कई गुणों से भरपूर आलू-बुखारा

कई गुणों से भरपूर आलू-बुखाराआलू बुखारा,गुणों से भरपूर

मौसमी फलों की बात की जाए तो मानसून के शुरुआती दौर में बाज़ार में आने वाले फल आलू-बुखारा का जिक्र जरूर किया जाना चाहिए, वैसे अन्य मौसम में भी आलू-बुखारा की आवक बाज़ार में बनी रहती है लेकिन दूसरे अन्य मौसम में इसके फलों के आकार अपेक्षाकृत छोटे होते हैं। वैसे बाजार में आलू-बुखारा सुखाकर भी बेचा जाता है। ताजा आलू-बुखारा देखने में हल्का लाल और मरून रंग का होता है जिस पर अक्सर हल्के सफेद रंग की छाप सी पड़ी होती है, जिसे साधारण पानी की धुलाई से साफ किया जा सकता है।

पके फलों का स्वाद बेहद स्वादिष्ट और अच्छा होता है, फल जितना ज्यादा पका हो उसमें मिठास भी उतनी ज्यादा होती है। फलों के अंदर एक कठोर और नुकीला बीज भी पाया जाता है जो कि खाने योग्य नहीं होता है। आधुनिक विज्ञान आलू-बुखारा के फलों को बेहतर सेहत के लिए अति उत्तम मानता है और अब तक ऐसे सैकड़ों अध्ययन किए जा चुके हैं जिनके परिणामों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह फल मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण है।

आंखों की रोशनी की बात की जाए या पेट के सफाई की या फिर रक्त अल्पता से ग्रस्त रोगियों के लिए उपचार की, आलू-बुखारा इस तरह के अनेक रोगों के निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख के जरिए हम अपने पाठकों को आलू-बुखारा के औषधीय गुणों से परिचित करवाने जा रहें हैं, इन गुणों को जानकर पाठक निश्चित ही इस फल के सेवन के लिए आतुर रहेंगे।

एंटी ऑक्सीडेंट गुणों की भरमार

आलू-बुखारा को एंटी ऑक्सीडेंट गुणों की खान कहा जाए तो अतिश्योक्ति ना होगी। आलू-बुखारा में बीटा कैरोटीन भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं और आधुनिक शोधों पर यकीन करें तो एंटी ऑक्सीडेंट्स और कैरोटीन की भरमार होने की वजह से आलू-बुखारा कैंसर जैसे भयावह रोग में राहत दिलाने वाला होता है। अनेक शोध रिपोर्ट्स के अनुसार फेफड़ों और मुख के कैंसर के रोगियों को आलू-बुखारा एक निश्चित समय तक दिया गया तो परिणाम बेहद सकारात्मक प्राप्त हुए।

एक अन्य प्रकार के एंटी ऑक्सीडेंट्स एन्थोसायनिन्स भी इसके फलों में खूब पाया जाता है जिनकी वजह से फलों का लाल रंग का होना संभव होता है, वैसे कई अन्य फलों में भी एन्थोसायनिन प्रचुरता से पाए जाते हैं। दर असल एंटी ऑक्सीडेंट कोशिकाओं के निष्कि्रयता या किसी तरह के नुकसान को रोकने में मददगार होते हैं इसलिए कोशिकाओं की सक्रियता से जुड़े तमाम तरह के रोगों के निवारण के लिए आलू-बुखारा को बेहद महत्वपूर्ण फल की तरह माना जाता है।

हृदय रोगों में

आलू-बुखारा में अनेक तरह के खनिज जैसे पोटेशियम, फ्लोराइड और लौह तत्वों की भी भरमार होती है जो कि लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण के लिए अतिआवश्यक होते हैं और इन्हीं कणिकाओं के कारण हृदय की धड़कना और रक्त संचार की प्रक्रियाओं में उतार चढ़ाव होता है और इनका आलू-बुखारा में पाया जाना हृदय रोगों के निवारण और बेहतर सेहत के लिए बेहद अच्छा माना जाता है और इसके लगातार सेवन से हृदय की सेहत बनी रहती है।

