कॉफी पर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधी बात

कॉफी पर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातगाँव कनेक्शन

लखनऊ। एक कमरे में घुसने से पहले ग्राम प्रधान शेषनाथ तिवारी के पैर कांप रहे

थे, पर दो घंटे के बाद बाहर निकलते समय उनकी चाल बदली-बदली सी थी। हो भी क्यों न, वो जिलाधिकारी के घर पर उनके साथ कॉफी पीकर बाहर आ रहे थे।

यह अनूठी पहल शुरु की है गोंडा के डीएम आशुतोष निरंजन ने इस दौरान वह ग्राम पंचायत के सभी प्रतिनिधियों को कॉफी पर अपने घर के ऑफिस बुलाते हैं और उनके साथ कॉफी पीने के साथ ही पंचायत में हो रहे विकास कार्यों की चर्चा करते हैं। डीएम ने इसे नाम दिया है ‘कॉफी विद कलेक्टर’।“एक कलेक्टर के सामने एक प्रधान और चौकीदार जाएगा तो डर लगेगा ही, लेकिन जब डीएम साहब से मिल कर दो घंटे बाद बाहर आ रहे थे तो काफी अच्छा लग रहा था। उन्होंने हमें अपना मोबाइल नंबर भी दिया है कि गाँव के किसी भी कार्य के लिए हम उनसे सीधे बात कर सकें।” गोंडा जिले की तरबगंज तहसील के खानपुर गाँव के प्रधान शेषदत्त तिवारी ने बताया, “उस मुलाकात के बाद हम लोगों को नई ऊर्जा मिली है।”

जिलाधिकारी के आवास पर पंचायत प्रतिनिधयों के साथ यह बैठक सुबह आठ बजे शुरू होती है, जिसके लिए 45 मिनट का समय निर्धारित है। लेकिन बैठक डेढ़ से दो घंटे तक चल जाती है, क्योंकि माहौल हंसी-खुशी के साथ मुद्दों पर विमर्श का होता है। पंचायत प्रतिनिधियों को कॉफी के लिए अपने आवास पर बुलाने का कारण बताते हुए जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन कहते हैं, “देखिए ग्रामीण विकास की पूरी मशीनरी गाँव स्तर पर काम करती है। लेकिन जिलों के अफसरों का ग्रामीण मशीनरी के साथ सीधा जुड़ाव नहीं है”।

शहर के लिए शुरू होगी ‘नगर चौपाल’

ग्रामीणों की समस्याएं दूर करने की बात तो बहुत होती है, लेकिन शहरी लोगों से संवाद स्थापित करने की व्यवस्था नहीं है। ऐसी व्यवस्था शासन से नहीं की गई है। गोंडा शहर की समस्याओं को दूर करने और सफाई आदि के लिए अब ‘ नगर चौपाल’ शुरू की जाएगी। इसमें जिलाधिकारी और उनकी टीम वार्ड पर बैठक कर लोगों की समस्या जानेंगे, और उन्हें दूर करने की कोशिश करेंगे।

आशुतोष कहते हैं, “हमारी कोशिश है कि इसे खत्म किया जाए। कुछ उनके सुझाव होते हैं कुछ हम देते हैं। इससे ग्रामीण मशीनरी को काम करने का प्रोत्साहन मिलता है।” 

पंचायत प्रतिनिधियों को ऑफिस की बजाय घर पर कॉफी के लिए बुलाने का भी एक अपना कारण है। “किसी के साथ अगर घर में बैठकर आप खाना खा लेते हैं, तो उसके साथ सारी बंदिशें टूट जाती हैं। इसके बाद वह जुड़ाव महसूस करता है,” डीएम ने कहा, “हमने प्रधानों से अपील की है कि महीने के पहले सोमवार को सभी पंचायत कर्मचारियों को अपने यहां खाने पर बुलाएं। इससे उनमें और जुड़ाव बढ़ेगा।”

पंचायत प्रतिनिधियों के साथ काफी और नाश्ते के बीच विकास और सुशासन की राह तलाशने का एक एजेंडा भी होता है। इसके लिए तैयार प्रारूप में राजस्व, ग्रामीण विकास और कानून-व्यवस्था पर चर्चा की जाती है। इससे जुड़े ग्रामीण प्रतिनिधियों को बुलाया जाता है। जैसे- प्रधान, पंचायत सेक्रेटरी, आशा बहू, लेखपाल, बीट दरोगा और चौकीदार।

कलेक्टर के साथ काफी पीने के बाद अवाज में खनक के साथ लौटे खानपुर गाँव के बीट दारोगा बलविन्दर सिंह कहते हैं, “मैंने पहली बार इतने बड़े अधिकारी के साथ बैठ कर कॉफी पी है। मीटिंग के दूसरे दिन हमें प्रधान जी का फोन आया और रास्ते में जो खानपुर गाँव में गंदगी पड़ी थी उसे हटवाया है। उसके बाद हमारी प्रधान जी से रोज बात होती है। डीएम साहब से मुलाकात के बाद हमारा उत्साह दोगुना हो गया है।”

मीटिंग के दौरान सभी के नंबर एक दूसरे को दिए जाते हैं, जिससे आगे वह आपस में बात कर सकें। साथ ही मीटिंग के प्वाइंट्स नोट भी किए जाते हैं ताकि आगे की समीक्षा बैठकों में उस पंचायत के विकास कार्यों पर बात की जा सके।

“हर महीने जितनी पंचायत प्रतिनिधियों से मिलूंगा उनके यहां हुए विकास कार्योँ की समीक्षा भी करूंगा। 

मीटिंग के दौरान पता चलता है कि उन लोगों के पास एक दूसरे के नंबर ही नहीं हैं। इस दूरी का खत्म होना बहुत जरूरी है,” डीएम आशुतोष निरंजन ने बताया, “हर आदमी प्रधान और पंचायत सचिव से नाखुश रहता है, इसलिए वह अच्छा काम करें उनके लिए प्रोत्साहन जरूरी है।”

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