद्धि

टेस्टोस्टेरोन प्रेरित प्रोस्टेट वृद्धि को रोकने के लिए कद्दू के बीजों को काफी कारगर माना जाता है। यूरोलोजिया इंटरनेशनालिस नामक जर्नल में 2008 में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के अनुसार कद्दू के बीजों से प्राप्त तेल से प्रोस्टेट वृद्धि को कम होते पाया गया है। माना जाता है कि प्रोस्टेट ग्रंथी की वृद्धि से परेशान रोगी को प्रतिदिन कम से कम 4-5 ग्राम बीजों का सेवन जरूर करना चाहिए।

रजोनिवृति और उससे जुड़ी समस्याएं

विज्ञान के प्रचलित जर्नल फाईटोथेरपी रिसर्च में सन 2008 में प्रकाशित एक क्लिनिकल रिपोर्ट के अनुसार जिन महिलाओं को कद्दू के बीजों के तेल (2 मिली) का सेवन 12 हप्तों तक कराया गया उनमें रजोनिवृति पर होने वाली स्वास्थय समस्याओं जैसे ब्लड प्रेशर बढ़ऩा, कोलेस्ट्रॉल का बढऩा, हॉर्मोन की कमी होना आदि में काफी सुधार देखा गया। इसके अलावा रजोनिवृति पर हृदयविकारों और रक्त प्रवाह से जुड़ी अन्य समस्याओं में कद्दू के बीजों से प्राप्त तेल को बेहत कारगर बताया गया है।

पथरी या किडनी स्टोन

सन 1987 में अमेरिकन जर्नल ऑफ  क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार जिन बच्चों की पेशाब परीक्षण सैंपल में कैल्शियम ऑक्सेलेट के कण पाए गए, उनके भोजन शैली में कद्दू के बीजों को सम्मिलित कर इस समस्या को काफी हद तक कम होते देखा गया। कैल्शियम ऑक्सेलेट दरअसल किडनी में पथरी का निर्माण करते हैं। 

हृदय और यकृत रोग

अलसी और कद्दू के बीजों की समान मात्रा, करीब 2 ग्राम प्रत्येक प्रतिदिन एक बार ली जाए तो माना जाता है कि यकृत की  कमज़ोरी और हृदय की समस्याओं के निपटारे के लिए अतिकारगर होते हैं। जर्नल ऑफ फूड केमिस्ट्री एंड टोक्सिकोलोजी में प्रकाशित 2008 की एक शोध रिपोर्ट भी इस तरह के दावों को सही ठहराती है।

रासायनिक दवाओं का दुष्प्रभाव

कद्दू के बीजों से प्राप्त प्रोटीन कई खतरनाक दवाओं के साईड इफेक्ट को कम करने में मददगार होता है। देखा गया है कि एसिटामिनोफेन जैसी दवाओं के सेवन का बुरा असर सीधे यकृत पर होता है, इस दवा के सेवन किए जाने के बाद कद्दू के बीजों या तेल की कुछ मात्रा के सेवन से दवा के बुरे असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा कार्बन टेट्राक्लोराइड की वजह से यकृत में होनी वाली हानि को कम करने के लिए भी ये अत्यंत कारगर है।

जोड़ दर्द या आर्थरायटिस

सन 1995 में जर्नल ऑफ  फार्मेकोलोजिकल रिसर्च की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार ड्रग इंडोमेथासिन, जो आर्थरायटिस के रोगियों को दी जाती है, के समतुल्य कद्दू के बीजों से प्राप्त तेल का असर होता है और तो और कृत्रिम ड्रग की तरह इन बीजों का मानव शरीर पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।

पेट के कीड़े

आधुनिक शोधों से प्राप्त जानकारियों पर यकीन किया जाए तो समझ आता है कि इन बीजों को चबाए जाने और निगलने से पेट और छोटी आंत के परजीवियों का नाश हो जाता है और हर्बल जानकार भी यही मानते हैं कि पेट के कीड़ों को मार गिराने के लिए कद्दू के बीज बेहद असरकारक होते हैं।

अनिद्रा, चिंता और तनाव (डिप्रेशन)

कद्दू के एक ग्राम बीजों में करीब 22 मिलीग्राम ट्रिप्टोफॉन प्रोटीन पाया जाता है, जिसे नींद का कारक भी माना जाता है। कनाडिअन जर्नल ऑफ  फिजिओलोजी में वर्ष 2007 में प्रकाशित एक शोध के परिणामों पर गौर किया जाए तो जानकारी मिलती है कि ग्लूकोज़ के साथ कद्दू के बीजों का सेवन करने वाले अनिद्रा से ग्रस्त रोगियों को आमतौर पर साधारण दिनों की तुलना में बेहतर नींद आती है। ग्रामीण इलाकों में जी मचलना, थकान होना या चिंतित व्यक्ति को कद्दू के बीजों को शक्कर के साथ मिलाकर खिलाया जाता है। 

हाथ-पैरों में जलन

हाथ पैरों में जलन होने पर कद्दू के बीजों को पीसकर इसका लेप जलन वाले हिस्सों पर करें, तुरंत राहत मिलती है। हर्बल जानकारों का मानना है कि लेप के सूख जाने के बाद हाथ पैर या जलन वाले अंग को नमक के घोल से धो लिया जाए, जल्दी आराम मिलता है।

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