किसानों के लिए मिसाल हैं हरियाणा के महाबीर सिंह

किसानों के लिए मिसाल हैं हरियाणा के महाबीर सिंहgaonconnection, किसानों के लिए मिसाल है हरियाणा का ये किसान

लखनऊ। कृषि क्षेत्र में नये प्रयोग कर किसान ने पांच साल में ही बागवानी के साथ ही दलहनी फसल लेकर दोगुना आमदनी कमा रहे हैं। साथ ही दूसरे किसानों को भी केंचुआ खाद बनाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के नांगल गाँव के किसान महाबीर सिंह (48 वर्ष) ने करीब पांच साल पहले अपना काम शुरू किया और आज बागवानी के साथ दलहन जाति की फसलें उगाकर, केंचुआ पालन, ड्रिप सिंचाई, बायोगैस संयंत्र लगाकर, केंचुआ खाद बनाकर पूरे जिले में नाम कमा चुके हैं। वहीं केंचुआ पालन करने वालों को केंचुआ मुफ्त में देकर वे दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

महाबीर सिंह अपनी शुरूआत के बारे में बताते हैं, “मैंने सरकार की ओर से केंचुआ पालन एवं पशु पालन विभाग की ओर से डेयरी की ट्रेनिंग भी ली और जानकारी के लिए पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान तक भी हो आया हूं। आखिर में महाराष्ट्र के जलगाँव में जाकर ड्रिप सिंचाई योजना की सही जानकारी मिली।”

पांच साल पहले महाबीर सिंह ने अपनी तीन एकड़ जमीन पर नींबू, बेर, किन्नू, आंवला, बेल और जामुन के पौधे लगाए।

इन पौधों के बीच में मूंगफली, मूंग, लहसुन, प्याज एवं मटर उगाकर रबी एवं खरीफ फसल पैदावार से बेहतर आय प्राप्त की। पिछले साल बेर के फल बेर करीब 30 हजार रुपए के बेचकर, नींबू करीब 20 हजार के बेचकर मुनाफा कमाया और दूसरे किसानों को भी यह काम करने के लिये प्रेरित किया। प्याज के शेड में प्याज एवं लहसुन उत्पाद रखकर करीब एक लाख रुपए की प्याज एवं 50 हजार रुपए की लहसुन बेचकर। दस से बारह हजार रुपए के मटर उत्पादन किया।

कृषि विभाग की प्रेरणा से उन्होंने बायोगैस संयंत्र भी लगवाया। उनके पास पांच पशु हैं जिनके गोबर से वो बायोगैस बनाते हैं। महाबीर सिंह बताते हैं, “बायोगैस संयंत्र से पांच लोगों के परिवार का खाना आसानी से बना जाता है।”

कृषि विभाग से ट्रेनिंग लेकर महाबीर सिंह ने अपने फार्म पर ही केंचुआ पालन केन्द्र स्थापित कर दिया।

इस केन्द्र से प्राप्त वर्मी कम्पोस्ट को उन्होंने अपने खेत में फल, सब्जी एवं फूलदार पौधे उगाने के लिये उपयोग किया जिससे भारी सफलता मिली। साथ जो लोग केंचुआ पालन केन्द्र स्थापित करना चाहते हैं उन्हें वे मुफ्त में केंचुआ दे रहे हैं। खेत में बागवानी के लिए ड्रिप सिंचाई योजना को अपनाया। इस विधि से कम पानी खर्च होता है और जो भी पानी खर्च होता है वह सीधे पौधों को प्राप्त हो रहा है। इतना कुछ होते हुए भी महाबीर सिंह खुश नहीं हैं।

उनका कहना है कि किसान आयोग स्थापित किया जाये जो किसानों के हितों की देखरेख करेगा। उन्होंने विभिन्न शीर्ष नेताओं को तथा मंत्रियों को भी इस सम्बन्ध में पत्र प्रेषित किया है। बागवानी विभाग की ओर से उन्हें सहायता मिलने पर उन्होंने देसी बेरी के पौधे लगाकर उसमें कलम लगा ली। वो कहते हैं, “कलम वाले पौधों में चार साल में ही फल आने लगते हैं, जबकि दूसरे पौधे कई साल में तैयार होते हैं।”

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