नेत्र रोगों में

स्वस्थ आंखों के लिए विटामिन ए को महत्वपूर्ण माना जाता है और विज्ञान की मान्यता है कि जिन लोगों में इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा का अभाव होता है उनमें आंखों से संबंधित समस्याओं का होना आम होता है। दर असल आंखों में पाए जाने वाले म्युकस झिल्ली को यह विटामिन स्वस्थ बनाए रखने में मददगार होता है।

आलू-बुखारा में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण डायट फ़ाईबर जियाजेन्थिन आपकी आंखों की रेटिना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और साथ ही इस फल में पाए जाने वाले विटामिन ए की वजह से इसे आंखों के लिए बेहद खास फल माना जाता है। माना जाता है कि जो लोग इस फल का ज्यादा से ज्यादा सेवन करते हैं, उन्हें अल्ट्रा वायलेट किरणों की वजह से आंखों में होने वाले नुकसान से बचने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया में

आलू-बुखारा पेट सफाई के लिए बेहद कारगर माना जाता है। आलू- बुखारा को बगैर छीलकर खाया जाए तो यह पेट की सफाई में मददगार होता है। सोर्बिटोल और आईसेटिन नामक रसायनों की उपस्थिति के कारण यह बेहद पाचक प्रवृत्ति का होता है अत: जिन्हें बहुत दिनों से कब्जियत और गैस की शिकायत हो उन्हें दो तीन दिन लगातार दिन में कम से कम दो बार आलू बुखारा के फलों को खाना चाहिए।

वजन कम करना

आलू- बुखारे के सेवन से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं, कब्जियत दूर होती है और पेट की बेहतर सफाई होती है। इन फलों में पाए जाने वाले फ़ाईबर्स और एंटी ऑक्सिडेंट्स की वजह से पाचन क्रिया ठीक तरह से होती है और शरीर की कोशिकाओं में मेटाबोलिज़्म की क्रिया सुचारू क्रम में होती है। इन फलों में सिट्रिक एसिड पाया जाता है जो कि थकान दूर करने में सहायक होता है और इसके सेवन से लीवर यानि यकृत और आंतो की क्रियाविधियां सुचारू रहती हैं अत: आलू-बुखारा खाने से शरीर में जमा अतिरिक्त वसा या ज्यादा वजन कम करने में मदद होती है।

हडि‍ड्यों की कमजोरी

आलू-बुखारा को सुखा लिया जाए और इसके सूखे फलों को चीरा लगाकर बीजों को फेंक दिया जाए। इस सूखे हुए आलू-बुखारा का सेवन रजोनिवृत्ति से पहले महिलाओं को अक्सर करते रहना चाहिए क्योंकि यह रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों में आयी कमजोरी को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होता है। इसके अलावा सूखे हुए आलू-बुखारे का सेवन महिलाओं में थायरॉयड समस्याओं के लिए भी बेहतर माना जाता है।

त्वचा के दाग धब्बे

तीखी धूप में झुलसी त्वचा या शरीर पर काले निशान पड़ गए हों तो आलू-बुखारा का रस बेहद मददगार होता है। माना जाता है कि इसके नियमित सेवन से त्वचा से दाग धब्बों की छुट्टी हो जाती है। कई शोध रिपोर्ट्स के परिणाम बताते हैं कि इसके ताजे पके फलों से तैयार रस से चेहरे पर मालिश की जाए तो यह चेहरे को तेजवान बनाने में मदद करता है।

सौंदर्य के लिए

आलू-बुखार सौदर्य के निखार के लिए महत्वपूर्ण फल है, इसमें पाए जाने वाले रसायन और एंटी ऑक्सिडेंट्स सौंदर्यता को बरकरार रखने में काफी मददगार होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रतिदिन आलू-बुखारा का सेवन करने से शरीर में ताजगी आती है और इसमें पाए जाने वाले पिगमेंट्स आपकी त्वचा को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा चमकदार बनाने में मदद करते है। सेंट एंड्रयू और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन करके बताया है कि जिन फलों में पिगमेंट की मात्रा उच्च होती है उनका सेवन करने से सांवली त्वचा के लोगों के रंग में बदलाव देखा गया है।

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