कोई खेलेगा जी भरके, कोई खेती में बंटाएगा हाथ

कोई खेलेगा जी भरके, कोई खेती में बंटाएगा हाथगाँव कनेक्शन

लखनऊ। निजी और सरकारी स्कूल की पढ़ाई में अंतर इससे समझा जा सकता है कि निजी स्कूल के बच्चे गर्मी की छुट्टियों को बिताने के लिए हिल स्टेशन जा रहे हैं, वहीं सरकारी स्कूल के बच्चे अपने खेतों में पिता का हाथ बंटवाने की तैयारी में हैं। सभी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा पांच तक के बच्चों की छुट्टियां 7 मई से जारी हैं तो वहीं इसके आगे की कक्षाओं की छुट्टियां 14 से 20 मई के बीच होने जा रही हैं। गर्मी की छुट्टी में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तैयारियां जहां हिल स्टेशन और वॉटर पार्क जाने, कम्प्यूटर और मोबाइल गेम खेलने की हैं तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की छुट्टियां हर बार की तरह इस बार भी खेतों में अपने माता-पिता का हाथ बंटाने के साथ आम के बागों में दोस्तों संग आम खाने और गुड्डा-गुड़िया, गुट्टा, गेंदताड़ी और सिकड़ी खेलने की है। 

सेंट

फ्रांसिस स्कूल में कक्षा नौ का छात्र संचित इस बार छुट्टी में अपनी नानी के घर जाने की तैयारी में है। वहां जाकर अपने माता-पिता, मामा और और मौसा की फैमिली के साथ वह कुछ समय के लिए मसूरी जाएंगे। इसके बाद वह अपनी पसंद की कुछ फिल्मों को देखने के साथ अपने दोस्तों के साथ मौज-मस्ती और शॉपिंग करने की तैयारी में है। हां, वाटरपार्क तो इस बार उनको पक्का जाना है क्योंकि छुट्टी में वाटरपार्क नहीं गये तो कुछ अधूरा सा लगता है। संचित कहता है कि छुट्टी में भी कुछ समय मैं अपनी पढ़ाई को देना चाहूंगा क्योंकि मैं कक्षा 9 में हूं और कुछ समय बाद मेरे फार्मेटिव एग्जाम होने वाले हैं जिसके मार्क्स कक्षा 10 में जोड़े जायेंगे। 

वहीं सेंट क्लेअर्स कान्वेंट स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ने वाली पलक चन्द्रा इस बार छुट्टी में 14 मई को कुछ दिनों के लिए नैनीताल जा रही हैं। स्कूल में भी पलक अपने दोस्तों से इसी बारे में बात करती रहती हैं और दोस्तों के लिए नैनीताल से क्या लाया जाये यह पूछती रहती हैं। पलक कहती हैं कि पिछली बार मैँ छुट्टी में अपने माता-पिता और भाई के साथ केदारनाथ, बद्रीनाथ, मसूरी जैसी जगहों पर गयी थी इस बार नैनीताल जाने का मन था इसलिए पापा से जिद की। पलक कहती हैं कि गर्मियों में हिल स्टेशन से बेहतर कोई जगह नहीं। पलक ने नैनीताल जाने के लिए ढेर सारी शॉपिंग की है और खासकर वह शार्ट्स खरीदे हैं जो लखनऊ में पहनने में ऐतराज करती हैं। वही कहती हैं कि मैं नैनीताल में अपनी मर्जी के अनुसार जीना चाहती हूं। नैनीताल से अपने दोस्तों के लिए तोहफे लाने का भी प्लान पलक ने बना रखा है। वापसी के बाद छुट्टी के कुछ और दिनों को दोस्तों के साथ पार्टी और मौज-मस्ती में गुजारना चाहती हैं। कहती हैं कि फिर तो पूरे साल बस पढ़ाई ही करनी है।

वहीं दूसरी ओर मॉल के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मॉल में कक्षा 6 में पढ़ने वाले शिव गौतम गर्मी की छुट्टियां हर बार की तरह इस बार भी बकरी चराते, आम के बाग में आम तोड़ते और मजदूरी के काम में अपने पिता का हाथ बटाते हुए ही गुजारने की बात कहते हैं। शिव गौतम कहते हैं कि अपने दोस्तों के साथ खेत और बाग में खेलने भी जाते हैं। कभी कंचे खेलते हैं तो कभी गेंदतड़ी, तो कभी सिकड़ी। शिव बड़ी उदासी के साथ कहते हैं, कि हमारा भी मन करता है कि छुट्टी में कहीं घूमने जायें,  पर हम कभी कहीं घूमने नहीं जाते क्योंकि माता-पिता के पास न तो ज्यादा पैसे हैं और न ही हमारे कोई खास रिश्तेदार हैं। घर में तो टीवी नहीं है इसलिए छुट्टी में अपने दोस्तों के साथ उन घरों में जाकर टीवी भी देख लेते हैं जहां टीवी है।

शायद ही कोई बच्चा हो जो छुट्टी के नाम से खुश न होता हो। लेकिन काकोरी स्थित आदर्श जूनियर हाईस्कूल, गोहरामऊ में कक्षा 7 की छात्रा पारुल चौरसिया छुट्टियों के नाम से बेहद उदास हैं।पारुल कहती हैं कि छुट्टी में खेत में काम करना है या माँ के काम में हाथ बटाना पड़ता है जो दूसरों के घर काम करती है। तो कभी पिता के मजदूरी के काम में। लड़की होने के नाते माता-पिता सहेलियों के साथ भी कम ही जाने देते हैं। सहेलियां घर आ जाती हैं तो उनके साथ गुड़िया-गुड्डा की शादी का खेल खेलते हैं या फिर गुट्टे। समय बचा तो कुछ पढ़ाई भी खुद से कर लेते हैं। पारुल कहती हैं कि मुझे छुट्टियां अच्छी नहीं लगतीं क्योंकि तब न तो सर और मैम मिलते हैं न ही स्कूल के दोस्त और न ही एमडीएम। 

रिपोर्टर - मीनल टिंगल

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