किसान सीख रहे मार्डन खेती के नुस्खे

किसान सीख रहे मार्डन खेती के नुस्खेgaoconnection

लखनऊ। जहां शिक्षित किसान कृषि और पशुपालन में नए-नए उपकरणों को अपनाकर अपनी फसलों को बेहतर करने में लगे हैं। वहीं कुछ किसान अब खेती और पशुपालन व्यवसाय में टेक्नोलॉजी की मदद भी ले रहे हैं। वो स्मार्ट फोन के जरिए स्मार्ट और मार्डन खेती के नए तरीके जान रहे हैं।

पिछले दो वर्षों से झांसी जिले के हरपाल सिंह खेती रो ज्ञान एप के द्वारा खेती किसानी और पशुपालन से संबधित जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। हरपाल सिंह बताते हैं, “एप के जरिए खेती और पशुपालन संबधित कोई भी प्रश्न पूछना होता है तो पूछ लेते हैं और कुछ ही घंटों में जवाब भी मिल जाता है। इस एप के कुछ विशेषज्ञ भी हैं जो समय-समय पर लेख के जरिए खेती और पशुपालन में क्या-क्या नए तरीके अपनाए जा सकते हैं इसकी जानकारी भी मिलती है।”

हरपाल सिंह के स्मार्ट फोन में एक ही खेती किसानी की एक ही एप नहीं है नहीं बल्कि कई ऐसी एप हैं, जिनके जरिए उनको खेती की नई नई तकनीक की जानकारी मिलती हैं। खेती के साथ-साथ हरपाल के पास 50 पशु भी हैं।

तकनीक की मदद से किसानों को फायदा मिले और उपज बढ़े। इसके लिए किसान नए-नए तकनीकों को अपना रहा है। डिजि़टाइजेशन के दौर में देश के किसान अब पीछे नहीं हैं। ख़ुद को आगे लाने के लिए संचार क्रांति से जुड़ गए हैं। देश के कई इलाक़ों में अलग-अलग नाम से किसानों के व्हाट्स एप ग्रुप बन गए हैं तो कही किसान एप के जरिए जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। 

मैनपुरी जिले के बालकृष्ण यादव डेयरी चला रहे है। ‘डेयरी मैनजमेंट’ एप के जरिए अपनी डेयरी का रख-रखाव करते हैं। एप से होने वाले फायदे के बारे में बालकृष्ण बताते हैं, “पांच वर्षों से डेयरी चला रहे हैँ लेकिन जब से एप और पशुपालन के ग्रुप से जुड़े हैं हमारी डेयरी में काफी बदलाव आया है। खाली समय में एप में लिखे लेख से काफी जानकारी मिलती है साथ ही कौन से मौसम में डेयरी में क्या-क्या सावधानी बरतनी है इसकी पूरी जानकारी मिलती है। 

 ये भी कुछ हैं अन्य एप

फार्म ओ पीडिया एप: यह एप्लिकेशन कृषि से जुड़े किसानों व अन्य सभी लोगों के लिए भी उपयोगी है। यह अभी अंग्रेजी और गुजराती भाषाओं में उपलब्ध है। इस एप के जरिए मिट्टी और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसलों का चुनाव, मौसम की जानकारी, मवेशियों की देखभाल की  जानकारी मिलती है। 

एम किसान एप: यह एप्प सीडैक पुणे की मदद से कृषि एवं सहकारिता विभाग की अपनी आईटी टीम द्वारा विकसित किया गया है। इसका उपयोग एमकिसान पोर्टल पर पंजीकरण के बिना भी विभिन्न स्तरों पर विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों द्वारा भेजे जा रहे परामर्श और सूचना प्राप्त करने के लिए किसानों द्वारा किया जा रहा है। 

एग्री पोर्टल: इस एप से कृषि व्यापारी और किसान बिना किसी शुल्क के अपने मोबाइल के माध्यम से नवीनतम मूल्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस एप से मंडी की जानकारी मिलती है, कृषि बाजार के उतार-चढ़ाव को भी बताती है। 

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